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    अलीगढ़। हिजाब कांड: सरकार और देश को कमजोर करने की हिजाब के बहाने की जा रही कोशिश:- महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती

    अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ में कर्नाटक हिजाब मामले में अब अखिल भारत हिंदू महासभा में कूद पड़ी है। हिंदू महासभा ने आज प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन अलीगढ़ के जिलाधिकारी को सौंपा गया। जिसमें उन्होंने मांग की कि किसी भी संस्थान को मजहबी पहनावे से दूर रखा जाए।उसमें उन्होंने देश में समान नागरिक संहिता कानून बनाकर लागू करने की मांग की। इस दौरान अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव डॉ पूजा शकुन पांडे उर्फ अन्नपूर्णा भारती के नेतृत्व में आज हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपा।

    हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव अन्नपूर्णा भारती उर्फ पूजा शकुन पांडे ने कहा कि जिस तरीके से हिजाब का मुद्दा कुछ राजनीतिक दलों द्वारा करवाया जा रहा है यह हम लोग अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझते हुए समान नागरिक संहिता की बात करे। क्योंकि समान नागरिक संहिता ही एकमात्र उपचार है इस देश में इस तरीके की रूढ़िवादिता को खत्म करने के लिए। मुस्कान जो बच्ची है वह हमारे लिए बेटी ही है लेकिन निश्चित तौर पर उसकी तालीम में कहीं ना कहीं कमी है यह जो कुरान को गलत तरीके से प्रजेंट कर रहे हैं। शैक्षिक संस्थान जो है वह सच्चे समरसता का स्वरूप है जहां पर बच्चों को सिर्फ शिक्षा दी जाती है। जब शिक्षक मैनिपुलेट नहीं करता पड़ाने में कि हिंदू है कि मुस्लिम या किस जाति का है। तो ऐसे में परिधान अनुशासन का बहुत बड़ा हिस्सा है ऐसे में वह शिक्षण संस्थान ही तय करेगा कि वहां पर क्या परिधान होना चाहिए उसको सबको मान्य होना चाहिए। होना बहुत जरूरी है कि ये जो गलत तरीके से जो फैला रहे हैं। शिक्षण संस्थान को ही तय करना चाहिए कि वहां पर क्या परिधान होना चाहिए और जो सब को मानना होना पड़ेगा । जब तक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू नहीं होगा तब तक इसको लोकतांत्रिक कहना सही नहीं होगा। हमें ऐसे लोगो  से बचना है। यह बच्चों को गुमराह करके इस तरीके के इसयू क्रिएट करा रहे हैं। जो अननेसेसरी राजनीतिक मुद्दा बने। आज आप हिजाब की बात कर रहे हैं कल नमाज की बात करेंगे संस्थानों में, फिर आप शुक्रवार की छुट्टी मांगेंगे, फिर हलाला के लिए रूम की डिमांड करेंगे तो आपका कोई भरोसा नहीं है। यह शिक्षण संस्थान है यहां पर केवल और केवल अनुशासन चलेगा और शिक्षा चलेगी हमारा अनुशासन व डिसिप्लिन चलेगा। शिक्षण संस्थान को राजनीति से दूर कर देना चाहिए वहां पर केवल एक ग्रुप होना चाहिए जो छात्रों की समस्या का निवारण करें वह किसी पार्टी का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए समान नागरिक संहिता में बार-बार एक ही बात होना चाहिए की जनसंख्या नियंत्रण कानून और जनसंख्या समान नागरिक संहिता कानून जब तक इस देश में लागू हो जाएगी तो इस देश की सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा जो आरोप हम पर या ओवैसी पर लगाए जाते हैं। वह सब सही हो जाएगा।

    उन्होंने कहा कि देश में कुछ सांप्रदायिक एवं राष्ट्र विरोधी ताकतें समान नागरिक संहिता कानून ना होने पर धर्म के आधार पर गैरजरूरी मांग कर देश को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं। जिससे देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का अर्थ पंथनिरपेक्ष कानून होता है। जो सभी पंथ के लोगों के लिए समान रूप से लागू होता है। अलग-अलग पंथो के लिए अलग-अलग सिविल कानून ना होना ही समान नागरिक संहिता की मूल भावना है। यह कानून व्यक्तिगत स्तर पर संपत्ति के अधिग्रहण और संचालन, विवाह ,तलाक व गोद लेने जैसे विषय पर बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 44 में दर्ज है। जिसमें नीति निर्देश दिया गया है कि समानता कानून लागू कराना सरकार का लक्ष्य होना मूल अधिकारों में भी विधि के शासन की अवधारणा में विद्यमान है। जिसके अनुसार सभी नागरिकों को हेतु एक समान विधि होनी चाहिए। 

    उन्होंने कहा कि सभी वर्ग के लिए कानून में एक समानता से देश में एकता बढ़ेगी जिसमें देश में तेजी से विकास होगा, लेकिन खेद है कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व में मुस्लिम महिलाओं के लिए तलाक के बाद भरण पोषण के कानून जो कि शाहबानो वाले मामले में दिया गया था। पूर्व की कांग्रेस सरकार ने निष्प्रभावी कर दिया एवं समान नागरिक संहिता लाने के न्यायपालिका के उद्देश्य को विफल कर दिया। अभी कुछ धर्मों के पर्सनल लॉ बोर्ड में महिलाओं अधिकार सीमित है।महिलाओं को अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार एवं गोद लेने जैसे मामलों में एक समान नियम लागू होने चाहिए। धार्मिक रूढ़ियों की वजह से समाज के एक वर्ग के अधिकारों का हनन होना न्याय उचित नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय बार-बार अपने निर्णय में इस वर्गों के लिए समानता की बात करता है। उन्होंने कहा कि अभी कर्नाटक राज्य में स्कूलों में अपने-अपने धर्म के अनुसार परिधान पहनने का मामला गर्म आ रहा है तथा मुस्लिम धर्म के छात्रों छात्राओं द्वारा हिजाब पहनकर स्कूल में आने की जीत पर अड़ी है, जबकि कर्नाटक में स्कूलों में ड्रेस कोड लागू किया गया है जो कि सभी वर्गों के लिए समान है ।कुछ धार्मिक कट्टरपंथी मुस्लिम छात्राओं को उकसा कर इस मामले को हवा दे रहे हैं। समान नागरिक संहिता कानून ना होने से ये कट्टरपंथी अपने धर्म के अनुसार स्कूलों में नियम लागू करवाना चाहते हैं।आज हिजाब मांग रहे हैं, कल यह मस्जिद भी मांगेंगे। 

    कहा इसी तरह पूर्व में वायु सेना के एक अधिकारी ने भी अपनी मजहबी दाढ़ी बढ़ाकर सेना में नौकरी करनी चाही। जिसे वायु सेना ने निकाल दिया और वह उसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट गया।। सुप्रीम कोर्ट ने भी वायु सेना के ड्रेस कोड को उचित माना और उसे तत्काल वायु सेना के नियम मानने को वाद्य किया। इसीलिए अखिल भारत हिंदू महासभा मांग करती है कि देश में समान नागरिक संहिता कानून संसद के वर्तमान सत्र में पारित कराकर उसे पूरे देश में लागू किया जाए। 

    देश के सभी स्कूलों में एक ड्रेस कोड बनवाया जाए जो कि धर्म पर आधारित ना होकर समानता का प्रतीक हो धार्मिक स्कूलों संस्कृत विद्यालय एवं गुरुकुल आदि को छूट दी जाए। स्कूलों में ड्रेस पहनकर न आने के मामले में सजा का भी प्रावधान रखा जाए। उन्होंने मांग की है कि इस तरह की मांगों को शीघ्र सुनिश्चित किया जाये। 

    अजय कुमार

    Initiate News Agency (INA), अलीगढ़

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