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    पलवल। लाखों लोगों ने किए दर्शन

    पलवल। होडल  के गाँव शेषसाई मन्दिर में  जया एकादशी के उपलक्ष्य में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी लाखों लोगों ने  भगवान लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए और इस मौके पर एक विशाल मेले का आयोजन किया गया  ! भगवान् लक्ष्मी नारायण के दर्शन करने के लिए   दिल्ली,राजस्थान,यूपी,मध्य प्रदेश,हरियाणा,उत्त्राखंड के अलावा अन्य प्रदेशों के महिला पुरुष श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ से लोग पहुंचे। यहां आने से और  भगवान लक्ष्मी नारायण के दर्शन करने से लोगों की हो जाती हैं मुरादे पूरी,  इस मेले में पुलिस के भी पुख्ता इंतजाम किए गए। 

    गाँव शेषसाई बने भगवान लक्ष्मी नारायण के मंदिर के सामने एक विशाल तालाब है जिसको भागवत गीता  में छीर सागर के नाम से जानते हैं ! इस मंदिर में भगवान लक्ष्मी नारायण की यह अदभुत प्रतिमा है जो इस तालाब से सैकड़ों वर्ष पूर्व निकली थी ! इस छीर सागर का पानी हमेसा खारा रहता है यह मंदिर के बिलकुल सामने है सबसे पहले जो इस मंदिर में आता है वह भगवान के दर्शन करने से पहले इस तालाब में हाथ ,मुहु, धोना व् स्नान आदि करते हैं । इस तालाब का विस्तार 36 किलोमीटर के बीच में बताया जाता है लेकिन आज यह धीरे -धीरे समय के अभाव में छोटा होता जा रहा है! भगवान लक्ष्मी नारायण का मंदिर लगभग 9 सौ साल पुराना है और इस मंदिर में भगवान लक्ष्मी नारायण की एक ऐसी प्रतिमा है जो पुरे भारत वर्ष में कहीं पर भी नहीं मिलेगी  ! भगवान की इस प्रतिमा की यह खासियत है की भगवान विष्णु जी की एक आँख है पुरे संसार की तरफ है और एक आँख देवताओं की तरफ है। भगवान  विष्णु जी शेषनाग पर सेन कर रहे हैं और इनके पेरों में लक्ष्मी जी हैं जो भगवान के पेरों को दबा रही हैं और इनकी नाभी में कमल है और इस कमल से उत्पन्न दिखाई दे रहे ब्रह्मा जी है और इनके नेत्र के नीचे धन के राजा कुबेर विराजमान है और जो यह अधिक संख्या में दिखाई दे रहे हैं यह बताया जाता है की यह तेतीश करोड़ के देवता है जिनकी तरफ भगवान का एक नेत्र है। 

    मंदिर की खासियत मंदिर में अदभुत ही कलाकृति बनाई गई है जिसके बारे में बताया जाता है यह इस मंदिर में यह कलाकृति बल्लभगढ़ के राजा बल्लू ने बनवाई थी इसमें व्रज चौरासी कोष का वरनन है। 

    इस मंदिर के पुजारी सुनील गोस्वामी  ने मंदिर के बारे में  बताया  आज से लगभग 9 सौ  वर्ष पहले खिरबी गाँव के दो भगत हुए जिनका नाम था रामदाश और रामसहा यह दोनों भगवान जगन्नाथ के परम भगत थे जो की उडिषा  में यह मंदिर पड़ता है यह दोनों गाँव से पेट के बल परिक्रमा देने जगन्नाथ को चल दिए और आज दिखाई दे रहा यह मंदिर यहाँ तक परिक्रमा देते हुए आ गए और यह दोनों बीमार हो गए यह इस जगह पर सो गए और भगवान जगन्नाथ ने इनको सपन में दर्शन दिए और कहा की आप दोनों पेट के बल परिक्रमा देते देते आपकी दोनों की उम्र समाप्त हो जाएगी । लेकिन फिर भी आप वहां तक नहीं पहुँच पाओगे मेरा दर्शन करना है तो इस तालाब के किनारे जो व्रछ  है इसके नीचे एक स्याम वरन की गाय रोजाना अपना दूध डालती है उसके ही नीचे खुदाई करने पर मेरी प्रतिमा निकलेगी और उस प्रतिमा को इसी जगह पर रख देना यह दूसरी जगह पर नहीं जाएगी और आप रोजाना   इसी जगह पर मेरा दर्शन किया करोगे। इन दोनों की आँख खुली और लोगों को अपन सपन सुनाया और ऐसा ही हुआ तभी से इस मंदिर की स्थापना हुई। 

    ऋषि भारद्वाज

    Initiate News Agency (INA), पलवल

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