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    बिसवां/सीतापुर: नहरों की बजाय किसानों की आंखों में है पानी

    डीजल इंजन की मजबूरी से पैसे और पर्यावरण दोनों की बरबादी


    बिसवां/सीतापुर: "पानी गए न ऊबरे" की लोकोक्ति जैसी हालत हो गई है बिसवां क्षेत्र के किसानों की, यहां नहरों में पानी ना आने की वजह से क्षेत्र का किसान हजारों रुपए का सिंचाई के नाम पर डीजल खर्च करने के लिए मजबूर है। एक तरफ कहने को तो प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए सिंचाई मुफ्त कर दी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों की लापरवाही के चलते सरकार की इस कृषि कल्याणकारी योजना का लाभ बिसवां क्षेत्र के किसानों को मिलता नजर नहीं आ रहा है। 

    किसानों की माने तो एक तरफ डीजल पेट्रोल के दाम आसमान को छू रहे हैं और दूसरी तरफ नहरों में पानी नहीं आ रहा है, जिसके चलते किसान आखिर करें भी तो क्या करें। अगर अपनी फसलों को बचाना है तो हजारों रुपए का डीजल खर्च ही करना पड़ेगा, चाहे कर्ज ही क्यों न लेना पड़े। क्षेत्र के शेखनपुरवा और राजाडीह गांव के किसानों का कहना है कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी वह लोग गेहूं की सिंचाई डीजल इंजन से करने के लिए मजबूर हैं। 

    किसान डोरेलाल, सियाराम, अमित, छोटू, राजू, विजय ने बताया कि जब भी किसान को फसल के लिए पानी की जरूरत होती है, तो नहरे सूखी ही मिलती हैं। और इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से बार बार कहे जाने के बाद भी उनके कानों पर जूं नहीं रेंगती।


    शाबान अली

    Initiate News Agency(INA)

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