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    देवबंद: देवबंद का बहुत अहम स्थान है और यहां का विधायक होना भी अपने आप में गर्व की बात होती है

    --गठबंधन प्रत्याशी की घोषणा न होने से समर्थको में बैचेनी

    --सुबह से शाम,शाम से रात हो रहा इंतजार,लेकिन नही हो रही घोषणा

    --ब्रिजेश सिंह को टिकट होने से भाजपा में चल रही गुटबाजी से गठबंधन प्रत्याशी को हो सकता है फायदा


    देवबंद: सुबह होती है शाम होती है और फिर रात हो जाती है रात से फिर सुबह हो जाती है लेकिन सपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी का देवबंद सीट पर ऐलान नही होता और कार्यकर्ता व नेताओं के समर्थक अपना सा मुंह बनाकर रह जाते है।

    बेकरारी का आलम यह है कि अपने अपने प्रत्याशी के टिकट की घोषणा सुबह से लेकर शाम तक सोशल मिडिया पर समर्थक व कार्यकर्ता पोस्ट करते रहते है लेकिन कुछ भी कन्फर्म नही हो पाता कि आखिर गठबंधन का टिकट कि नेता को हो रहा है।जबकि बसपा,भाजपा देवबंद सीट पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुके है। 

    गठबंधन से टिकट पाने की उम्मीद में देवबंद विधानसभा के नेताओं ने लखनऊ में डेरा डाल रखा है और उनके समर्थक यहां दफ्तरों में बैठकर इंतजार कर रहे हैं लेकिन कमबख्त टिकट मिलने की खबर है कि आ नहीं रही इस इंतजार से गठबंधन के कार्यकर्ताओं में अब बैचेनी भी होने लगी है क्योंकि भाजपा ने शनिवार को देवबंद विधानसभा पर अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है भाजपा ने सिटिंग विधायक कुंवर बृजेश सिंह पर ही फिर से दांव खेला है। 

    अब यह दाव कितना कारगर सिद्ध होगा चुनावी दंगल में क्या कुंवर बृजेश सिंह अपने विरोधियों को पटखनी दे पाएंगे यह तो आने वाला  समय बताएगा लेकिन इतना जरूर है कि अच्छे खासे विरोध के बावजूद टिकट झटक लेना बृजेश सिंह की सफलता माना जा सकता है। ऐसा भी माना जा रहा है कि ब्रिजेश सिंह को टिकट होने से भाजपा में चल रही गुटबाजी और ज्यादा नुकसान करा सकती है। जिसका फायदा सपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी को हो सकता है। 

    बसपा ने काफी पहले ही चैधरी राजेंद्र सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया था कांग्रेस का विधानसभा पर कोई वजूद नहीं है इसलिए अब सबसे ज्यादा इंतजार केवल गठबंधन प्रत्याशी के नाम की घोषणा का ही हो रहा है गठबंधन प्रत्याशी के नाम की घोषणा के इंतजार में केवल नेताओं के समर्थक कि नहीं बल्कि विरोधी दल भी बैठे हुए हैं क्योंकि एक बार नाम की घोषणा हो जाए तो विरोधी दलों के नेता भी जातीय समीकरणों का ताना-बाना बुनकर अपनी जीत को पक्की करने की जुगत में लग जाएंगे। 

    पूर्व विधायक माविया अली, भाजपा छोड़कर आए पूर्व विधायक मनोज चैधरी ,पूर्व विधायक शशिबाला पुंडीर, राजेंद्र सिंह राणा के पुत्र कार्तिकेय राणा, उनकी पुत्री प्रियंवदा राणा, पूर्व विधायक ठाकुर वीरेंद्रसिंह ,मुख्य नाम है जिनमें से किसी एक की घोषणा गठबंधन द्वारा की सकती है।

    वैसे तो सहारनपुर जनपद की सातो ही सीटों पर गठबंधन प्रत्याशी की घोषणा अभी नहीं हुई लेकिन देवबंद सीट काफी अहम मानी जाती है। क्योंकि देवबंद केवल एक विधानसभा क्षेत्र की नहीं बल्कि सुन्नी मुसलमानों की विचारधारा दारुल उलूम  देवबंद से ही चलती है इसलिए पूरी दुनिया में देवबंद का बहुत अहम स्थान है और यहां का विधायक होना भी अपने आप में गर्व की बात होती है।


    Initiate News Agency(INA)

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