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    अलीगढ़। बीजेपी के दोस्त हैं जिन्ना, RSS के इशारों पर जिन्ना ने देश को तोड़ा, जिन्ना ने ऐसा न करता तो देश एक होता

    अलीगढ़ में आखिर राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष ने जिन्ना को लेकर बीजेपी पर ऐसा हमला क्यों बोला की जिन्ना को बीजेपी के लोग आज भी अपनी जेबा में संभाल कर चलते हैं। उन्होंने कहा में जिन्ना का आलोचक हूँ, अखिलेश ने जिन्ना का समर्थन नहीं किया हैं जिन्ना काँग्रेस की किताबों की हिस्ट्री है।बल्कि आरएसएस के इशारे पर जिन्ना ने देश को तोड़ा था- डॉ० मसूद अहमद

    अलीगढ़। राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व शिक्षामंत्री डा. मसूद अहमद ने जिन्ना को लेकर बीजेपी पर तंज कसते हुए जमकर हमला बोला गया। रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने जिन्ना को बीजेपी का दोस्त बताते हुए कहा कि बीजेपी के लोग जिन्ना को अपनी जेबा में संभाल कर चलते हैं। क्योंकि इससे पहले भी भारतीय जनता पार्टी और बीजेपी के लोग जिन्ना से मिलकर के सरकार बना चुके हैं और सरकार चला चुके हैं। इसके साथ ही कहा कि उनको लगता हैं कि जिन्ना आरएसएस के लोगों की कठपुतली था। आर एस एस के इशारों पर चलकर जिन्ना ने देश को तोड़ने का काम किया। लेकिन इनका मानना था कि देश टूटना नहीं चाहिए था। अगर जिन्ना ने ऐसा नहीं किया होता तो आज देश एक रहता।

    डॉ० मसूद अहमद (प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय लोकदल)

    उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ की तहसील इगलास विधानसभा क्षेत्र में 23 दिसंबर को मेरठ के बाद अलीगढ़ में अखिलेश और जयंत की चौधरी चरण सिंह की जयंती के मौके पर दोनों के बीच में गठबंधन की महारैली है।जहां आगामी 23 दिसंबर को इगलास में चौ० चरन सिंह जयंती के दिन समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल की होने जा रही संयुक्त जनसभा को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व जयंत चौधरी संबोधित करने आ रहे हैं। उससे दो दिन पूर्व अलीगढ़ पहुँचे राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ० मसूद अहमद ने दोधपुर स्थित वरुणालय में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया। प्रेसवार्ता के दौरान कार्यक्रम की जानकारी दी।इसके साथ कहा रालोद धर्म-मजहब की राजनीति नहीं करता। क्योंकि इस दल के जिन्ना कभी आदर्श नहीं हो सकते। उनके आदर्श तो मिसाइल मैन व पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम व अबुल कलाम आजाद है।इसीलिए उनके लिए जिन्ना नहीं गन्ना जरुरी है

    वहीं, जिन्ना के सवाल पर कहा, मैं जिन्ना का आलोचक हूं। जिन्ना हमारे आइकन नहीं है। हमारे आइकन जो है गांधी, सरदार पटेल , डॉक्टर अंबेडकर , चौधरी चरण सिंह , मिसाइल मैन मौलाना अब्दुल कलाम आजाद हैं और डॉक्टर कलाम है। जबकि जिन्ना भारतीय जनता पार्टी के दोस्त हैं। इसीलिए भारतीय जनता पार्टी के लोग जिन्ना को अपनी जेब में संभाल के लेकर चलते हैं और यही भारतीय जनता पार्टी के संघी लोग जिन्ना से मिलकर के सरकार बना चुके हैं और सरकार चला चुके हैं। मैं समझता हूं कि जिन्ना आरएसएस के लोगों की कठपुतली थे। इनके इशारे पर चल चलके जिन्ना ने देश को तोड़ने का काम किया। उनका मानना है यह देश टूटना नहीं चाहिए था। अगर जिन्ना ने ऐसा नहीं किया होता है तो यह देश एक रहता तो हम स्वस्थ रहते। 

    एएमयू में जिन्ना की तस्वीर पर बोले वह क्या है क्या नहीं है मुझे इससे कोई मतलब नहीं है।बल्कि मैं जिन्ना का आलोचक हूँ। जबकि अखिलेश यादव भी जिन्ना के समर्थक नहीं है। जिन्ना एक हिस्ट्री है, इतिहास है। जब कांग्रेस की हिस्ट्री देखेंगे तो उसमें जिन्ना का नाम हर जगह आएगा। तो अब या तो उस किताब को जला दीजिए या उससे नाम मिटा दीजिए। अखिलेश ने जिन्ना को लेकर वही जिक्र किया है। जो हिस्ट्री की किताबों में जिन्ना के बारे में लिखा हुआ है। हिस्ट्री को ना तो नकारा जा सकता और ना ही मिटाया जा सकता हैं।हालांकि वह नहीं समझते कि अखिलेश ने कहीं जिन्ना की तारीफ की हो।

    अजय कुमार

    Initiate News Agency (INA), अलीगढ़

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