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    शाहजहांपुर। शिव के तत्व ज्ञान से जीवन में श्रेष्ठता आती है: अम्बरीष गुरूजी

    शाहजहांपुर। शिव सत्संग मंडल के केन्द्रीय संयोजक अम्बरीष कुमार सक्सेना ने कहा कि दुनिया को ध्यान की जरूरत है चाहे वह किसी भी देश या धर्म का व्यक्ति हो। ध्यान से ही व्यक्ति की मानसिक संवरचना में बदलाव हो सकता है। ध्यान से ही हिंसा और मूढ़ता का खात्मा हो सकता है।

    शिव सत्संग मण्डल द्वारा विकास खण्ड कांट के राजस्व ग्राम कादर दादपुर, लिलथरा गौटिया में रामौतार सत्संगी की चौपाल पर आयोजित धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अम्बरीष गुरूजी ने कहा कि ध्यान के अभ्यास से जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि ध्यान बहुत शांति प्रदान करता है।भटके हुए मन के लोग जिंदगी भर व्यर्थ की बकवास करते रहते हैं जैसे आपने टीवी चैनलों पर बहस होते देखी होगी। समस्याओं का समाधान बहस में नहीं ध्यान में है।

    ध्यान अनावश्यक विचारों को मन से निकालकर शुद्ध और आवश्यक विचारों को मस्तिष्क में जगह देता है। ध्यान लगाने से आत्मिक शक्ति का विकास होता है।ध्यान तन, मन और आत्मा के बीच लयात्मक सम्बन्ध बनाता है और उसे बल प्रदान करता है। ध्यान का नियमित अभ्यास करने से आत्मिक शक्ति बढ़ती और मानसिक शांति की अनुभूति होती है। ध्यान का अभ्यास करते समय शुरू में आधे से एक घंटा तक ध्यान लगा सकते हैं।

    श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा शिव के तत्त्व ज्ञान से जीवन में श्रेष्ठता आती है।तथा बुराइयों का विनाश होता है।शिवोपासना एवं शिव के ध्यान और भजन से ही मूल्यनिष्ठ समाज की स्थापना हो सकती है तथा परिवारों में सुख शांति स्थापित हो सकती है।

    उन्होंने कहा कि आज परमात्मा को पाने लिए सभी प्रयास कर रहे हैं।परंतु सत्य की राह न होने से भ्रामक स्थिति बनी हुई है।इस दौर में आत्मचिंतन से ही श्रेष्ठ मूल्यों को जीवन में उतारने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।शिव सत्संग मण्डल द्वारा दिये जा रहे आध्यात्मिक ज्ञान से समाज में बदलाव संभव है।यहाँ के आध्यात्मिक ज्ञान और ध्यान की विधि ही परमात्मा को प्राप्त करने का सहज मार्ग है।

    उनका कहना था कि आज समाज में विभिन्न मतमतान्तरों के कारण भ्रमपूर्ण स्थिति बनी हुई है।ऐसे में शिव सत्संग मंडल द्वारा बताई जा रही राह ही, सत्य की राह है। अध्यात्मवेत्ता ने बताया कि वह परमेश्वर कोटि सूर्यम् प्रभा वाला ,अशरीरी,अजन्मा,अखंड,सर्वज्ञ,सर्वव्यापी,सर्वशक्तिमान और निराकार तथा दिव्य प्रकाश वाला, जन्म मृत्यु से परे है।जिसे सत्संग से ही समझा जा सकता है। कहा कि विश्व के सभी लोगों को सत्पथ अपनाने का प्रयास करना चाहिए।प्रभु को ह्रदय से प्यार करने वाला ही सभी बंधनों से मुक्त हो सकता है।

    उन्होंने कहा कि परमात्मा के ज्ञान के लिए त्रिनेत्र की जरूरत होती है।जो कि भृकुटि के मध्य विद्यमान है।आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाना ही ,परमात्म प्राप्ति का एकमात्र साधन है।और आज के जीवन में व्यवहारिक है। परमात्मा प्रकाशस्वरूप है।परमात्म ज्ञान से सकारात्मक क्षमता विकसित होती कहा कि परमात्मा से सम्बन्ध जोड़ते ही जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन आता है।सद्गुण बढ़ने लगते हैं।दुर्गुण छूटने लगते हैं।उन्होंने बताया कि मानव शरीर बहुत ही सौभाग्य से मिलता है।इसलिए प्रभु का भजन करें और ईश्वरीय स्म्रति में रहते हुए अपने कर्तव्य का पालन करें।

    धर्म सभा का शुभारंभ अवनीश ने दीप प्रज्वलित कर एवं कमलेश ने सामूहिक ईश प्रार्थना से किया।इस अवसर पर धर्म प्रचारक प्रेम भाई,व्यवस्थापक यमुना प्रसाद, रामौतार, हंसराम मनिकापुर, ओमकार, प्रेम कुमार, मुन्नालाल, राजेंद्र सिंह यादव, तोताराम, राज कुमार, श्रीपाल, रामनिवास भारीगावां, अभिमन्यु, बाल गोविंद, रक्षपाल, अवनीश, कमलेश, धीरज ,सरोज, अंकित, राम रूप, आदेश, ओमकार, पूजा, आरती, सुहाती, प्रियंका, उपासना, दुर्गा समेत अनेक सत्संगी बंधुओं एवं बहिनों ने समापन पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शिवोपासना करने एवं प्रकाश स्वरूप से परमेश्वर का ध्यान लगाने का शिव संकल्प लिया।आयोजक रामौतार सत्संगी ने उपस्थित सभी भक्तजनों का आभार व्यक्त किया।


    फ़ैयाज़ उद्दीन

    Initiate News Agency(INA) शाहजहाँपुर

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