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    लहरपुर/सीतापुर। राम कथा का शुभारंभ आज पूज्य कथा वाचक प्रेमभूषण

    लहरपुर/सीतापुर। प्रेमभूषण जी महाराज ने बिंदु जी के भजन से किया ना जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं भगवान राम की महिमा का वर्णन करते हुए पूज्य कथावाचक ने कहा अजामिल मैं अपने पुत्र का नाम नारायण रखा था अंतिम समय में नारायण कहता हुआ मोक्ष को प्राप्त हो गया गणिका वेश्या  राम के नाम के प्रभाव में मुक्त हो गई शबरी राम की प्रतीक्षा करती रही फिर भगवान राम ने घर पहुंच कर झूठे बेर खाए रामचरित्र पहुंच पावन है और सुख शांति देने वाला है। 

    बचपन के बाद यज्ञोपवीत संस्कार करने के उपरांत गुरुकुल अध्ययन हेतु गए सभी भाइयों के साथ भगवान राम ने वेद पुराण मन लगाकर सुने यद्यपि भगवान सब जानते थे प्रातः काल उठकर माता पिता और गुरु को प्रणाम करके दिनचर्या व्यतीत करने वाले मर्यादा पुरुष भगवान राम के चरित्र और चिंतन की समाज को बहुत आवश्यकता है यज्ञोपवीत धारण करके ही वेद का अध्ययन करना चाहिए सभी वेद का मंत्र मिल सकता है पौराणिक मंत्र विना यज्ञोपवीत के कोई भी व्यक्ति ले सकता है रामकथा पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली परंपरा का नाम है वंश व्यवस्था में समाहित है राम कथा कथा जीवन दर्शन है जब यज्ञ की रक्षा के लिए विश्वामित्र भगवान को मांगते हैं ले जाते हैं तो सिद्ध आश्रम के निकट ताड़का ने विश्वामित्र के साथ दोनों भाइयों को देखा आगे आ गई युद्ध करने लगी एक ही बार में अपने धाम को पहुंचाने वाले भगवान राम से सुबाहु और मरीज का युद्ध हुआ जिस को मार कर के राम यज्ञ स्थल पर पहुंचे विश्वामित्र जी ने उन्हें बला अतिबला जैसी शक्तियां दी गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण भगवान राम लक्ष्मण की विशेषता थी राम कथा परम गति उपलब्धि मानी जाती है इसीलिए भगवान राम का चिंतन मनन हर घर परिवार में होना चाहिए व्यक्ति में होना चाहिए आज भारी भीड़ थी तथा भक्त गणों का आना-जाना रहा। 

    शाबान अली

    Initiate News Agency (INA), तंबौर सीतापुर

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