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    अलीगढ़। एएमयू में पीएम की तारीफ करना शोधार्थी का गुनाह, शोधार्थी को डिग्री देने के बाद चेयरमैन कर रहा प्रताड़ित,आरोप तानाशाह चेयरमैन ने विभाग में लगा रखी हैं 370

    अलीगढ़। मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च स्कॉलर छात्र को एक देश के पीएम की तारीफ में दिए गए इंटरव्यू के 1 साल बाद पीएम की तारीफ करना महंगा पड़ गया है। एएमयू को लेकर रिसर्च स्कॉलर का कहना है कि कश्मीर के अंदर 1952 से लेकर 2019 तक 370 लगी हुई थी। लेकिन कश्मीर में लगी इस 370 को गृहमंत्री और प्रधानमंत्री के द्वारा कश्मीर से तो हटा दिया गया। लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट के चेयरमैन जहांगीर वारसी के द्वारा एएमयू के डिपार्टमेंट में ही 370 लगाकर बैठें हुए हैं। जहां विभाग के अंदर लगी 370 को कौन हटाएगा। विभाग द्वारा दी गई डिग्री को लेकर रिसर्च स्कॉलर छात्र का आरोप है कि डिपार्टमेंट के चेयरमैन जहांगीर वारसी कह रहे हैं कि अनजाने में उसके पास गलत विषय भाषा विज्ञान की डिग्री चली गई। जिसके बदले सही विषय पीएचडी इन एलएएमएम (लैंग्वेज ऑफ एडवरटाइजिंग मीडिया इन मार्केटिंग) की डिग्री दी जाएगी। 

    अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने एक पीएचडी स्कॉलर को गलती से दूसरे विषय में पीएचडी की डिग्री दे दी।जहां एएमयू के द्वारा शोधार्थी को पांच साल गुजरने के बाद पीएचडी स्कॉलर को बताया गया कि उसको भाषा विज्ञान में जो डिग्री दी गई है। इस भाषा विज्ञान की डिग्री की जगह उसको पीएचडी इन एलएएमएम (लैंग्वेज ऑफ एडवरटाइजिंग मीडिया इन मार्केटिंग) की डिग्री देनी थी। लेकिन एएमयू की तरफ से उसे गलती से भाषा विज्ञान में पीएचडी की डिग्री दी गई है। लेकिन डिग्री को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के फैसले से नाराज पीएचडी स्कॉलर डॉक्टर दानिश ने अब उच्च न्यायालय की शरण ली गई हैं। जिसमें 7 दिसंबर को सुनवाई होनी है।

    डॉक्टर दानिश शोधार्थी एएमयू

    एएमयू रिसर्च स्कॉलर डॉ. दानिश का कहना है कि 27 अक्तूबर 2016 को उन्होंने भाषा विज्ञान विभाग में शोधार्थी के रूप में दाखिला लिया था। पीएचडी अवार्ड 9 मार्च 2021 को हुई। उन्होंने कहा कि उनकी सुपरवाइजर डॉ सादिया हुसैन हसन थी और पीएचडी का विषय ‘न्यूज टॉक इन्वेस्टिंग द लैंग्वेज ऑफ हिंदी-उर्दू न्यूज मीडिया’ था। डॉ. दानिश के अनुसार पांच साल बाद यूनिवर्सिटी के को-ऑर्डिनेटर मुजीब उल्ला जुबैरी की तरफ से 4 अगस्त 2021 को मुझे व डॉ मारिया नईम को नोटिस जारी करके बताया गया कि अनजाने में भाषा विज्ञान में पीएचडी की डिग्री दी गई है, जबकि एलएएमएम में पीएचडी की डिग्री दी जानी चाहिए थी। इसलिए अब भाषा विज्ञान की पीएचडी की डिग्री की जगह उनको एलएएमएम में डिग्री दी जाएगी। पूर्व में दी गई पीएचडी डिग्री कंट्रोलर ऑफिस में जमा कर दें। डॉ दानिश का आरोप है कि उसको अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के द्वारा उसकी डिग्री को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा है। उसका आरोप है कि उसके द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ लिंग्विस्टिक में 11 साल गुजारने के बाद उसके द्वारा बीए, एमए, और पीएचडी भी इसी डिपार्टमेंट में रहकर की गई। जिसके बाद एएमयू रिसर्च स्कॉलर छात्र दानिश को 9 मार्च 2021 में पीएचडी भाषा विज्ञान में डिग्री दी गई है। तो वहीं उससे पहले उसकी सीनियर डॉ मारिया को नवंबर 2020 में डिग्री मिली थी।लेकिन कोरोना काल के बाद जब दोबारा से एएमयू में पढ़ाई का सेशन शुरू हुआ तो उसके बाद लिंग्विस्टिक डिपार्टमेंट के चेयरमैन द्वारा उसको बुलाया गया और कहा गया कि एएमयू की तरफ से अनजाने में उसके पास गलत विषय भाषा विज्ञान की डिग्री चली गई जिसके बदले सही विषय पीएचडी इन एलएएमएम (लैंग्वेज ऑफ एडवरटाइजिंग मीडिया इन मार्केटिंग) की डिग्री दी जाएगी।पूर्व में गलत दी गई भाषा विज्ञान पीएचडी की डिग्री को कंट्रोलर ऑफिस में वापस जमा करा दे। डिग्री लेने के 6 महीने बाद जब उसके द्वारा डिपार्टमेंट के चेयरमैन को रिवाइंड किया गया तो उसको डिग्री देने के नाम पर विभाग के चेयरमैन की तरफ से प्रताड़ित किया जाने लगा। 

    छात्र का आरोप है कि देश के प्रधानमंत्री द्वारा 22 दिसंबर 2020 में एएमयू को संबोधित किया गया था। पीएम के संबोधन को लेकर उसके द्वारा प्रधानमंत्री सहित एएमयू के वाइस चांसलर तारिक मंसूर की तारीफ एक निजी चैनल के इंटरव्यू के दौरान की गई थी। जिस  इंटरव्यू को उसके चेयरमैन द्वारा देखा गया था। लेकिन इंटरव्यू देखने के बाद उसके वायवा से पहले चेयरमैन के द्वारा उससे कहा गया कि उसके द्वारा जो चैनल में इंटरव्यू दिया गया है और उस इंटरव्यू में पीएम की तारीफ की गई। चेयरमैन ने उसको भाजपा की तारीफ करने के चलते राइट विंग का सदस्य बताया। जिसके बाद डिपार्टमेंट के चेयरमैन जहांगीर वारसी के द्वारा उस को चेतावनी दी गई कि इस इंटरव्यू के बाद उसको भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

    लेकिन अब 1 साल बाद नुकसान का एहसास हुआ।जब 4 अगस्त को 2021 को विभाग के चेयरमैन जहांगीर वारसी के द्वारा वाइस चांसलर और कंट्रोलर को झूठ बोलते हुए यूनिवर्सिटी के को-ऑर्डिनेटर मुजीब उल्ला जुबैरी की तरफ से डॉ मारिया नईम व उसके खिलाफ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में भाषा विज्ञान में पीएचडी की डिग्री दी गई है। जबकि एलएएमएम में पीएचडी की डिग्री दी जानी चाहिए थी। इसलिए अब भाषा विज्ञान की पीएचडी की डिग्री की जगह उनको एलएएमएम में डिग्री दी जाएगी। छात्र का आरोप है कि एलएएमएम पीएचडी किसी भी स्तर पर एलएएम एम कोई भी अप्रूवल यूजीसी स्तर पर भी नहीं है। जबकि उसको एएमयू डीन के द्वारा 26 अक्टूबर को 2016 को पत्र जारी कर लिंग्विस्टिक में एडमिशन लेने के लिए खुद कहा गया था। लिंग्विस्टिक के लिए हिंदुस्तान के पहचाने जाने वाले प्रदीप कुमार दास उसके लिंग्विस्टिक के एग्जामिनर रहे थे।

    अजय कुमार

    Initiate News Agency (INA), अलीगढ़

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