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    नई दिल्ली: देश के सभी जिलों में पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र

    नई दिल्ली: कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता का अनुभव सबसे अधिक किया गया। भविष्य में ऐसी चुनौतियों से निपटने और विशेष रूप से कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान ऑक्सीजन की माँग को पूरा करने के लिए, देश भर में प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन (PSA) ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन (PSA) ऑक्सीजन संयंत्र मेडिकल-ग्रेड ऑक्सीजन का एक प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश, उत्तराखंड में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीएम केयर्स के तहत स्थापित किए गए 35 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके साथ ही, अब देश के सभी जिलों में पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र शुरू हो जाएंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा बुधवार को जारी वक्तव्य में यह जानकारी दी गई है। 


    पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन, 0.9 प्रतिशत आर्गन और 0.1 प्रतिशत अन्य गैसें हैं। इन गैसों से ऑक्सीजन को अलग करने के लिए पीएसए ऑक्सीजन प्लांट अस्तित्व में आया। कुछ विशिष्ट विधियाँ हैं, जिनके द्वारा ऑक्सीजन और नाइट्रोजन का उत्पादन किया जाता है। इन विधियों में पीएसए और वीपीएसए (वैक्यूम प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन) शामिल हैं।

    पीएमओ के वक्तव्य में कहा गया है कि अब तक, पूरे देश में कुल 1224 पीएसए ऑक्सीजन संयंत्रों को पीएम केयर्स के तहत वित्त-पोषित किया गया है, जिनमें से 1100 से अधिक संयंत्रों को चालू किया गया है, जिससे प्रति दिन 1750 मीट्रिक टन से अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन होता है। कोविड-19 महामारी के आगमन के बाद भारत की मेडिकल-ग्रेड ऑक्सीजन की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में इसे सरकार की एक प्रभावी पहल बताया जा रहा है।

    पहाड़ी क्षेत्रों, द्वीपों और विषम परिस्थितियों वाले भूभागों की जटिल चुनौतियों का सामना करते हुए देश के प्रत्येक जिले में पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र चालू करने की परियोजना को अंजाम दिया जा रहा है। 

    इन संयंत्रों का संचालन और रखरखाव 7,000 से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षण देकर सुनिश्चित किया गया है। वे एक समेकित वेब पोर्टल के माध्यम से अपने कामकाज और प्रदर्शन की वास्तविक समय में निगरानी के लिए एक एम्बेडेड इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस से जुड़े होंगे। 

    Initiate News Agency (INA), नई दिल्ली


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