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    लखीमपुर-खीरी: खुले रुपये न होने का बहाना बना महिला यात्रियों को किया जा रहा परेशान\ मंडल रेल प्रबंधक को प्रार्थना पत्र देकर कार्यवाही की की गई मांग

    लखीमपुर-खीरी: मुख्य बाजार से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित बाँकेगंज रेलवे स्टेशन पर रेल यात्रा के लिए पहुँची अधिकांश महिलाओं को खुले रुपये न होने की बात कहकर नहीं दिया जाता टिकट और कौन चेक करेगा कहकर बिना टिकट यात्रा करने की दी जाती है सलाह। टी टी द्वारा पकड़े जाने पर जुर्माने के साथ महिलाओं को होना पड़ता है अपमानित। 

    मंडल रेल प्रबंधक को प्रार्थना पत्र देकर उचित कार्यवाही की मांग की गयी। दिये गए प्रार्थना पत्र के अनुसार 19 अक्टूबर को 20 वर्षीय बालिका गुलफ़शा अपने छोटे भाई बहनों के साथ खीरी जाने के लिए 3:00 बजे बाँकेगंज स्टेशन पहुंची। 

    सौ रुपये का नोट देकर टिकट मांगने पर पर 10  रुपये खुले न होने की बात कह कर बुकिंग क्लर्क ने टिकट देने से मना कर दिया। बारिश के बीच बालिका स्टेशन पर ही खड़ी रही। इस बीच बुकिंग क्लर्क टिकट बांटता रहा। लगभग 20 मिनट बाद पुनः टिकट खरीदने के लिए खिड़की पर पहुंची। खुले रुपए न होने की बात कहकर उसे पुनः टिकट नहीं दिया गया। 

    साथ ही बुकिंग क्लर्क द्वारा यह भी कहा गया कि यदि  जाना जरूरी हो तो बिना टिकट लिए ही बैठ जाओ। जब बालिका ने कहा कि यदि कोई चेक करने वाला मिल गया तो उसे मैं आपके बारे में ही बताऊँगी। उसने कहां की बता देना टूटे रुपये न होने के कारण टिकट नहीं मिल पाया वैसे भी रास्ते में कोई चेक नहीं करेगा। बालिका भी अपने भाई बहनों के साथ ट्रेन में चढ़ गई। 

    फरधान पहुंचने पर जब टिकट चेक करने के लिए टी टी आया तब बालिका ने उसे पूरी बात बतायी। टी टी द्वारा  बालिका को 325 रुपये की रसीद काटकर पकड़ा दी गई। अन्य रेलयात्री द्वारा हेय दृष्टि से देखे जाने के कारण उसने खुद को अपमानित होने से बचाने के लिए अपने पास रखे कुल तीन सौ रुपये पकड़ा दिया। 

    बालिका के मुताबिक बांकेगंज से ही सवार एक अन्य महिला को भी खुले रुपये की बात कहकर टिकट नहीं दिया गया था। उसे 100 रुपये की रसीद देकर जुर्माना वसूला गया था। टी टी के जाने के बाद रेलयात्री उसे समझाने लगे। खुद को  अपमानित होता देख तीनों लखीमपुर उतर गये और वहाँ से खीरी तक भीगते हुए पैदल गये। 

    अगले दिन लौटकर उन्होंने अपने पिता को पूरी बात बतायी और मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराते हुए महिलाओं को हो रही असुविधा पर ध्यान देने की माँग की। इस तरह के खेल की असली वजह अतिरिक्त धन कमाने का लोभ है। 

    स्टेशन बाजार से एक किलोमीटर दूर होने के कारण कोई भी यात्री विशेषकर महिलाएं खुले रुपए लेने के लिए बाजार जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकेंगी। इस अवस्था में या तो वे अतिरिक्त रुपए बुकिंग क्लर्क के लिए छोड़ जाएंगी अथवा बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़े जाने पर परेशान की जाएंगी अन्यथा 20 मिनट तक टिकट बांटने के बावजूद भी क्या 10 रुपये वापस करने के लिए बुकिंग क्लर्क के पास नहीं आये होंगे? यह एक बड़ा सवाल है।


    Initiate News Agency(INA), लखीमपुर-खीरी

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