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    जुकरबर्ग ने बदला 'फेसबुक' का नाम, अब 'मेटा' के नाम से जाना जाएगा

    जुकरबर्ग ने बदला 'फेसबुक' का नाम, अब 'मेटा' के नाम से जाना जाएगा

    वाशिंगटन : गुरुवार को एक आधिकारिक घोषणा के दौरान फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने 'फेसबुक' का नाम बदलकर 'मेटा' रखने का ऐलान कर दिया है। अभी तक काफी कशमकश चल रही थी कि फेसबुक का नाम आखिर क्या रखा जाएगा। इन सभी खबरों पर उस समय विराम लग गया, जब संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने इसका नाम बदल देने की घोषणा कर दी। बता दें कि 2004 में फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि फेसबुक का भविष्य एक मेटावर्स कांसेप्ट में है, यह एक वर्चुअल-रियलिटी स्पेस का हिस्सा है। जिसमें एक डिजिटल दुनिया के वातावरण में एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से कनेक्ट हो पाएगा। इस वर्ष जुलाई में भी जुकरबर्ग ने सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक को एक मेटावर्स कम्पनी के रूप में देखे जाने की बात कही थी। हालांकि फेसबुक के इस ऐलान से ओरिजिनल ऐप और सर्विस ज्यों की त्यों ही चलती रहेगी और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा. ये कंपनी की री-ब्रांडिंग है और कंपनी के बाकी प्रॉडक्ट्स जैसे कि वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम को कंपनी के नए बैनर तले लाये जाने की योजना है. अभी तक कहा वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम को फेसबुक के प्रॉड्क्ट्स कहा जाता है, लेकिन फेसबुक खुद एक प्रॉडक्ट है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जकरबर्ग ने गुरुवार को कंपनी के वार्षिक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की. जुकरबर्ग ने गुरुवार को फेसबुक के वार्षिक सम्मेलन में इसकी घोषणा की, जहां उन्होंने मेटावर्स के लिए अपने विजन के बारे में भी बताया. जुकरबर्ग ने कहा हमारे ऊपर एक डिजिटल दुनिया बनी है, जिसमें वर्चुअल रिएलिटी हेडसेट और एआई शामिल है. हम मानते हैं कि मेटावर्स मोबाइल इंटरनेट की जगह ले लेगा। नई होल्डिंग कंपनी मेटा फेसबुक, इसकी सबसे बड़ी सहायक कंपनी, साथ ही इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और वर्चुअल रियलिटी ब्रांड ओकुलस जैसे ऐप को शामिल करेगी. फेसबुक ने मेटावर्स प्रोजेक्ट में 2021 में 10 बिलियन डॉलर का निवेश किया था. हाल ही में जारी की गई अर्निंग रिपोर्ट में, कंपनी ने घोषणा की थी कि उसका वर्चुअल रियलिटी सेगमेंट इतना बड़ा हो गया है कि अब वह अपने उत्पादों को दो श्रेणियों में विभाजित कर सकता है.

    नाम बदलने के साथ ही कंपनी में रोजगार के भी अवसर बढ़ने वाले हैं. कंपनी ने घोषणा की थी कि मेटावर्स के लिए उसे हजारों लोगों की जरूरत है. फिलहाल कंपनी 10 हजार लोगों को रोजगार देने की तैयारी में है। उन श्रेणियों में फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और व्हाट्सएप सहित “फैमिली ऑफ एप्स” और एआर और वीआर के साथ-साथ किसी भी संबंधित हार्डवेयर सहित “रियलिटी लैब” उत्पाद शामिल हैं।

    फेसबुक ने यह नाम तब बदला है, जब कंपनी पर कई देशों में ऑनलाइन सुरक्षा, भड़काऊ कंटेंट को नहीं रोकने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. भारत सरकार ने भी फेसबुक को पत्र लिखकर सोशल मीडिया कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एल्गोरिदम और प्रक्रियाओं का विवरण मांगा है। फेसबुक “मेटावर्स” बनाने पर फोकस कर रहा है, जो मूल रूप से एक ऑनलाइन दुनिया है जहां लोग वर्चुअल एनवायरमेंट में ट्रांसफर करने और कम्यूनिकेशन करने के लिए अलग-अलग टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे पूरा करने के लिए कंपनी ने वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी में भारी इंवेस्ट किया है।

    बता दें कि दुनिया भर में फेसबुक का इस्तेमाल 3 अरब से ज्यादा लोग करते हैं. वहीं भारत में फेसबुक का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 41 करोड़ है। फेसबुक और अन्य बड़ी कंपनियों के लिए ‘मेटावर्स’ की परिकल्पना उत्साहजनक है क्योंकि इससे नए बाजारों, नए प्रकार के सोशल नेटवर्कों, नए उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और नए पेटेंट के लिए अवसर पैदा होते हैं।

    INITIATE NEWS AGENCY(INA)

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