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    सीतापुर: ग़रीबों की मदद, बेसहारा और अनाथ के साथ हमदर्दी, नमाज़ की पाबन्दी, अपने पड़ोसियों और अपने देश से सच्ची मोहब्बत करने वाला ही मोमिन और सच्चा इंसान हो सकता है:-फुरक़ान हाशमी

    सीतापुर: दरगाह हाफ़िज़िया असलमिया खैराबाद में इस्लामी माह रबीउल अव्वल का चांद निकलने के बाद से बाद नमाज़ मग़रिब महफिले मीलाद का आयोजन किया जा रहा है  उसी क्रम में इस्लामी माह की 10 तारीख  यानी 18अक्टूबर को मीलाद की महफ़िल को सम्बोधित करते हुए दरगाह के सज्जादानशीन हाजी सैय्यद फुरक़ान वहीद हाशमी ने कहा कि ये माह सभी बारह महीनों में सबसे अच्छा है क्योंकि इसी महीने में हमेंऔर आपको रास्ता दिखाने वाले अल्लाह की पहचान कराने वाले इस्लाम धर्म के प्रवर्तक आक़ा व मदनी जिनके सदके में पूरी दुनिया बनाई गई अर्थात हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्म हुआ.  

    आपके द्वारा ही हमने अल्लाह को जाना व पहचाना आपके ही द्वारा क़ुरआन मिला, रोज़ा, नमाज़,हज,ज़कात यानी हर एक चीज़ आपके द्वारा मिली तो अपने आप समझ मे आने वाली बात है कि जिस माह में आपका जन्म हुआ तो वो महीना सबसे बेहतर तो होगा ही। 

    इसी क्रम में क़ारी इस्लाम अहमद आरफी के द्वारा अपने निवास पर आयोजित मीलाद की सभा मे हाशमी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि हम मीलाद तो करवाते हैं जुलूस भी उठाते हैं मगर सोचने की बात ये है कि हम जिसके नाम से मीलाद करते जुलूस उठाते हैं तो उसकी बताई हुई बात कितनी मानते हैं उनको खुश करने के लिए हम क्या करते हैं नमाज़ हम पढ़ते नही रोज़ा रखते नही झूठ बोलने और ग़लत काम व ग़लत बात करने से हम पीछे नही रहते तो क्या फायदा ऐसे मीलाद कराने से और जुलूस उठाने से अगर हम सच्चे दिल से नबी करीम सल. को मानते हैं सच्चे आशिके रसूल का दावा करते हैं तो आपके बताए रास्ते पर चलना होगा आपकी एक एक सुन्नत पर अमल करना होगा वरना हम आज दुनिया वालों को तो धोखा दे सकते हैं मगर अल्लाह और उसके रसूल को बिल्कुल धोखा नही दे सकते क्योंकि वो दिलों का हाल जानने वाला है।

    हाशमी ने  कहा कि महफिले मीलाद करना रब्बुल आलमीन की सुन्नत भी है और इसका आयोजन मलायका ने भी किया वही सुन्नत आज तक क़ायम है मगर मीलाद के साथ साथ हमे चाहिए कि हम अपने आचरण को भी सुधारें अपने क्रिया कलाप को सही रखें ताकि लोग देखकर कुछ सीख सकें और उन्हें सच्चाई के रास्ते पर चलने में कोई दुश्वारी भी न हो साथ ही हमे अपने माँ बाप से,अपने मुल्क से और अपने पड़ोसियों से हमदर्दी रखना चाहिये माँ बाप का पूरा आदर सम्मान  करें उनकी ज़रूरतों  को पूरा करें बल्कि हमे पूरी कोशिश करना चाहिए कि हमारा हर कार्य ऐसा हो जिससे किसी को भी कोई तकलीफ न हो तभी हम सच्चे आशिके रसूल कहलाने के हकदार होंगे अन्यथा सिर्फ दिखावा ही होगा और दिखावा अल्लाह और उसके रसूल को बिल्कुल पसन्द नही है ऐसा करने वाला पूर्णतया नुक़सान में ही रहेगा।इसलिये हमे चाहिए कि अल्लाह और उसके रसूल के दामन को मजबूती से पकड़ें ग़रीबों की मदद करें, बेसहारा लोगों को सहयोग दें परेशान लोगों की पूरी मदद करें तभी हम कामियाब होंगे।

    इस अवसर पर सैय्यद फ़रमान मियां चिश्ती, सैय्यद फरजान मियां, सैय्यद सलमी मियां, सैय्यद फरहान मियां, हाफ़िज़ आकिब, हाफ़िज़ आरिफ, हाफिज़ नदीम, जग्गी भाई, चंदा, सलीम खान, शाहिद अली मोल्हे, तथा फ़रमान मियां ने सलाम पढ़ा जबकि क़ारी इस्लाम अहमद आरफ़ी, इमरान सिद्दीकी, एहतिशाम अहमद, सलीम खान, अक़ील खान, दानियाल आरफी, पप्पू, गुड्डू, इस्लाम अहमद, अनीस अहमद, जलीस अहमद, रशीद अहमद, शकील अहमद, पुत्तू, के अलावा काफी संख्या में लोगों ने शिरकत की।


    शरद कपूर 

    Initiate News Agency(INA), सीतापुर

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