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    कानपुर : जिन्होंने देश की आजादी में दिया अहम् योगदान,,झण्डा गीत के रचयिता पार्षद जी का परिवार बेहाल

    कानपुर : आजादी के मतवालों ने देश की आजादी में अपना अहम् योगदान दिया,,,देश आजाद हुआ और वो मतवाले इस दुनिया को अलविदा कह गए | लेकिन जिन्होंने देश को आजादी दिलाने में योगदान दिया अब उन्ही के परिवार की अनदेखी हो रही है, हम बात कर रहे है श्याम लाल गुप्त यानी पार्षद जी की जिन्होंने अपने अंदर आज़ादी के लिए उठ रही चिंगारी को ज्वालामुखी का रूप दिया | 

    जनरलगंज की तंग गलियों में पार्षद जी का मकान है,जिसका अधिक हिस्सा जर्जर है | पहली मंजिल पर जाने के लिए बहुत ही सकरे से जीने से जाना पड़ता है, जब उनके परिवार से इस सम्बन्ध में बात की गयी तो उनका दर्ज छलक उठा आपको बताते चले की 13 अप्रैल 1925 में कानपुर में होने वाले अधिवेशन में तिरंगे की शान में एक गीत गाया जाना था | गीत लिखने के लिए पार्षद जी के अलावा कई अन्य लोगों से भी कहा गया, लेकिन सिर्फ़ पार्षद जी ने मात्र तीन रातों में जागकर तिरंगे की शान में दो गीत लिखकर तैयार कर दिए | चूँकि गांधी जी चाहते थे कि झंडा गीत लोक भाषा व संगीत में हो, इसलिए उन्होंने "झंडा ऊँचा रहे हमारा, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा" को पूरे शान के साथ कानपुर अधिवेशन गाया | वास्तव में हमारा असल राष्ट्रगान यही है,,,इसे ही पहली बार तिरंगे की आन बान शान के लिए गाया गया था | आज़ादी के दीवाने 13 साल के लड़के के अंदर अंग्रेज़ी हुकूमत के ख़िलाफ़ आक्रोश इस कदर पनप रहा था कि उसने नरवल में सरे बाज़ार युद्ध के लिए लिया जाने वाले कर का विरोध किया, यह वह दौर था जब लोग अंग्रेज़ी हुकूमत के ख़िलाफ़ मुँह खोलने तक से डरते थे, इस दौरान प्रथम विश्व युद्ध अपने चरम पर था और युद्ध के लिए साजों सामान की आपूर्ति के लिए लोगों से जबरन टैक्स वसूला जाता था, अंग्रेज़ी हुकूमत का विरोध करने पर पार्षद जी को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें कई यातनाएं दी गई, लेकिन सज़ा काटने के बाद जब वह वापस आए तो कहानीकार भगवती प्रसाद ने उनकी मुलाक़ात प्रताप अख़बार के संपादक प. गणेश शंकर विद्यार्थी से कराई,,,जिसका उनके जीवन पर काफ़ी गहरा असर पड़ा |

    संजय गुप्ता पार्षद जी के पौत्र ,सुशीला गुप्ता पार्षद जी की पौत्र वधू
    भारत सरकार की तरफ से पार्षद जी को पदमश्री पुरूस्कार से नवाजने के साथ ही तामपत्र दिया गया, लेकिन पार्षद जी के देहांत के बाद सरकारों ने उनके परिवार की तरफ से मुँह मोड़ लिया,अब पार्षद जी का परिवार जनरलगंज की तंग गली में बने एक जर्जर मकान में रहने को बेबस है | परिवार का कहना है की कई बार नेताओ और अधिकारियो को इससे अवगत कराया जा चुका है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं |

    इब्ने हसन ज़ैदी

    Initiate News Agency (INA) , कानपुर


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