Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    शाहजहांपुर। "महाभारत साइकोलॉजी" में महाभारत से जुड़ी हुई भ्रान्तियों को दूर करने का प्रयास किया गया है : जसमीत साहनी

    शाहजहांपुर। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा दून इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्टर जसमीत साहनी की पुस्तक महाभारत साइकोलॉजी का विमोचन किया गया। स्कूल के डायरेक्टर जसमीत साहनी ने अपनी पुस्तक के विषय में बताया कि मुझे बचपन से सनातन संस्कृति और उसके इतिहास में, विशेष रूप से महाभारत में बहुत दिलचस्पी थी। 

    इसलिए मैंने सत्य जानकारी के लिए टीवी सीरियल का सहारा ना लेकर, महाभारत ग्रन्थ के संस्कृत शलोकों और उनके अनुवादों को पढ़ना शुरू किया। जिसमें मुझे कई नई जानकारियां मिलीं। महाभारत के स्वर्णिम इतिहास पर मेरे द्वारा लिखी गई पुस्तक " महाभारत साइकोलॉजी " को तीन भागों में बाँटा गया है। एक भाग में मैंने महाभारत से जुड़ी हुई भ्रान्तियों को दूर करने का प्रयास किया है। 

    हमारे समाज में महाभारत से जुडी कई ऐसी कहानियाँ प्रचलित हैं जो असल में महाभारत में दर्ज ही नहीं हैं। लोगों ने महाभारत को टीवी सीरियल या फिल्मों के माध्यम से ही देखा और समझा है, किन्तु सीरियल या फिल्मों को बनाते समय इतिहास पर ज्यादा शोध नहीं किया जाता, और इसमें कुछ ऐसी घटनाओं को भी दिखा दिया जाता है जो महाभारत ग्रंथ में दर्ज ही नही है। 

    इस किताब को लिखते समय वेद व्यास जी द्वारा रचित संस्कृत श्लोकों का गहनता से अध्ययन किया गया है ताकि पाठकों तक सत्य जानकारी पहुंच सके। दूसरे भाग में मैनें महाभारत की फिलॉसफी का जिक्र किया है और साथ ही साथ इस किताब में इसके पात्रों और भगवान श्री कृष्ण की महान साइकोलॉजी को भी समझाया गया है, जिसे पढ़ने के बाद आपको महाभारत के गुप्त रहस्य समझ में आयेंगे, और महाभारत से जुड़े कई अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर भी मिलेंगे। तीसरे भाग में मैनें उन घटनाओं का जिक्र किया है, जिसमें आपको जीवन से जुड़ी कई प्रकार की शिक्षाएं मिलेगी। महाभारत का इतिहास अपने आप में दुनिया का सबसे विद्वान शिक्षक है, जो जीवन से जुड़े कई अनुभव व ज्ञान हमें सिखाता है। 

    यह किताब युवाओं में सनातन संस्कृति के प्रति गर्व का भाव भी उत्पन्न करती है। महाभारत जैसे विशाल ज्ञान के भण्डार में समाहित शिक्षाओं, साइकोलॉजी और फिलॉसफी को एक किताब में समेटना सम्भव नहीं है। इसलिए यदि मेरी इस मेहनत को आप लोगों का प्यार और आशीर्वाद मिला, तो निःसंदेह मैं इसी पुस्तक के दूसरे भाग को भी लिखने का प्रयास करूंगा। 

    पाठकों से मिलने वाली सराहना ही मेरी ऊर्जा में वृद्धि करती है, जिसके कारण मैं लगातार अपने स्वर्णिम इतिहास के शोध और अनुसंधान में तत्पर रहता हूं ताकि हम अपने ऐतिहासिक ग्रन्थों की विरासत को, उसके गरिमामयी और सशक्त रूप के साथ अपनी आने वाली पीढ़ियों को हस्तान्तरित कर सकें। जिससे उनके मन में यह भावना जाग्रत हो कि हमारा सनातन इतिहास कितना गौरवमयी है। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार ओमकार मनीषी, नरमू सचिव नरेंद्र त्यागी, सुमित चतुर्वेदी, रोहित बहल, व्यापार मंडल के नगराध्यक्ष सचिन बाथम, मोदी, अनूप गुप्ता, किशोर गुप्ता, दून स्कूल की प्रधानाचार्या समा ज़ैदी सहित आदि सम्मानित अतिथिगण मौजूद रहे।


    फ़ैयाज़ उद्दीन 

    Initiate News Agency (INA), शाहजहाँपुर

    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.