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    अयोध्या। राम मंदिर कार्यशाला में एक बार पुनः हलचल तेज, पत्थरों की तरासी व नक्काशी का काम शुरू

    अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की धर्म नगरी अयोध्या में रामजन्म भूमि कार्यशाला में एक बार पुनः हलचल तेज हो गई। पत्थरों की तरासी का कार्य शुरू हो गया है। ट्रकों से पत्थरो के आने का काम तेज हो गया है। राजस्थान से 15 सदस्य कारीगरों की टीम  रामजन्मभूमि कार्यशाला पहुंच गई है। पत्थरों के साबूत टुकड़ों को  एकत्रित कर सुरक्षित रखा जा रहा है। आर्किटेक्ट के द्वारा दी गई डिजाइन के अनुसार पत्थरों पर  नक्काशी की जायेगी। मंदिर निर्माण के निमित्त बुनियाद भरे जाने का काम पूरा हो चुका है । 

    तराशे  गए पत्थरों की जल्द ही पड़ेगी आवश्यकता। मंदिर की भव्यता को लेकर मॉडल में किया गया है बदलाव। पत्थरो के तराशी के लिए आवश्यकता अनुसार बढ़ाए जाएंगे कारीगर। मंदिर निर्माण के लिए 2023 तक मंदिर निर्माण का  लक्ष्य रखा गया है।राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने के लिए राजस्थान से 15 मजदूर अयोध्या पहुंच गए हैं। नींव का 44 लेयर का काम पूरा होने के बाद अब डेढ़ मीटर मोटा राफ्ट बनेगा।

    अयोध्या के राममंदिर निर्माण कार्यशाला में तराशे गए पत्थरों की जानकारी विहिप अध्यक्ष को श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने दिया। 

    अयोध्या में दिसंबर 2023 तक राममंदिर का निर्माण पूरा कर गर्भगृह में रामलला को बिठाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब मंदिर निर्माण में लगने वाले पत्थरों की तराशी व उन्हें अयोध्या लाने का काम शुरुl इसके लिए  राजस्थान से पहुंचे मजदूरों ने उपयोगी पत्थरों का चिन्हित कर तराशी शुरु कर दी है जिन पर नक्काशी कभी भी शुरु हो सकती हैl नक्काशी शुरु होने के बाद और कारीगरों को जरूरत के हिसाब से बुलाया जायेगा।

    विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र नारायण सिंह ने कहा कि जो पत्थर 1991 से यहां रखा गया था, आज के हिसाब से महज 20% है। अभी 70 से 80% पत्थरों पर नक्काशी करना है। पर्याप्त मात्रा में पत्थर उपलब्ध है और जल्दी उन पत्थरों पर तराशी का कार्य भी शुरू होगा। रामलला के मंदिर निर्माण के लिए जब बुनियाद की खुदाई हो रही थी तो उसने भारी मात्रा में मलबा मिला जिस पर नींव नहीं बनाई जा सकती थी। 400 फीट लंबा 300 फीट चौड़ा और 60 मीटर गहरा भूखंड था जहां से मलबा हटाया गया। बुनियाद की भराव उच्च क्वॉलिटी के मटेरियल से किया जा रहा है। एक लेयर 12 इंच की हो रही है।  इसके बाद मंदिर का प्लिंथ लेवल बनाया जाएगा। जो अभी मौजूदा कंडीशन से 2 से 3 मीटर ऊंचा होगा। राम मंदिर निर्माण में लगे हुए कार्यदायी संस्था के कर्मी पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ काम कर रहे हैं और 2023 के अंत तक हम लोग रामलला को उनके गर्भ ग्रह में स्थापित कर देंगे।

    श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण की रामघाट की दूसरी कार्यशाल में रखे हुए 70 हजार घनफिट पत्थरों में करीब 30 हजार घनफीट पत्थर मंदिर निर्माण में प्रयोग होने के लायक बताए जा रहे हैंl इनकी नक्काशी शुरु होने के बाद और कारीगरों को जरूरत के हिसाब से बुलाने की तैयारी हैl

     राजस्थान के कारीगर अपनी सुविधा व जरुरत के हिसाब से काम कर रहे हैंl अभी कार्यशाला में रखे हुए पत्थरों की तराशी हो रही हैl पत्थर तराशी का काम अयोध्या में 1990 से चल रहा था जो पिछले पांच साल से बंद थाl

     विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर रविंद्र नारायण सिंह ने  रामजन्मभूमि का दर्शनकर रामजन्म भूमि कार्यशाला का निरीक्षण किया है।ट्रस्ट के महासचिव  ने उन्हें कार्यशाल व पत्थरों की जानाकरी दीl विहिप अध्यक्ष ने कहा कि परिषद केवल मंदिर निर्माण का काम नहीं करती बल्कि संपूर्ण विश्व में हिंदुओं को संगिठत करती है।हम रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण कर रहे हैं।हमें हिंदुओं को जागृत कर हिंदुत्व की रक्षा करनी है।काशी और मथुरा के सवाल पर बोले कि पहले एक को चलने दीजिए फिर आगे की बात होगी।

    श्रीरामजन्मभूमि पर बने रहे भव्य मंदिर की सभी 44 लेयर का काम पूरा अब उसके ऊपर डेढ़ मीटर मोटा राफ्ट बनेगाl इसे मिर्जापुर की चार लाख घनफिट पत्थर से मजबूती देने के बाद आगे काम बढ़ेगा। अयोध्या में भगवान श्री राम का मंदिर 2023 तक बनकर तैयार हो जाएगा और रामलला को विराजमान करने के बाद आम भक्तों के दर्शन के  लिए खोल दिया जाएगा।


    देव बक्श वर्मा

    Initiate News Agency (INA)

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