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    अयोध्या। राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन , वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का आरंभ जनपद न्यायाधीश ज्ञानप्रकाश तिवारी ने किया।

    अयोध्या। अयोध्या जनपद के सिविल कोर्ट फैजाबाद में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें14 हजार 486 वाद का हुआ समाधान हुआ। राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप जलाकर वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का आरंभ जनपद न्यायाधीश ज्ञानप्रकाश तिवारी ने किया। जिला जज ज्ञान प्रकाश तिवारी  ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सम्बोधित करते हुए कहा कि लोक अदालत की मूल भावना के मूल में लोक कल्याण की भावना है।सुलह- समझौता के दौरान सभी का मान- सम्मान,सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है | शैलेन्द्र सिंह यादव,नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत एवं रिचा वर्मा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय फैजाबाद के अनुसार  इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 14486 वादों को निस्तारित किया गया। भूदेव गौतम न्यायाधीश मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने कुल 85 में से कुल 83 वाद निस्तारित किया,जिसपर कुल 3 करोड़ 23 लाख 00158.00 रू0 की धनराशि क्षतिपूर्ति तय की गयी। बैंक रिकवरी से संबंन्धित 862 प्री-लिटिगेशन वाद हल किये गये तथा बैंक संबंन्धित ऋण 4 करोड़ 77 लाख 65 हजार 569.00 रू0 वसूल किये गये।

    पारिवारिक न्यायालय द्वारा 84 मुकदमों को निस्तारित किया गया, जिसमें कई पुराने वाद निस्तारित किये गये। संबंधित मजिस्ट्रेट न्यायालयों द्वारा 2521 फौजदारी वादों का समाधान किया गया। जिसके एवज में  तीन लाख 79 हजार844.00 रुपये अर्थदण्ड  किया गया। सिविल न्यायालय द्वारा कुल 106 मामलों का निस्तारण किया गया। राजस्व मामलों से संबन्धित 10 हजार 424 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालय ने निस्तारित किये। जिला जज ज्ञान प्रकाश तिवारी ने कहा कि लोक अदालत की मूल भावना के मूल में लोक कल्याण की भावना है। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है।इतिहास गवाह है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह-समझौता के माध्यम से समाज के गणमान्य व्यक्ति बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनकर  निर्णय करते थेl दोनों पक्षों का हित किसमें हैं। इसी को देखते हुए सुलह-समझौता कराते थे और समाज में इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई पड़तें थे।

    एक मंच पर  सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराने का उद्देश्य

    दोनों पक्षों के मध्य आपसी कलह,मतभेद समाप्त हो। लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से लोक अदालत आयोजित कराने का निर्देश दिये जाते हैं। जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी जुड़ी हुई हैं। समाज एवं राष्ट्र के हित में हैं कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे। यदि आपसी मतभेद को सदभाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि सुलह न हो सके तभी  न्यायालय के शरण जाना चाहिए।

    सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती रिचा वर्मा ने कहा कि लोक अदालत के आयोजन में कोविड प्रोटोकाल एवं गाइड लाइन का पालन कराने के साथ आने वाले दोनों पक्षों के बैठने, शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था करायी गई।लोक अदालत में आने वाले सभी व्यक्ति के सुविधाओं का ख्याल रखा गयाl यह प्रयास किया गया कि  वृहद लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह-समझौता के माध्यम से निस्तारित कराकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया जा सके। जैसा कि सब जानते है कि सुलह से कलह मिटती हैं।लोक अदालत में आपसी रंजिश को दूर कराकर वादो का निस्तारण कराया जाता है। धारा 138 पराक्राम्य लिखित अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट), बैंक वसूली वाद,श्रम विवाद वाद,विद्युत एंव जलवाद बिल,(अशमनीय छोड़ कर) अन्य (आपराधिक शमनीय, पारिवारिक एंव अन्य व्यवहार वाद, आपराधिक शमनीय वाद, धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट),बैंक वसूली वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाऐं, श्रम विवाद वाद, विद्युत एंव जलवाद बिल, (अशमनीय छोड़ कर),पारिवारिक विवाद,भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबंन्धित वेतन,भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले, राजस्व वाद, जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों, अन्य सिविल वाद आदि वाद निस्तारित किया गया।

    देव बक्श वर्मा 

    Initiate News Agency (INA),अयोध्या


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