Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    सम्भल शहर के हल्लू सराय में नहीं मनाया जाता तीज का पर्व

    सम्भल शहर के हल्लू सराय में नहीं मनाया जाता तीज का पर्व

    सम्भल- उत्तरप्रदेश  : जिस समय देशभर में हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा होता है। तब सम्भल शहर के हल्लू सराय क्षेत्र में हरियाली तीज के दिन शोक मनाया जाता है। एक तरफ शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े ही धूमधाम के साथ हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है।

    तब वही हल्लू सराय क्षेत्र में इस पर्व पर गलियां सुनसान हो जाती हैं, ना ही घरों में चूल्हे जलते हैं, ना ही महिलाएं हाथों पर मेहंदी लगाती हैं और ना ही घरों में पकवान बनते हैं।

    इसको लेकर लोगों में अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं। क्षेत्र के लोगों के अनुसार सम्भल में आज से कई सौ वर्ष पूर्व मनोकामना मंदिर के कुंड में पृथ्वीराज चौहान ने कर लगा दिया था, कि जो भी उस कुंड में नहाएगा वह कर अदा करेगा।

    उस समय कन्नौज के निवासी लाखन मलखान उदल को सपने में मां काली ने दर्शन दिए और कहा कि यहां पर मुझे कर से मुक्त करो। इस सपने के बाद लाखन मलखान कन्नौज से अपनी पूरी सेना के साथ सम्भल पहुंचे और मंदिर से कर को लेकर पृथ्वीराज चौहान से युद्ध किया।

    इसमें पृथ्वीराज चौहान के बाण से उनकी मौत हो गई थी। जिस कारण हल्लू सराय में तीज का त्यौहार नहीं मनाया जाता है। एक व्यक्ति ने बताया की लाखन कन्नौज के राजा थे। उनको पृथ्वीराज चौहान की बेटी बेला से प्यार था। वह उससे शादी करने सम्भल आए थे।

    इस कारण दोनों में आपस में युद्ध हुआ। जिसमें लाखन मारे गए और बेला वहीं पर सती हो गई। इस कारण यहां के लोग हरियाली तीज के पर्व को मातम के रूप में मनाते हैं। वैसे तो क्षेत्र के लोगों की अलग-अलग कहानियां है। लेकिन इतना साफ जरूर है, कि इस युद्ध में कन्नौज बिरादरी के राजा हरियाली तीज के दिन मारे गए थे। जिसकी वजह से इस क्षेत्र में हरियाली तीज को शोक के रूप में मनाया जाता है।

    उवैश दानिश, सम्भल- उत्तरप्रदेश 
    INA NEWS(Initiate News Agency)

    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.