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    भारत की मंडियों पर भी पड़ रहा है अफ़ग़ानिस्तान में मची उथल-पुथल का असर

    भारत की मंडियों पर भी पड़ रहा है अफ़ग़ानिस्तान में मची उथल-पुथल का असर

    कानपुर- उत्तरप्रदेश : अफ़ग़ानिस्तान में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब भारत की मंडियों पर पड़ने लगा है. यहां से आने वाले सूखे मेवे व जीरे की सप्लाई चेन ब्रेक हो गई है. जिसके चलते व्यापारी अब अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया व आस्ट्रेलिया से होने वाले सूखे मेवे के आयात पर निर्भर हो गए हैं. व्यापारियों की माने तो यहां से मेवे की कुछ वैरायटियों का ही आयात होता है और उनकी भी आपूर्ति पूरी नहीं हो पाती है. जिसके चलते थोक मंडियों में इसके दाम बढ़ना लाज़मी हैं. व्यापारियों के मुताबिक त्योहारों के मद्देनजर सूखे मेवे की ख़रीद यही माकूल समय है, लेकिन काबुल से सप्लाई चेन टूटने के चलते असमंजस की स्थिति खड़ी हो गई है. कानपुर के नयागंज स्थित किराना मंडी में व्यापारी भी इन्ही समस्याओं से जूझ रहे हैं. उनका कहना है कि कोरोना के चलते वैसे भी मार्केट मंदी के दौर से गुजर रही थी, उस पर दामों में वृद्धि होने के चलते जो ग्राहक आ रहे थे वे भी दूरी बना लेंगे.  

    जीरे का नहीं है कोई विकल्प ...

    उत्तर प्रदेश किराना मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश बाजपेयी ने बताया कि अच्छी गुणवत्ता के सूखे मेवे जैसे बादाम अंजीर, पिस्तास खुमैनी, मुनक्का व मसालों में जीरे का आयात अफ़ग़निस्तान के काबुल से ही होता है. जिसकी सप्लाई चेन ब्रेक हो गई है. जिसके चलते मंडियों में सूखे मेवे के दाम बढ़ने लगे हैं. उन्होंने बताया कि वैसे तो बादाम की आवक अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया व आस्ट्रेलिया से भी होने लगी है, लेकिन इनकी क्वालिटी काबुल के बादाम की तुलना में कम बेहतर होती है, और आपूर्ति भी पूरी नहीं हो पाती है. उन्होंने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले जीरे का बाज़ार में कोई भी विकल्प मौजूद नहीं है. जिसके चलते परेशानी खड़ी हो सकती है.

    त्योहारों के मद्देनज़र दामों में हो सकती है ज़्यादा बढ़ोतरी...

    अवधेश बाजपेयी ने बताया कि त्योहारों के चलते व्यापारी मई-जून में मेवे का आर्डर करते हैं. जिसकी डिलीवरी अगस्त महीने तक होती है. लेकिन वहां के हालातों के चलते डिलीवर में परेशानी आ रही है. कई व्यापारियों का लाखों रुपये का माल सप्लाई चेन में फंसा हुआ है. वहीं, कुछ का माल तो अभी वहां के व्यापारियों के गोदामों में ही फंसा है. उन्होंने बताया कि त्योहार नज़दीक होने चलते बाज़ार में सूखे मेवे की माँग बढ़ जाती है. जिसके चलते इनके दाम आसमान छू सकते है. 

    बाज़ार से दूरी बना सकते हैं ग्राहक...

    उत्तर प्रदेश किराना मर्चेंट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष विनोद गुप्ता ने बताया कि कोरोना के चलते पिछले दो साल से मार्केट मंदी के दौर से गुजर रही थी. दूसरी लहर का प्रकोप कम होने के बाद फ़िलहाल कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब दामों में वृद्धि के चलते ग्राहक बाज़ार से दूरी बना सकते हैं. उन्होंने बताया कि पिस्ता का दाम 900 रुपये से बढ़कर 1200 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गया है. इसी तरह बादाम के दाम 850 रुपये से 1000 रुपये प्रतिकिलो, अंजीर के दाम 750 रुपये से 900 रुपये प्रतिकिलो, मुनक्का के दाम 400 से 500 रुपये व जीरे के दाम 350 रुपये से 450 रुपये तक पहुंच गए हैं.

    इब्ने हसन ज़ैदी, कानपुर- उत्तरप्रदेश
    INA NEWS(Initiate News Agency) 

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