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    तालिबान का देवबंद और दारुल उलूम से कोई ताल्लुक नहीं- मौलाना मदनी

    तालिबान का देवबंद और दारुल उलूम से कोई ताल्लुक नहीं- मौलाना मदनी

    दारुल उलूम से शिक्षा प्राप्त लोग दुनियाभर में अमन का पैगाम दे रहे हैं

    देवबंद/सहारनपुर उत्तरप्रदेश : अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद तालिबान को दारुल उलूम से जोड़े जाने के मुद्दे पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दारुल उलूम के हदीस के उस्ताद मौलाना अरशद मदनी ने इस पर सख्त नाराजगी का इजहार किया है। मौलाना मदनी का कहना है कि तालिबान का देवबंद और दारुल उलूम से कोई ताल्लुक नहीं है। बल्कि तालिबान देवबंद के महान स्वतंत्रता सेनानी और शेखुल हिंद की तहरीक रेशमी रुमाल से जुड़ी लोगों की औलादें या उनकी औलादों की औलादें हैं। बृहस्पतिवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि कुछ फिरकापरस्त ताकतें बेवजह यह भ्रम फैला रही हैं कि तालिबान देवबंद के पढ़े हुए हैं। सच यह है कि तालिबान देवबंद के पढ़े हुए नहीं है।

    बल्कि इनके पूर्वजों ने देवबंद में तालीम ली थी। कहा कि मुल्क की जंग-ए-आजादी की एक बड़ी मुहिम को चलाने वाले शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंद के थे और उन्होंने ही अफगानिस्तान पहुंचकर इस तहरीक का बड़े पैमाने पर संचालन किया था। उस समय इस मुहिम से जुड़े लोगों ने शेखुल हिंद को अपना आदर्श माना और उसके बाद उन्होंने आजादी की उस अलख को अपने अंदर जलाया। जहां तक मेरी जानकारी में है कि अब उस तहरीक से जुड़े लोग जिंदा नहीं है। अफगानिस्तान पर तालिबान द्वारा कब्जा किए जाने पर मौलाना मदनी ने कहा कि मेल मिलाप किसी भी तबके के लिए मायने रखता है। उनके मुल्क के अंदर भी अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक मौजूद हैं। अगर वह सभी के लिए समानता अपनाते हैं तो हम उनकी तारीफ करेंगे। लेकिन अगर वह भेदभाव बरतते हैं और अपनी बातों पर खरा नहीं उतरते हैं तो पूरी दुनिया उनकी मुखालिफत करेगी और हम भी उसी लाइन में खड़े नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि मौलाना मदनी ने दारुल उलूम को दहशतगर्दी का अड्डा बताने वालों के प्रति सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि हमारी तालीम खुले हुए पन्नों की तरह है जिन्हें कभी कोई भी आकर पढ़ सकता है। दारुल उलूम के दरवाजे हमेशा सभी के लिए खुले हुए हैं। दारुल उलूम ने हमेशा प्यार, मोहब्बत, अमन और भाईचारे की तालीम दी है। यही वजह है कि पूरी दुनिया में इस्लाम जंगल में आग की तरह तेजी के साथ फैला है। दारुल उलूम से शिक्षा प्राप्त लोग दुनियाभर में अमन का पैगाम दे रहे हैं।

    शिबली इक़बाल, देवबंद/सहारनपुर उत्तरप्रदेश
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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