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    पिहानी कस्बे में सात मुहर्रम पर अतिसंवेदनशील इलाकों में चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस

    पिहानी कस्बे में सात मुहर्रम पर अतिसंवेदनशील इलाकों में चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस

    • सात मोहर्रम के मेहंदी जुलूस को लेकर प्रशासन की कड़ी निगरानी में है कस्बा
    • कोरोना प्रोटोकॉल के पाबंदी के चलते  सात मुहर्रम पर शिया समुदाय के लोगों ने नहीं निकाला इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम इब्ने हसन के ताबूत इतिहासिक जुलूस

    पिहानी- हरदोई : कस्बे के सातवी  मोहर्रम का जुलूस ऐतिहासिक होने के साथ- साथ  दूरदराज क्षेत्रों का प्रसिद्ध जुलूस है। हजारों की संख्या में सात मोहर्रम के जुलूस में लोग भागीदारी करते थे। इस जुलूस में छुरियों व तलवार का मातम व बच्चों के कमा भी लगाया जाता था। परंतु यह सव   कोरोना में पाबंदी की भेंट कर चढ गया।

    किस तरह उठे कासिम-ए-मुजतर का जनाजा...मना हजरत कासिम अलैहिस्सलाम की शहादत का गम..

    पिहानी में मंगलवार को नहीं निकला सात मोहर्रम का जुलूस ,शारीरिक दूरी के साथ होगी ऑनलाइन मजलिस..

    पामाल हुआ दश्त में घोड़ों की सुमों से, किस तरह उठे कासिम-ए-मुजतर का जनाजा...। सातवीं मुहर्रम पर मंगलवार को हजरत इमाम हसन अलेहिस्सलाम के 13 वर्षीय हजरत कासिम अलैहिस्सलाम की शहादत का गम मनाया गया। कर्बला के मैदान में यजीद की फौज ने शहजादे कासिम को शहीद करके उनकी लाश को घोड़ों की टापों से पामाल (कुचल) दिया था। सातवीं मोहर्रम से ही यजीदयों ने हुसैनियों पर जुल्म ज्यादा बढ़ा दिये थे। भीषण गर्मी थी इसके बावजूद उन पर पानी बंद कर दिया गया। तीन दिन की भूख-प्यास की शिद्दत में परिवार और साथियों के साथ दी गयी कुर्बानियों को याद करके अजादार गम-ए-हुसैन में डूब गए। हजरत कासिम की शहादत का दर्दनाक मंजर सुन अजादार बेकरार हो उठे। नम आंखों से अजादारों ने आंसुओं का पुरसा पेश किया। 

    मौलाना गुलाम अब्बास ने पहले इमाम हजरत अली अलैहिस्सलाम की एलान-ए-विलायात का जिक्र करते हुए कहा कि जब हजरत रसूल खुदा (स.) हज करके वापस आ रहे थे जब गदीर के मैदान में नबी-ए-करीम ने इमाम की विलायत का एलान किया था। रसूल द्वारा इमाम को अपना जनशीन घोषित करने के बाद भी जालिमों ने उनपर और उनके परिवार पर जुल्म करना नहीं छोड़ा। दस मुहर्रम को इमाम के बेटे हजरत इमाम हुसैन अलेहिस्सलाम को उनके 72 जानिसारों के साथ कत्ल कर दिया गया, जिसकी याद में हर साल दुनियाभर में मुहर्रम मनाया जाता है।  मौलाना ने पैगम्बर इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब और हजरत अली अलैहिस्सलाम की फजिलत को बयान किया। उधर अजादार मीसम जैदी ने बताया कि  सातवीं मुहर्रम पर मीरसराय व छीपीटोला से निकलने वाला ऐतिहासिक शाही मेहंदी का जुलूस नहीं निकाला गया। बड़े व छोटे इमामबाड़ों को रंगबिरंगी झालरों से सजाया गया था।  वहीं लश्करे हुसैनी के अलमदार हजरत अब्बास अलैहिस्लसाम की याद में हर साल  निकलने वाला अलम फातहे फुरात का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। कोरोना के चलते सभी  जुलूस स्थगित कर दिये गये है।

    नवनीत कुमार रामजी, पिहानी- हरदोई
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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