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    जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी, ऐसा करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 से ₹50000 जुर्माना की सजा का प्रावधान

    जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी, ऐसा करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 से ₹50000 जुर्माना की सजा का प्रावधान

    हरदोई : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरदोई के निर्देशानुसार तहसील संडीला के ग्राम पंचायत सोम में तहसीलदार / सचिव अंबिका चौधरी द्वारा शिविर का आयोजन किया गया| जिसकी अध्यक्षता अंबिका चौधरी तहसीलदार द्वारा की गई|

    जिस में उपस्थित ग्राम प्रधान व क्षेत्रीय लेखपाल व ग्रामवासी जिसमें तहसीलदार ने बताया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है और लीगल एड क्लीनिक रामकिशोर के द्वारा मंच का संचालन किया गया और पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 के बारे में ग्राम वासियों को जानकारी दी|

    पी एल वी पवनेश कुमार ने भी पीसीपीएनडीटी के बारे में सभी को सक्रियतापूर्वक बताया और पी एल वी अनुराग पांडे ने महिलाओं के अधिकार के बारे में ग्राम वासियों को सक्रियतापूर्वक जानकारी दी और यह भी बताया कि 1996 के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी करने वाले जोड़े या करने वाले डॉक्टर लैब कर्मी को 3 से 5 साल की सजा और 10 से ₹50000 जुर्माना की सजा का प्रावधान है|

    पी एल वी बंदना कुमारी ने भी पीसीपीएनडीटी के बारे में महिलाओं और पुरुषों को भलीभांति समझाया बाद जानकारी दी| पीएलवी लीगल एड क्लीनिक रामकिशोर, अनुराग पांडे, पवनेश कुमार, गुरुशरण, धीरज बाबू, प्रतिभा, बंदना कुमारी आदि रहे|

    INA NEWS(Initiate News Agency)

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