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    यहां होते हैं अद्भुत शिवलिंग के दर्शन, दिन में तीन बार रंग बदलता है

    यहां होते हैं अद्भुत शिवलिंग के दर्शन, दिन में तीन बार रंग बदलता है

    • गोमती नदी के तट पर स्थित है यह पौराणिक शिव मंदिर...
    • देवराज इंद्र ने श्राप मुक्ति पाने के लिए की थी यहां शिवलिंग की स्थापना, प्रथम पूजा मानव नहीं, करते हैं देव

    पीलीभीत- उत्तरप्रदेश : सावन के पवित्र महीने के शुरुआत हो गई है| जय बम भोले जय शिव शंकर के उद्घोष के साथ सावन के पहले सोमवार को  शिव भक्त बड़ी संख्या में शिवालयों मे महादेव की पूजा अर्चना के लिए  जुटने लगे हैं भारतवर्ष में अनेकों देवालय अपने चमत्कारिक स्वरूपों के कारण प्रसिद्ध है जनपद में भी चमत्कारों से परिपूर्ण तहसील पूरनपुर क्षेत्र में मां आदि गंगा गोमती नदी के बाएं तट पर एक सुप्रसिद्ध पौराणिक शिव मंदिर स्थापित है जो बाबा इकोहत्तरनाथ के नाम से जाना जाता है जिस पर वर्ष भर भक्तों का मेला लगा रहता है।

     

    पीलीभीत की धरती पर यूं तो कई प्राचीन और पौराणिक चमत्कारिक धर्मस्थल है जिनके प्रति श्रद्धालुओं की अत्यधिक आस्था है इन में से एक पूरनपुर तहसील क्षेत्र से 15 किलोमीटर , मां आदि गंगा गोमती नदी के उद्गम तीर्थ स्थल से लगभग 25 किलोमीटर और गुलडिया भूपसिंह गांव से लगभग 5 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत टांडा के मंडन पुर जंगल में गोमती नदी के बाएं तट पर सुप्रसिद्ध शिव मंदिर है|

    जो इकहोत्तरनाथ के नाम से जाना जाता है यह एक प्राचीन और पौराणिक मंदिर है जनश्रुति के मुताबिक देवताओं के राजा इंद्र ने दुर्वाशा ऋषि के श्राप से मुक्ति पाने के लिए मां आदि गंगा गोमती  नदी के तट पर शिवलिंगों की स्थापना की थी जिनमें से इकहत्तरवां  शिवलिंग यहां के शिवालय में स्थापित करने से इस स्थान का नाम इकहोत्तरनाथ नाम पड़ गया मंदिर का प्राचीन और दुर्लभ शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है|

    इस मंदिर की दूसरी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां प्रथम पूजा किसी मनुष्य द्वारा अब तक नहीं की जा सकी है  प्रातः काल मंदिर के कपाट खुलते ही शिवलिंग पर स्वत: ही पूजा अर्चना की हुई  मिलती है श्रद्धालु लोग अपनी मनौतियां पूर्ण होने पर भगवान भोले के इस चमत्कारिक एवं पौराणिक मंदिर परिसर में नल लगवाते और घंटे चढ़ाते हैं हर पूर्णमासी पर यहां पर विशाल मेला का आयोजन होता है|

    इस मंदिर तक मार्ग ठीक-ठाक ना होने के कारण श्रद्धालुओं को अच्छी खासी असुविधा का सामना करना पड़ता है|किंतु आस्था आगे यह कठिनाई कोई मायने नहीं रखती भगवान भोले नाथ के भक्त इन सब की परवाह न करके अपने भगवान भोले से जरूर मिलने को जाते हैं|

    कुंवर निर्भय सिंह, पीलीभीत- उत्तरप्रदेश
    INA NEWS(Initiate News Agency) 

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