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    कानपुर। कानपुर मेट्रो के ढाँचे की ‘लोड टेस्टिंग’ शुरू; ट्रेन से सवा गुना ज़्यादा वज़न के साथ होगा परीक्षण

    कानपुर। कानपुर मेट्रो के 9 किमी. लंबे प्रयॉरिटी कॉरिडोर का सिविल निर्माण कार्य लगभग पूरा होने को है और इसी के साथ-साथ ट्रायल रन की तैयारियों ने भी ज़ोर पकड़ लिया है। मेट्रो ढाँचे की लोड टेस्टिंग शुरू हो चुकी है। यह टेस्ट, एक गर्डर पर यात्रियों से भरी हुई पूरी ट्रेन का जितना हिस्सा आता है, उस हिस्से के वज़न से लगभग सवा गुना (1.25) ज़्यादा वज़न के साथ यह परीक्षण होता है। कानपुर में आईआईटी से मोतीझील के बीच बन रहे एलिवेटेड प्रयॉरिटी कॉरिडोर में लगभग 248 टन वज़न के साथ यह परीक्षण किया जाएगा।

    इस सम्बन्ध में यूपीएमआरसी के एमडी  कुमार केशव ने मेट्रो इंजीनियरों को बधाई देते हुए कहा, "कानपुर मेट्रो परियोजना विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप तैयार हो रही है, जिसके अन्तर्गत सर्वोत्कृष्ट रॉ-मटीरियल और उन्नत तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। प्राथमिक सेक्शन पर लोड टेस्ट शुरू हो गया है।   इस साल नवंबर में प्राथमिक सेक्शन पर होने वाले ट्रायल रन को ध्यान में रखते हुए यह टेस्ट बहुत ही महत्वपूर्ण है।"


    कैसे होती है लोड टेस्टिंग?

    लोड टेस्टिंग की प्रक्रिया के अंतर्गत मेट्रो ढाँचे की वज़न झेलने की क्षमता की जाँच की जाती है। इसके लिए बालू से भरी बोरियों को मेट्रो के वायडक्ट पर रखा जाता है। निर्धारित वज़न को पाँच चरणों में वायडक्ट पर रखा जाएगा और वज़न का दबाव पड़ने से मेट्रो ढाँचे पर पड़ने वाले प्रभावों की रीडिंग ली जाएगी।


    इन जगहों पर होगा परीक्षण…

    आईआईटी से मोतीझील के बीच बन रहा कानपुर मेट्रो का प्रयॉरिटी कॉरिडोर पूरी तरह से उपरिगामी (एलिवेटेड) है और इसके वायडक्ट में मुख्य रूप से तीन तरह के गर्डर्स का इस्तेमाल हुआ है; U-गर्डर, I-गर्डर और स्टील बॉक्स गर्डर। आईआईटी से कल्याणपुर के बीच I-गर्डर पर; और रावतपुर में U-गर्डर और स्टील बॉक्स गर्डर पर लोड टेस्ट होगा।


    इब्ने हसन ज़ैदी 

    Initiate News Agency(INA), कानपुर 

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