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    कुओं का शहर है शहीदों की नगरी शाहजहाँपुर...

    कुओं का शहर है शहीदों की नगरी शाहजहाँपुर...

    डॉ. विकास खुराना की स्पेशल स्टोरी...

    जनरल हिस्ट्री ऑफ डिस्ट्रिक के खंड पांच से पता चलता है कि शहर शाहजहाँपुर एक बड़े बाग का प्रतिनिधि शहर था,चर्च टावर पर खड़े हो जाओ तो सुनहरी मस्जिद के अलावा कुछ दिखता नही था केवल हरे भरे पेड़। अधिकतर मकान छोटे और ककैय्या ईंटो के थे। कुएं पानी का प्रधान स्रोत, जीबी क्यूरी द्वारा तैयार की गई भू सेटलमेंट की रिपोर्ट बताती है कि पानी सिर्फ 11 फीट पर मिल जाता था, बस हाथ से बाल्टी डालो और निकाल लो, हर घर मे कम से कम एक कुआँ जरूर था। जबकि समृद्ध घरों में दो से तीन तक थे। सार्वजनिक कुएं विशेष महत्व के थे जहां विभिन्न पूजाये और विवाह इत्यादि संस्कार आयोजित होते थे, पेड़ो की डंकालो से इन्हें सुरक्षित किया जाता था, शाहजहाँपुर पालिका 1863 में बनी, 1869 में नवाब बहादुर खान के मकबरे के पास जिले का पहला जल टैंक पालिका की बहुप्रतीक्षित योजनाओ में से एक था।

    कृषि की सिंचाई में भी कुओ का प्रयोग किया जाता था। कोई 56.7 प्रतिशत भूमि कुओ के द्वारा ही सिंचित थी, नदियों के किनारे वाटर अपलिफ्टिंग की गियर प्रणाली थी और बड़े बड़े मशक की सहायता से पानी निकालकर खेतो में उड़ेला जाता था। आज शाहजहाँपुर के कई परगने भूगर्भ जल की दयनीय स्थिति से गुजर रहे है, नम भूमि और तालाब-झीलें इतिहास की विषय वस्तु बनने को है। यह समझा जाना जरूरी है कि भूमि के गर्भ में सुरक्षित जल हजारों वर्षों के प्राकृतिक संरक्षण का परिणाम है और उसके बिना जीवन नष्ट,जल का महत्व सामुदायिक है और इस पर ध्यान दिया जाना अब अपरिहार्य, एक एक बूंद बचाइये ताकि पीढियां बच पाए।

    लेखक-  डॉ. विकास खुराना

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