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    यमुना नदी के किनारे कैलाश महादेव मंदिर में स्‍थापित हैं जुड़वां शिवलिंग, हर मनोकामना होती है पूरी

    यमुना नदी के किनारे कैलाश महादेव मंदिर में स्‍थापित हैं जुड़वां शिवलिंग, हर मनोकामना होती है पूरी

    त्रेता युग में कैलाश पर्वत पर इन्‍हें स्‍वयं भगवान शिव ने परशुराम और उनके पिता ऋषि जय‍दग्नि को दिया था। वह इन्‍हें आगरा लेकर आए थे।

    आगरा- उत्तरप्रदेश : यमुना नदी के किनारे कैलाश महादेव मंदिर में जुड़वां शिवलिंग स्‍थापित है। त्रेता युग में कैलाश पर्वत पर इन्‍हें स्‍वयं भगवान शिव ने परशुराम और उनके पिता ऋषि जय‍दग्नि को दिया था। वह इन्‍हें आगरा लेकर आए थे। माना जाता है कि यहां पर मनोकामना पूरी हो जाती है।

    कैलाश महादेव मंदिर आगरा शहर से करीब 8 किमी दूर सिकंदरा इलाके में यमुना किनारे स्थित है। मंदिर के महंत महेश गिरी ने कहा, ''इन जुड़वां ज्योर्ति‍लिंग के बारे में कहा जाता है कि यह शिवलिंग की स्‍थापना खुद भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जयदग्नि के हाथों की गई थी।''

    ''त्रेता युग में परशुराम और उनके पिता कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की कठिन तपस्‍या करने गए। उनकी कड़ी तपस्या के चलते भगवान शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। इस पर इन दोनों भक्तों ने उनसे अपने साथ चलने को कहा और मांग कि‍या कि आप हमेशा हमारे साथ रहें।''

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    जमीन में धंस गए थे शिवलिंग...

    ''इसके बाद भगवान शिव ने दोनों पिता-पुत्र को एक-एक शिवलिंग भेंट स्वरुप दिया। जब दोनों पिता-पुत्र अग्रवन में बने अपने आश्रम रेणुका के लिए चले (रेणुकाधाम का अतीत श्रीमद्भागवत गीता में वर्णित है) तो आश्रम से 4 किमी पहले ही रात्रि विश्राम को रुके।''

    ''अगले दिन सुबह की पहली बेला में हर रोज की तरह नित्यकर्म के लिए गए। इसके बाद ज्योर्ति‍लिंगों की पूजा करने के लिए पहुंचे तो वह जुड़वां ज्योर्ति‍लिंग वहीं पृथ्वी की जड़ में समा गए।''

    ''इन शिवलिंगों को दोनों ने काफी उठाने का प्रयास किया, लेकिन उसी समय आकाशवाणी हुई कि अब यह कैलाश धाम माना जाएगा। तब से इस धार्मिक स्थल का नाम कैलाश पड़ गया।''

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    राजाओं ने कराया था जीर्णोद्धार...

    ''जानकार बताते है कि इस कैलाश मंदिर की स्थापना तो त्रेता युग में हुई, लेकिन इस मंदिर का जीर्णोद्धार कई बार कई राजाओं ने भी कराया है।''

    ''यमुना किनारे कभी परशुराम की मां रेणुका का आश्रम हुआ करता था। उस समय इस जगह ऐसी घटना घटी कि यमुना नदी के किनारे बने स्थान का नाम कैलाश रख दिया गया।''

    लेखिका- भावना वरदान शर्मा(आगरा)

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