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    अपराधों को रोकना सिर्फ पुरुष या महिला का नहीं बल्कि दोनों का काम है- अलका पाण्डेय

    अपराधों को रोकना सिर्फ पुरुष या महिला का नहीं बल्कि दोनों का काम है- अलका पाण्डेय

    लाभकारी योजनाओं तथा कोविड-19 सुरक्षा हेतु विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन

    हरदोई- उत्तरप्रदेश : उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के तत्वावधान तथा प्रभारी जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरदोई रिजवानुल हक के आदेशानुसार शासन की लाभकारी योजनाओं तथा कोविड-19 सुरक्षा हेतु विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन ग्राम पंचायत बहर के ग्राम कन्डौहुना में किया गया।

    शिविर की अध्यक्षता कर रहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अलका पाण्डेय ने सम्बन्धित विषय पर जानकारी देने के साथ-साथ पाक्सो एक्ट, महिलाओं के प्रति अपराध एवं दहेज अधिनियम, घरेलू हिंसा, पी. सी. पी. एन. डी. टी. एक्ट,सालसा द्वारा कोविड-19 से बचाव हेतु जारी की गयी पुस्तक, धारा 156(3), उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलायी जा रही बाल सेवा योजना, वैक्सीन लगवाने हेतु लोगों को प्रेरित करने के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार अधिनियम 2007 के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

    जिले में लगातार बढ़ते जा रहे जघन्य अपराधों पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अपराधों को रोकने के लिए सभी लोगों को सहयोग किया जाना चाहिए। अपराधों के चक्रव्यूह में फंसकर जिंदगियां बर्बाद होती हैं और रिश्ते तोड़ दिए जाते हैं। यह बहुत दुःखद स्थिति है।

    लड़की एवं महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं। अपराधों को रोकना सिर्फ पुरुष या महिला का नहीं बल्कि दोनों का काम है। बेटियों को शिक्षित किए जाने पर भी उन्होंने जोर दिया। किसी महिला के साथ गर्भ गिरा देने की घटना होने पर दोषी पर कड़ी कार्रवाई करने का प्रावधान है। उन्होंने महिलाओं व बेटियों को उनके साथ होने वाली हिंसा या अपराध का विरोध करने के लिए जागरूक किया|

    सदर तहसीलदार अवधेश कुमार ने वर्तमान में ग्रामीणों के लिए चलायी जा रहीं सरकारी जन कल्याणकारी योजनाओं के बारे बताते हुये कृषक दुर्घटना बीमा योजना, कन्या सुमंगला योजना,तथा  पी. एम. मोदी हेल्थ आईडी कार्ड योजना के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ कोविड-19 सुरक्षा हेतु टीकाकरण कराए जाने हेतु लोगों को प्रेरित भी किया।

    कहा कि साक्षर और शिक्षित होने में अंतर है। लोग साक्षर नहीं होते हैं लेकिन शिक्षित होते हैं। साक्षर होने का मतलब है- जागरूक होकर गलत कामों का विरोध करना। पी. एल. वी. फारूक अहमद व कीर्ति कश्यप ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये।

    शिविर का संचालन लीगल क्लीनिक सदर फरहान सागरी द्वारा किया गया। ग्राम पंचायत बहर के प्रधान अंकित ने शिविर की सराहना करते हुये कहा कि आगे भी ऐसे शिविर होते रहें जिससे लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहे|

    विजय लक्ष्मी सिंह
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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