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    BPSC 64वीं परीक्षा के परिणाम घोषित, सामान्य वर्ग एवं पिछड़ा वर्ग का कट ऑफ मार्क्स बराबर : वीरेंद्र गोप

    BPSC 64वीं परीक्षा के परिणाम घोषित, सामान्य वर्ग एवं पिछड़ा वर्ग का कट ऑफ मार्क्स बराबर : वीरेंद्र  गोप

    गया- बिहार : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के असली चेहरा अब सामने आया है,  बीपीएससी 64 वीं की परिणाम सामने आने के बाद जब परीक्षार्थियों  ने  अपना कट ऑफ मार्क देखा तो वे दंग रह गए क्योंकि सामान्य वर्ग के श्रेणी में  पिछड़ा वर्ग का कट ऑफ मार्क था| पिछडा समाज अब उहापोह में है कि सरकार ने तो हमारी  हकमारी की है  हमारे हक अधिकार से वंचित किया जा रहा है सरकार की नीति और नीयत पर अब सवालिया निशान खड़ा हो रहा है, आखिर नीतीश कुमार चाहते क्या हैं वह भी पिछड़े  समाज से आते हैं ।

    राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव सह प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी महासभा बिहार अधिवक्ता बीरेन्द्र कुमार उर्फ बीरेन्द्र गोप ने वयान जारी कर बीपीएससी द्वारा आयोजित 64वीं परीक्षा के परिणाम पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि ओबीसी के तथाकथित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने को नागपुरी संतरे के रंग में रंगकर पिछड़ा (आरक्षित) वर्ग एवं सामान्य(अनारक्षित) वर्ग का कट ऑफ मार्क्स बराबर कराकर पिछड़े वर्ग को मिल रहे आरक्षण का मजाक बनाते हुए अपने  असली चेहरा जनता के बीच ला दिया है। उन्होंने अपने पन्द्रह वर्षों के शासन काल में अपने खास जाति को आर्थिक व शैक्षणिक रुप से मजबूत कराकर बाकी पिछड़े वर्ग को लात मारने का काम किया है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। बीरेन्द्र गोप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कोरोना वैक्सीनेशन पॉलिसी में बदलाव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि चाहे जैसे भी और जिन कारणों से हुआ हो,केन्द्र सरकार को भारी नीतिगत-खामियों से भरी अपनी टीका-नीति (Vaccination Policy)में कुछ संशोधन करने ही पड़े।

    उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार का यह आम स्वभाव नहीं रहा है।असंख्य बड़ी-बड़ी नीतिगत गलतियाँ करने के बावजूद वह उन पर कायम रहने की जिद पर अड़ी रही है,पर इस बार कुछ तो बदलाव दिखा-सरकार के स्वभाव में चाहे वह टीकाकरण-नीति में ही अपनी भारी गलतियों और नीतिगत बेवकूफियों पर सोचने के लिए मजबूर हो गयी| गोप ने कहा कि केन्द्र सरकार अपने भूल को सुधारने में पूरे नहीं तो कुछ कदम आगे बढ़ा है यह स्वागत योग्य है। गोप ने कहा कि यह सब यूँ ही नहीं हो गया,इसमें हमारे समाज और अपने बचे-खुचे लोकतंत्र के तीन प्रमुख घटकों की बेहद अहम् भूमिका रही है, ये घटक है 1.न्यायपालिका(जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ के केंद्र सरकार की दोषपूर्ण टीका नीति पर आलोचनात्मक विचार और ठोस निर्देश) 2. विपक्ष-शासित कई राज्य सरकारों-केरल, तमिलनाडु, बंगाल और छत्तीसगढ़ आदि और राजनीतिक दल के तौर पर राष्ट्रीय जनता दल,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसपार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, एनसीपी, टीएमसी,डीएमके और शिव सेना आदि की तरफ से केंद्र पर 'फ्री टीकाकरण' के लिए डाले जाने वाले दबाव और 3. लोकतंत्र-समर्थक मीडिया(कुछ अखबारों के अलावा न्यूज़ पोर्टल्स और यूट्यूबर्स आदि) का इस मामले में जरूरी रचनात्मक हस्तक्षेप, जो बार-बार फ़्री टीकाकरण का सवाल उठा रहा था। बीरेन्द्र गोप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 75 फीसदी टीकाकरण को 21 जून से 'फ्री'(सरकारी केंद्रों पर) करने का ऐलान किया. इसके दायरे में हर उम्र के लोग (18 साल से शुरू होकर) आयेंगे. ऐसी सुविधा दुनिया के ज्यादातर देश पहले से दे रहा है, अब उस सूची में भारत भी आ गया है। पर इसमें एक बड़ा लोचा है,75 फीसदी ही क्यों, दुनिया के अनेक देशों की तरह 100 फीसदी क्यों नहीं? प्राइवेट अस्पतालों को प्रति टीका-खुराक 150 रूपये 'लूटने' की छूट क्यों? बीते एक साल से ये निजी अस्पताल कोरोना चिकित्सा के नाम पर भारत की जनता  से कितनी बड़ी 'लूट' कर चुकी है, फिर ये टीकाकरण में भी क्यों ?

    उन्होंने कहा कि सरकारी टीका कंपनियों के जरिये टीका विकास और उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति को बढावा मिलना चाहिए।केन्द्र सरकार द्वारा टीकाकरण के लिए 35000 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है,अभी तक इसमें सिर्फ 4488 करोड़ ही खर्च हुए हैं फिर दूसरे मुल्कों को पैसा लुटाने से क्या ये अच्छा नहीं होगा कि हम अपनी कंपनियों को जो कार्यशील हो,उन्हें टीका विकास और उत्पादन में लगाया जाए|

    प्रमोद कुमार यादव, गया- बिहार
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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