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    कानपुर में बच्चो की वैक्सीन के लिए शुरू हुआ ट्रायल

    कानपुर में बच्चो की वैक्सीन के लिए शुरू हुआ ट्रायल 

    कानपुर- उत्तरप्रदेश : भारत देश ने कोरोना महामारी से बचने के लिए सबसे पहले वैक्सीन बनाकर विश्व में एक कीर्तिमान स्थापित किया है। वैक्सीन ट्रायल के लिए ना सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि कानपुर के कई अस्पताल इस कीर्तिमान में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं। एक बार फिर इस कोरोना के तीसरे वार की चपेट में आने वाले बच्चों को बचाने के लिए कोवैक्सीन के ट्रायल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बच्चों को बचाने के लिए भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) हैदराबाद ने स्वदेशी कोवैक्सीन ट्रायल की जिम्मेदारी देश के छह अस्पतालों को सौंपी है। सबसे पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स दिल्ली में ट्रायल शुरू हुआ है तो वही कानपुर समेत देश के पांच (एम्स दिल्ली , एम्स पटना, निजाम इंस्टीट्यूट हैदराबाद, बेलग्राम) स्थानों पर ट्रायल प्रक्रिया शुरू हो चली है। इसमें कानपुर के आर्य नगर स्थित प्रखर हॉस्पिटल ने भी मंगलवार को 50 में से 15 बच्चे वॉलिंटियर को वैक्सीन की पहली डोज दी है।

    डॉ. जेएस कुशवाहा, चीफ गाइड, वैक्सीन ट्रायल प्रखर हॉस्पिटल कानपुर

    कानपुर में हो रहे इस ट्रायल से ना सिर्फ गौरव महसूस हो रहा है बल्कि वैक्सीन ट्रायल के लिए बच्चों में खासा उत्साह भी देखने को मिल रहा है। वही प्रखर हॉस्पिटल के चीफ गाइड डॉक्टर जेएस कुशवाहा ने बताया कि वैक्सीन लगाने से पहले बच्चों के अभिभावकों से अनुमति ली गई। फिर उनके स्वास्थ्य की जांच कर स्वस्थ बच्चों की एंटीबॉडी जांच, रक्त का सैंपल, rt-pcr जांच के लिए थ्रोट और नेजल स्वाब को आईसीएमआर की लैब में भेजा गया। उसके बाद पहले दिन 12 बच्चों को वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई जबकि वैक्सीन की दूसरी डोज 28 दिन बाद इन वॉलिंटियर्स को दी जाएगी।

    इब्ने हसन जैदी, कानपुर- उत्तरप्रदेश
    INA NEWS(Initiate News Agency) 

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