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    नलकूप विभाग की अजब कारस्तानी, पढ़िए पूरी कहानी किसानों की जुबानी

    नलकूप विभाग की अजब कारस्तानी, पढ़िए पूरी कहानी किसानों की जुबानी

    मोटर बदलने के बाद चालू किया जा सकता है नलकूप, फिर भी विभाग रिबोर कराने की जिद पर अड़ा

    हरियावां- हरदोई : जिले में नलकूप विभाग की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी ने किसानों की समस्याओं को प्राथमिक स्तर पर लेकर उसका निस्तारण करने का फरमान पूरे प्रदेश के अधिकारियों को जारी किया गया है। वहीं जिले के अधिकारियों के कान पर किसानों की समस्याएं सुनने के बाद भी जूं तक नहीं रेंगती है। किसानों के सामने हां-हूं और उच्चाधिकारियों के सामने 'हां हुजूर, जी हुजूर' करने के आदी कुछ लापरवाह कर्मचारियों/अधिकारियों की धीमी कार्यशैली का खामियाजा अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। 'उनकी फाइलों का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है' की कहावत को लगातार नलकूप विभाग चरितार्थ करता दिखाई दे रहा है। खासतौर से किसानों की समस्याओं का ही निराकरण करने के लिए स्थापित किए गए इस विभाग का वास्तविकता में किसानों के सुख-दुःख से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें तो बस किसानों को फर्जी आश्वासन देकर उन्हें चुप करा देना है।

    हकीकत में कोई भी समस्या दूर नहीं की जा रही है। हम बात कर रहे हैं हरियावां ब्लॉक के गांव मरई में स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया नलकूप संख्या 17 की, जहां पिछले करीब 9 महीनों से नलकूप खराब पड़ा है। यह नलकूप ठूंठ बनकर रह गया है। किसी भी किसान को इस नलकूप से कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। किसानों रामप्रकाश, जगन्नाथ, सुदर्शन व हिमांशु आदि ने बताया कि इस नलकूप के मोटर को बदलवाकर इसे चालू किया जा सकता है लेकिन जब इस बारे में किसानों ने संबंधित अधिकारियों से बात की तो उन्होंने मोटर बदलवाने के स्थान पर इसे रिबोर करवाने की बात कही। जबकि रिबोर करवाने में अधिक समय खर्च होगा सुर मोटर बदलवाने में उतना समय नहीं लगेगा। विभागीय कर्मचारी एक बिचौलिए की तरह काम करते नजर आ रहे हैं। किसानों को आश्वासन देते हैं और अपने उच्चाधिकारियों को फ़ाइल में छोटी सी समस्या के रूप में दिखलाकर उससे पल्ला झाड़ लेते हैं। यह सिलसिला पिछले करीब 9 महीने से चल रहा है। किसानों के मुताबिक, इस नलकूप से मरई गांव सहित आसपास क्षेत्र के करीब 3000 किसानों को इससे लाभान्वित किया जा सकता है लेकिन हुक्मरान अपनी अफसरशाही दिखाने से बाज नहीं आते। 

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    किसानों को ढ़ीली करनी पड़ रही अपने जेबें..

    हरियावां : नलकूप के चालू न होने और अफसरों की लापरवाही से किसानों को अपनी जेबें न चाहकर भी ढ़ीली करनी पड़ रही है। फसल में पानी लगाने के लिए किसानों को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंजन या पम्पिंग सेट लगवाना पड़ता है। जिसके लिए न चाहते हुए भी किसानों को डीजल खरीदकर इंजन/पंपिंग सेट से खेतों में पानी लगाना पड़ रहा है। इस तरह से किसानों पर कहीं न कहीं आर्थिक चोट भी पड़ रही है।

    INA NEWS(Initiate News Agency), डेस्क हरदोई|

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