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    जिला शिक्षा अधिकारी पहुंचा रहे है प्राईवेट स्कूलों को अनुचित लाभ

    जिला शिक्षा अधिकारी पहुंचा रहे है प्राईवेट स्कूलों को अनुचित लाभ

    कम गरीब बच्चों को प्रवेश देने प्राईवेट विद्यालयों ने दी सीटों की गलत जानकारी, उच्च अधिकारीयों ने दिए थे तीन बार जांच के आदेश

    राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ : शिक्षा विभाग की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है, क्योंकि विभाग के कामकाज पर लगातार उंगलियां उठ रही है और विभाग की छबि खराब हो रही है। फर्नीचर घोटाला, बतर्न घोटाला और वेतन घोटाला अभी शांत हुआ ही नहीं था कि अनुकंपा नियुक्तियों में पैसे के लेन-देन की शिकायत हो गई, वैसे भी गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दिलाने में जिला शिक्षा अधिकारी की घोर लापरवाही दिख रही है, क्योंकि कोरोना काल में बंद हुए प्राईवेट स्कूलों के बच्चों को एक साल वर्ष बीत जाने के पश्चात् भी किसी अन्य स्कूलों में प्रवेश नहीं दिलाया गया और बच्चों का एक वर्ष बर्बाद हो गया, जिसको लेकर अब पालक जिला शिक्षा अधिकारी पर कार्यवाही की मांग कर रहे है और मामला पुलिस विभाग तक पंहुच चुका है। गौतम टेक्नो इंग्लिश मिडियम, मोहला जिला राजनांदगांव के संचालक विगत दो वर्ष से लापता है और स्कूल विगत दो वर्षो से बंद है। इसमें पढ़ने वाले 29 गरीब बच्चे जिन्हें शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत प्रवेश दिलाया गया था, वे विगत दो वर्ष से शिक्षा से वंचित है और शिक्षा पाने भटक रहे है। इस मामले की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव को भी दिया जा चुका है, लेकिन इन बच्चों को किसी भी अन्य स्कूल में विगत दो वर्षो में प्रवेश नहीं दिलाया गया। वैसा ही मामला ग्रीन फिल्ड सीआईटी स्कूल का भी है, जहां 60 गरीब बच्चे विगत 360 दिनों से निःशुल्क शिक्षा पाने भटक रहे और जिला शिक्षा अधिकारी के चक्कर काट रहे है।

    पालकों का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी अपने कर्त्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरत रहे है और उनके बच्चों का जीवन व भविष्य बर्बाद कर दिया गया, जिसको लेकर पालक अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर विचार कर रहे है। शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत प्राईवेट स्कूलों को आरक्षित सीटों की वास्ताविक जानकारी अपलोड करना था, लेकिन कुछ प्राईवेट स्कूलों ने कक्षा पहली की गलत जानकारी आरटीई वेब पोर्टल में अपलोड कर दिया जिससे कक्षा पहली की सीट कम हो गई।

    छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने बताया कि जिले में ऐसे 29 प्राईवेट विद्यालय है, जो सिर्फ नर्सरी कक्षा में ही एंट्री क्लास बताकर आरक्षित सीटों की जानकारी अपलोड किया है, जबकि इन स्कूलों में कक्षा पहली भी संचालित है और जिले में ऐसे 17 प्राईवेट विद्यालय है, जो सिर्फ कक्षा पहली में ही एंट्री क्लास बताकर आरक्षित सीटों की जानकारी अपलोड किया है, जबकि इन स्कूलों में कक्षा नर्सरी भी संचालित है। इन स्कूलों की जांच करने का आदेश उच्च कार्यालय से तीन बार दिया जा चुका है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने उच्च अधिकारियों के आदेश को ही दरकिनार कर आज तक जांच नहीं कराया, जिससे प्राईवेट स्कूलों को अनुचित लाभ मिल रहा है, जिसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं जिम्मेदार है।

    हेमंत वर्मा, राजनांदगांव- छत्तीसगढ़
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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