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    इंग्लिश फाॅर ऑल- ई-लर्निंग और ऑनलाइन एजुकेशन के अनेक दरवाजे खुले

    इंग्लिश फाॅर ऑल- ई-लर्निंग और ऑनलाइन एजुकेशन के अनेक दरवाजे खुले

    नई दिल्ली : मानव हमेशा आपदा में अवसर खोज लेता है। कोरोना महामारी के विकट संकटकाल में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कोरोना काल में जब सारे शिक्षामंदिरों के कपाट बंद हो गए| तब ई-लर्निंग और ऑनलाइन एजुकेशन के अनेक दरवाजे खुल गए। ऑनलाइन क्लास के जरिए अब सुदूर गांव देहात में बैठा व्यक्ति भी अंग्रजी में भाषा-कौशल हासिल कर सकता है जिससे उसको अपने व्यक्तित्व का विकास करने में मदद मिलने के साथ-साथ रोजगार व कमाई के अच्छे अवसर भी मिल सकते हैं। दिल्ली स्थित ब्रिटिश लिंग्वा ने भी समाज के कमजोर तबके को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को कायम रखते हुए दूरदराज के लोगों को आपदा में अवसर का लाभ मुहैया करवाने के लिए ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था की है। ब्रिटिश लिंग्वा ने एक ऐप विकसित किया है और आॅनलाइन इनटेरेक्टिव क्लास के जरिए देश के विभिन्न भागों में स्कूली बच्चों से लेकर पेशेवर और नौकरी की तलाश में जुटे युवा अंग्रेजी भाषा में दक्षता हासिल कर रहे हैं। सही मायने में आपदा ने जो अवसर दिए उससे ब्रिटिश लिंग्वा का नारा ’इंग्लिश फाॅर ऑल’ से अब पूरी दुनिया में पहुंच रहा है। 

    यह सब टेक्नोलोजी का कमाल है जो अप्रत्याशित तरीके से निरंतर बदल रहा है और जो सजग हैं वो नई टेक्नोलोजी का लाभ उठा रहे हैं। ब्रिटिश लिंग्वा न सिर्फ अंग्रेजी भाषा-कौशल हासिल करने में मदद कर रही है बल्कि नई टेक्नोलोजी का भरपूर फायदा उठाने के लिए लोगों को जागरूक भी कर रहा है। वर्तमान पीढ़ी काफी खुशकिस्मत है कि ग्लोबल विलेज की जो कल्पना कभी की गई थी वह सही मायने में इस जमाने में चरितार्थ हो रही है और नई पीढ़ी आधुनिक सुविधाओं व प्रौद्योगिकी का भरपूर फायदा उठा भी रहे हैं। ब्रिटिश लिंग्वा के इस ऑनलाइन क्लास में विभिन्न आयुवर्ग के लोगों के साथ अपने घरों से जुड़कर अंग्रेजी भाषा दक्षता बढ़ाने और व्यक्तित्व में निखार लाने का मौका मिलता है। इंग्लिश लर्निंग क्लास के साथ-साथ इनटेरेक्टिव क्लास का आयोजन किया जाता है जिसमें ग्रुप डिस्कशन और डिबेट के साथ-साथ प्रैक्टिस  सेशन भी शामिल है। 

    ब्रिटिश लिंग्वा द्वारा विकसित  इंग्लिश सीम यानी स्ट्रक्चरल कम इनटेरेक्टिव मेथड की चर्चा अब पूरी दुनिया में होने लगी है। समाज के कमजोर तबके को सबल बनाने के लिए एक मिशन के तौर पर काम करने के लिए 1993 में ब्रिटिश लिंग्वा की नींव रखने वाले डाॅ. बीरबल झा कहते हैं कि अंग्रेजी भाषा में दक्षता हासिल करने से सामाजिक व आर्थिक रूप से कमजोर लोग अपने व्यक्तित्व निखारकर  और अच्छी नौकरी व पेशा हासिल कर सकते हैं और  उनके जीवन-स्तर में बदलाव आ सकता है।

    विजय लक्ष्मी सिंह, एडिटर इन चीफ
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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