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    ग्रामीण अंचल में आवारा-छुट्टा पशुओं का आतंक तो शहरी क्षेत्र में बंदरों के आतंक से निजात की राह निहार रहे लोग

    ग्रामीण अंचल में आवारा-छुट्टा पशुओं का आतंक तो शहरी क्षेत्र में बंदरों के आतंक से निजात की राह निहार रहे  लोग

    अयोध्या - उत्तरप्रदेश : धर्मनगरी अयोध्या में आवारा एवं छुट्टा जानवरों से आम लोग परेशान हैं शहर से लेकर देहात तक इस तरह से परेशान हैं की मार्गों पर चलना दूभर है और खेतों की फसल को नुकसान कर रहे हैं। इतना ही नहीं अयोध्या फैजाबाद जुड़वा शहर में बंदरों का इतना आतंक है कि लोग घरों के अंदर रहने को मजबूर हैं।

    अयोध्या फैजाबाद शहर में कोई भी व्यक्ति धूप में कुछ रखकर सुखा नहीं सकता है अगर कुछ लेकर के हाथ में जा रहे हैं तो बंदर उसे छीन लेते हैं जिस कारण से लोगों का जीना दूभर हो गया है यदि कोई वैकल्पिक व्यवस्था इनके बारे में नहीं किया गया तो समस्या और बढ़ सकती है। लोगों का कहना है कि बंदरों से बचाव के लिए या तो इनकी उपयोगिता किया जाए या तो इन्हें कहीं दूर किया जाए जिस कारण यहां के लोग सुख और चैन की नींद ले सकें।

    यही हाल छुट्टा आवारा जानवरों का है सरकार इनसे बचाव के लिए कई प्रयास किए हैं किंतु बहुत कारगर सफल नहीं हो पा रहा है जो गौशाला ही बनाई गई है उनकी हालत आए दिन अखबारों और व्हाट्सएप ग्रुप पर देखने को मिलती है आखिर यह जानवर कहां जाएं। पहले गाय के बच्चों का बैल के रूप में प्रयोग किया जाता था जो अन्नदाता कहे जाते थे हल चलाने का काम कोई से पानी निकालने का काम बोझा ढोने का काम आज अनगिनत काम करते थे और किसान इन की खूब सेवा करता था खूब खिलाता पिलाता था किंतु समय के परिवर्तन के चलते अब धीरे-धीरे इनकी उपयोगिता खत्म हो गई किसान भी बैल से हल नहीं चलाता है कुवे से पानी बैल से नहीं निकालता है बोझा ढोने का काम बैल से नहीं करता है तो आखिर यह बैल जाएं तो जाएं कहां इनकी उपयोगिता सरकार को करना चाहिए जब इनकी उपयोगिता होने लगेगी तो इंसान इनकी सेवा भी करेगा।

    बीकापुर कोतवाली परिसर के सामने छुट्टा पशुओं का बसेरा बना हुआ है। कोतवाली के गेट से लेकर पूरे परिसर में छुटटा पशु मौजूद रहते हैं जो पुलिसकर्मियों और कोतवाली में आने वाले फरियादियों के लिए असुविधा पैदा करते हैं। छुट्टा पशुओं से हमेशा भय बना रहता है कि पता नहीं कब हमला करके घायल कर दें। जिसके चलते कोतवाली आने वाले फरियादियों को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। लोगों का कहना है कि बीकापुर बाजार और आसपास घूमकर छुट्टा पशुओं का झुंड कोतवाली में पहुंच जाता है और डेरा जमा लेता है। कोतवाली परिसर में रोपित  पौधों को भी छुट्टा पशु बर्बाद कर देते हैं।   छुट्टा पशुओं की रोकथाम और कोतवाली परिसर में प्रवेश रोकने के लिए  होमगार्ड जवानों और पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया गया था जिससे  छुट्टा पशुओ का प्रवेश कम हो गया था। लेकिन इधर कुछ समय से फिर समस्या पैदा हो गई है। नगर पंचायत में अस्थाई गौशाला का संचालन किया जा रहा है। लेकिन बीकापुर बाजार में काफी संख्या में मौजूद छुट्टा पशुओं को गौशाला में ले जाने के लिए नगर पंचायत द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही है। समाज के जागरूक लोगों द्वारा छुट्टा पशुओं को गौशाला में भिजवाने की मांग की है।

    देव बक्श वर्मा, अयोध्या - उत्तरप्रदेश
    INA NEWS(Initiate News Agency) 

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