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    शहीद मेजर अक्षय गिरीश कुमार की माँ मेघना गिरीश ने आईआईटी कानपुर के प्रथम वर्ष के छात्रों को किया संबोधित

    शहीद मेजर अक्षय गिरीश कुमार की माँ मेघना गिरीश ने आईआईटी कानपुर के प्रथम वर्ष के छात्रों को किया संबोधित

    ●मेघना गिरीश ने मेजर अक्षय के जीवन से आईआईटी कानपुर के युवा दिमाग को प्रेरित करने के लिए कई उदाहरण दिए

    कानपुर- उत्तरप्रदेश : प्रेरक व्याख्यानों की श्रृंखला में मेघना गिरीश ने आईआईटी कानपुर के प्रथम वर्ष के छात्रों को संबोधित किया| जिन्हें गर्व से "शहीद मेजर अक्षय गिरीश कुमार की माँ" के रूप में जाना जाता है| जिन्होंने 29 नवंबर 2016 को राष्ट्र के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया और वह अपने पीछे पिता, माँ, पत्नी और एक बेटी को छोड़ गये। आईआईटी कानपुर में एनसीसी प्रभारी-अधिकारी कर्नल अशोक मोर ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया और मेघना गिरीश के बारे में छात्र-छात्राओं परिचय दिया। छात्रों को अपने संबोधन में मेघना गिरीश ने मेजर अक्षय के जीवन से आईआईटी कानपुर के युवा दिमाग को प्रेरित करने के लिए कई उदाहरण दिए। गिरीश ने कहा, "वह समय 22 वर्ष पहले कारगिल युद्ध था। अक्षय 13 साल के थे। हमारे रिश्तेदार कई पेशों के कार्यरत हैं, लेकिन उसके बावजूद, अक्षय हमेशा अपने पिता और दादा की तरह वर्दी पहनना चाहते थे।

    जैसे ही अक्षय स्कूल से आता, वह टीवी चालू कर देता और कारगिल युद्ध के बारे में अपडेट प्राप्त करता क्योंकि मीडिया इसे बड़े पैमाने पर कवर कर रहा था। उनके जीवन की इस घटना ने वास्तव में सेना में शामिल होने की उनकी बचपन की महत्वाकांक्षा को प्रेरित और मजबूत किया। वह अपने तय रास्ते पर चलते हुए तकनीकी योद्धा इंजीनियर रेजिमेंट में शामिल हुए। उन्होंने अपने नौ साल की सेवा काल में चीन सीमा के साथ नागालैंड, कुपवाड़ा, तंगधार जैसे कई परिचालन क्षेत्रों में 19000 फीट की ऊंचाई पर सेवावें दीं। मेघना गिरीश ने छात्रों को उनके जीवन के बारे में तीन कहानियां सुनाई । पहली,जब अक्षय और उनकी जुड़वां बहन चौथी कक्षा में थे, तब उनमें सही और गलत का भाव था। कक्षा में एक शिक्षक ने एक लड़की को छोटी स्कर्ट के लिए डांटा, इस टिप्पणी के साथ कि "लड़कियां जैसे-जैसे बड़ी होती जाती हैं, उनकी स्कर्ट की लम्बाई छोटी होती जाती है"। अक्षय ने उठकर अपने शिक्षक से कहा "आप गलत बोल रहे हैं आप को ऐसी बात नई करनी चाहिए", हलाकि वो काफी सहम गया था, लेकिन उसने वही कहा जो उसे सही लगा।

    दूसरी कहानी उनके युवा दिनों की है। उसके दोस्त किसी पब में जाने की योजना बनाते थे या ड्रिंक आदि के लिए तथाकथित जगह पर जाते थे। वह शराब नहीं पीता था ताकि वह अपने दोस्तों को सुरक्षित घर वापस ले जा सके।तीसरी कहानी, दुश्मन या आतंकवादियों के सामने अपने आदमियों को प्रेरित करने की उनकी क्षमता के बारे में है। 19000 फीट पर एक ऐसा माहौल जब आप और आपके जवान चीन की सीमा पर देश के लिए काम कर रहे हों और बंकर बना रहे हों। जब उनकी टीम ने छह महीने पहले काम पूरा किया तो उन्होंने कहा कि आज वह उनके लिए खाना बनाएंगे और उन्होंने उनके लिए बिरयानी बनाई। उनकी कंपनी के सभी सैनिक वास्तव में उन्हें पसंद करते थे क्योंकि वे हमेशा उनसे जुड़ी छोटी छोटी बातों के बारे में चिंता करते थे। जब उन्होंने नगरोटा छावनी में जैश-ए-मोहम्मद के हमले के खिलाफ अपनी त्वरित प्रतिक्रिया टीम का नेतृत्व करने का आह्वान किया, तो उन्होंने एक भी कदम पीछे नहीं लिया और सुनिश्चित किया कि सभी आतंकवादी मारे जायें, कोई बंधक नहीं बनाया जाये और उनके लोग यथासंभव सुरक्षित लौट आयें।

    मेघना गिरीश ने  कहा कि, दर्द और गम में हम अक्षय को मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। उनके लिए तीन चीजें सबसे ज्यादा मायने रखती थीं। अपने स्वयं के सपनों और आकांक्षाओं को पूरे प्रयास और ईमानदारी के साथ पूरा किया जाना चाहिए। आप जहां जाना चाहते हैं और उस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए हमेशा सम्पूर्ण प्रयास करें , अपने लक्ष्य पर से कभी भी फोकस न छोड़ें। आपके जीवन में लोग आपके अहंकार या आपकी महत्वाकांक्षा से कहीं अधिक मायने रखते हैं। खुश रहो, मुस्कराते रहो, लोगों को साथ लेकर चलो। उन लोगों की मदद करें जो संघर्ष कर रहे हैं। आखिरी में उन्होंने कहा कि, देश हर बार हमेशा पहले आता है। इस देश ने आपको बहुत कुछ दिया है तो अपने देश को वापस देना कभी न भूलें, जो भी आप कर सकते हैं।

    हमारे दुख के शुरुआती दिनों में जब उन्होंने हमें छोड़ दिया तो हमने सोचा कि हमें क्या करना चाहिए। हमने सोचा था कि अक्षय जो करना चाहते होंगे उसे वो अब चाहते हैं कि हम करें। वह चाहते थे कि सेवा की विरासत जारी रहे। युवाओं और समाज की भलाई जारी रहनी चाहिए। चूंकि हमारे परिवार से लगभग 18 लोग रक्षा बलों में हैं, इसलिए हमारी ताकत युवाओं को रक्षा बलों की ओर प्रेरित करने में थी। हमने सोचा कि इससे हम समाज को कुछ वापस दे सकते हैं। इसी उद्देश्य के साथ हमने मेजर अक्षय गिरीश मेमोरियल ट्रस्ट की शुरुआत की और हम अक्षय और उनके सपनों के साथ फिर से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बहुत से छात्र इससे लाभान्वित हुए हैं और रक्षा बलों में शामिल हुए हैं। उन्होंने छात्रों से एसएसबी में शामिल होने के लिए खुद को चुनौती देने के लिए कहा, भले ही वे रक्षा बलों में शामिल नहीं होना चाहते हों। उन्होंने अक्षय की एक कविता के साथ अपने व्याखान को समाप्त किया ... सबसे बड़ी लड़ाई भीतर है।

    इब्ने हसन जैदी, कानपुर- उत्तरप्रदेश
    INA NEWS(Initiate News Agency) 

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