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    छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी गोधन न्याय योजना कागजों में सफल - आशीष डोंगरे

    छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी गोधन न्याय योजना कागजों में  सफल - आशीष डोंगरे

    राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी योजना इतनी तेजी से राज्य में किसानों को उन्नति के साथ भूमि की उर्वरक शक्ति के लिए कंपोस्ट वर्मी खाद के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर उन्नत किसान बनाने का सरकार ने बीड़ा उठाई है, वह सपना सकार होने के बजाय सरकार की सपना सिर्फ कागजों में ही वर्मी कंपोस्ट खाद बनाए जा रहे हैं, क्योंकि राजनांदगांव शहर में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत पशुपालकों व डेयरी व्यवसाय करने वालों से नगर पालिक निगम गोबर खरीद रहे हैं, लेकिन गोबर खरीदी के बाद वर्मी कंपोस्ट खाद्य बनाने का सपना सिर्फ दिखावा ही रह गए हैं, क्योंकि जितनी गोबर खरीदी किए जा रहे हैं, उससे 25 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट तैयार नहीं कर पा रहे हैं, इससे साफ जाहिर होता है, छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी गोधन न्याय योजना सिर्फ कागजों पर ही सफल है, धरातल पर शुन्य है, नगर पालिक निगम को कोई मतलब नहीं है, लाखों करोड़ों रुपए का गोबर खरीदना ही सिर्फ मुख्य उद्देश्य है, लखोली वार्ड नंबर 36 के पार्षद प्रतिनिधि एवं भारतीय जनता पार्टी युवा नेता आशीष डोगरे ने लखोली मे गोबर खरीदी केन्द्र गौठान में गोधन न्याय योजना की स्थिति से रूबरू होते हुऐ बताया कि लखोली गौठान मे भारी मात्रा में गोबर ढेर है, लेकिन उसका उठाव परिवहन की व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण लाखों रुपए की गोबर सूख रहे हैं, जो वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए भी काम नहीं आने वाले हैं, सिर्फ गोबर से छेना व गोबर की लकड़ी बनाए जा रहे हैं, जो गोधन न्याय योजना के नियम में ही नहीं है, सिर्फ शासन की मंशा है, गिला गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना है,  लेकिन गोबर का दुरुपयोग करते हुए वर्मी कंपोस्ट खाद्य ना बनाकर छेना कंडा और गोबर से लकड़ी बनाकर गोबर का दुरुपयोग किए जा रहे हैं, गोबर पूरी तरह सूख जाने के बाद शासन की मंशा के अनुरूप वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना नगर पालिक निगम की बस बात नहीं है।

    डोंगरे ने आगे बताया कि बारिश के पूर्व गोबर की उठाव नहीं करते हैं, तो गोबर खरीदी केंद्र के आसपास रहवासी लोग गंदगी बदबू व अन्य जानलेवा बीमारी व मच्छर से परेशान हो जाएंगे और लाखों रुपए का गोबर अनुपयोगी साबित होते हुए बारिश में बह जाएंगे कौन है जिम्मेदार ? शहर में जितनी भी जगह गोबर खरीदी केंद्र बनाया गया है, वहां भारी मात्रा में गोबर ढेर बने हुऐ है, ना कोई उठाव हो रहा है, सिर्फ नगर पालिक निगम बारिश होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि लाखों रुपए गोबर खरीदी पानी में बह जाऐ और गोबर की हिसाब शासन को भी देना ना पड़े इसलिए जानबूझकर गोबर उठाने में कोई रुचि नहीं ले रहे है, नगर पालिक निगम सिर्फ कागजों में वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने का ढोग व दिखावा कर रहे हैं, क्योंकि गोबर खरीदी का कोई मापदंड न कोई नियम सिर्फ गोबर खरीदना ही नगर पालिक निगम का मुख्य उद्देश्य है, उन्होंने जिला प्रशासन और निगम प्रशासन के संज्ञान में लाते हुए बताया अगर शहरी क्षेत्र के गोबर बेचने वाले हितग्राहियों के आधार कार्ड बैंक पासबुक के साथ पशु संख्या सत्यापन करते हैं, तो लापरवाही फर्जीवाड़ा भी सामने आ सकते हैं, तथा बारिश के पूर्व सभी गोबर खरीदी केंद्रों गौठानो से गोबर उठाने की व्यवस्था समय रहते नहीं कर पाते तो बरसात में गोबर उठना संभव नहीं है, और लाखों करोडो रुपए की गोबर पानी में बह जाएगा इसके लिए नगर पालिक निगम के अधिकारी पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं, जो पानी में गोबर बह जाने का इंतजार कर रहे हैं।

    हेमंत वर्मा, राजनांदगांव- छत्तीसगढ़
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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