Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा - शिव वर्मा

    श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा - शिव वर्मा 

    राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ : जिला भाजपा पिछड़ा वर्ग के जिलाध्यक्ष पार्षद दल के प्रवक्ता शिव वर्मा ने कहा कि। श्याम प्रसाद मुखर्जी क्या बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत की आधारशिला रखने वाली विभूतियों मे महान देशभक्त शिक्षाविद चिंतक कुशल राजनेता एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अपनी अलग पहचान है। 6 जुलाई सन 1901को  बंगाल में आशुतोष मुखर्जी के घर जन्मे शिशु के ग्रह लग्न देख किसी ज्योतिषी ने विश्वास पूर्वक कहा था। सर आशुतोष मुखर्जी आपका यह पुत्र अत्यंत विलक्षण और सौभाग्यशाली है। यह महान देशभक्त युग प्रवर्तक समाजसेवी शिक्षाविद तथा गणितज्ञ होगा। इतिहास साक्षी है की ज्योतिषी की भविष्यवाणी अक्षरस सत्य सिद्ध हुई। 15 वर्ष की आयु में हाई स्कूल शिक्षा प्राप्त करते समय एक निर्धन सहपाठी के परीक्षा शुल्क पटाने की असमर्थता को लेकर प्रधान पाठक से बहस करके शुल्क माफ करना उनके अदम्य सहस एवं परोपकारिता का परिचायक है।

    इंग्लैंड में बैरिस्टरी की शिक्षा प्राप्त करने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट में वकालत के साथ-साथ विश्वविद्यालय में अध्यापन भी करते थे उनकी ख्याति और उपलब्धियों को मान्यता मिली तथा मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने सन 1934 में कोलकाता विश्वविद्यालय का उप कुलपति बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सैनिक शिक्षा, स्त्री शिक्षा, प्रशिक्षण एवं सिविल सेवा परीक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए। पांडिचेरी में अरविंद विश्वविद्यालय की स्थापना में उनका विशेष योगदान रहा सन 1938 में कोलकाता विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डि, लिट, की उपाधि से सम्मानित किया गया। राजनीति में प्रवेश के पूर्व देश सेवा के प्रति आसक्ति की झलक उनकी डायरी में लिखे गए इन अधिकारों से मिलती है। सन 1936 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय हुए तथा विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए। बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदुओं पर अमानुषिक अत्याचार देख डॉक्टर मुखर्जी हिंदू महासभा से जुड़ गए। वीर सावरकर की विचारधारा से प्रभावित होकर वे भारतीय पोशाक सिद्धांतों के प्रबल समर्थक हो गए। प्रभावशाली भूमिका के कारण उन्हें हिंदू महासभा के प्रधान के पद पर चुन लिया गया। डॉक्टर मुखर्जी 15 अगस्त सन 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में वाणिज्य मंत्री बने। इस पद पर रहते उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। पंडित जवाहरलाल नेहरू से वैचारिक मतभेद होने पर उन्होंने अप्रैल 1950 में मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहायता से सन 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की लोकसभा तथा विधानसभा के लिए 742 प्रतिनिधि खड़े किए तथा 33 सदस्य निर्वाचित हुए। डॉक्टर मुखर्जी भारी मतों से लोकसभा सदस्य चुने गए। जिस प्रकार हैदराबाद, जूनागढ़ जैसे रजवाड़ों को भारत में विलय करने का श्रेय सरदार पटेल को है उसी प्रकार पश्चिम बंगाल को भारत में विलय का श्रेय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को है। स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान तथा कश्मीर में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का वे लगातार विरोध करते रहे। इसी के कारण परिणाम स्वरूप उन्हें 1953 में जम्मू कश्मीर सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। जेल उनकी तबीयत खराब हो गई हॉट चार-पांच दिन की बीमारी के बाद 23जून। 1953 की रात्रि उनका देहांत हो गया। अपार संपदा, सुख सुविधा के सभी साधन उपलब्ध होते हुए भी उन्होंने सादगी पूर्ण जीवन बिताया। दया, मानवता, परोपकार, सेवा और सद्भावना से परिपूर्ण संयमित जीवन बिताते हुए आजीवन भौतिक प्रपंच एवं आडंबरो से दूर । ऐसे निष्काम देशभक्त राजनीतिज्ञों कि आज ही देश को आवश्यकता है। श्री वर्मा ने कहा कि ऐसे महान देशभक्त राष्ट्र सेवक जो देश के लिए बलिदान हुए हैं उनकी बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। तथा उनके अधूरे कामों को और बताए हुए मार्ग पर चलकर राष्ट्र निर्माण में हम सब सहभागी बनेंगे।

    हेमंत वर्मा, राजनांदगांव- छत्तीसगढ़
    INA NEWS(Initiate News Agency)

    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.