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    मलेरिया से बचाव के लिए 63 गांव का चयन, मलेरिया संक्रमण की दर में निरंतर गिरावट

    मलेरिया से बचाव के लिए 63 गांव का चयन, मलेरिया संक्रमण की दर में निरंतर गिरावट

    लार्वा की जांच के लिए घर-घर सर्वे, गांव-गांव में किया जाएगा टेमीफास का छिड़काव

    कवर्धा/राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ : मलेरिया रोधी माह के अंतर्गत मलेरिया, डेंगू एवं मच्छरों से होने वाले अन्य रोगों की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन के दिशा-निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि, मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत जिले में दो ब्लाक के कुल 63 गांव का चयन किया गया है। चयनित गांवों में मलेरिया व डेंगू समेत अन्य मौसमी व संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक उपाय किए जा रहे हैं।

    मच्छरों से होने वाले रोगों से लोगों को बचाया जा सके, इस उद्देश्य से जिले के प्रत्येक गांव में मच्छर रोधी दवा छिड़काव का किया जा रहा है। बरसात के मौसम में ज्यादा फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम करने हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार मंडल के निर्देशन में जून माह को जिले में मलेरिया रोधी माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिलेभर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रोगों से बचाव हेतु जन-जागरुकता के लिए बैनर-पोस्टर व होर्डिंग्स लगाए गए हैं। मलेरिया रोधी माह के संबंध में लोगों को स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करने पर जोर देते हुए सीएमएचओ डॉ. मंडल ने बताया, मलेरिया तथा डेंगू से बचाव के लिए शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में सोर्स रिडक्शन एक्टीविटी संपादित की जा रही है। इसके तहत मलेरिया व डेंगू संक्रमण के मद्देनजर संवेदनशील वार्डों एवं अन्य समस्त शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर टेमीफास का छिड़काव भी किया जाएगा। मलेरिया रोधी कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन को भी शामिल किया गया है। विभिन्न स्थानों पर वह गृह भेंटकर विभिन्न प्रचार माध्यमों से लोगों को मलेरिया व डेंगू की रोकथाम तथा इससे बचाव के तरीके बता रही हैं। साथ ही पाम्पलेट वितरण किया जा रहा है। मलेरिया व डेंगू के संभावित प्रकरण पाए जाने पर आवश्यक उपचार प्रदान किया जा रहा है।

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    शुभ संकेत है मलेरिया की यह दर..

    सीएमएचओ व जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. मंडल ने बताया, मलेरिया की रोकथाम हेतु जिले में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके परिणाम स्वरूप मलेरिया संक्रमण की गति साल दर साल धीमी हो रही है। जिले में क्रमशः वर्ष 2018 में 949, 2019 में 461 तथा 2020 में 136 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि जिले में मलेरिया संक्रमण की दर निरंतर जिले में निचले स्तर पर जा रही है, जो एक अच्छा संकेत है। उन्होंने बताया, मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत इस साल कुल 63 गांव का चयन किया गया है। इसमें बोड़ला ब्लाक के 53 तथा पंडरिया ब्लाक के 10 गांव हैं। इन गांवों में सभी लोगों की मलेरिया जांच की जा रही है तथा गांवों में मच्छरदानी वितरण भी किया जा रहा है। इतना ही नहीं, लोग मच्छरदानी का उपयोग करते हैं या नहीं, इसकी भी मानिटरिंग की जाती है। घर-घर सर्वे के माध्यम से जमा पानी तथा इसमें पनपने वाले लार्वा की जांच कराई जाती है। वहीं मलेरिया से बचाव हेतु जन-जागरूकता का संचार करने क्षेत्र के संबंधित आरएचओ, सेक्टर सुपरवाइजर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके अलावा मलेरिया के मद्देनजर अन्य सभी संवेदनशील गांवों पर सतत नजर रखी जा रही है।

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    मौसमी रोगों से बचाव के उपाय..

    स्वास्थ्य विभाग की ओर से अपील भी की जा रही है कि बाहर से आने वाले आम जनमानस बुखार से संबंधित कोई भी शिकायत होने पर तुरंत निकट के स्वास्थ्य केन्द्र में जांच करवाएं। मलेरिया व डेंगू रोग की रोकथाम तथा इससे बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें। घरों के आसपास सफाई रखें। डेंगू तथा मलेरिया के मच्छरों की उत्पत्ति के कारक जैसे कूलर व पानी की खुली टंकियों की नियमित सफाई करें। फटे-पुराने टायर-ट्यूब, टूटे-फूटे मटके, बाल्टी, टीन एवं प्लास्टिक के डिब्बे जैसे कबाड़ घर पर न रखें। घर के सजावटी गमलों, मनी प्लांट के पौट, फ्रीज के नीचे ट्रे जैसे सामानों पर पानी जमा न होने दें। मच्छर उत्पत्ति के ऐसे कारकों की नियमित देख-रेख करने से डेंगू व मलेरिया रोग से बचा जा सकता है।

    हेमंत वर्मा, राजनांदगांव- छत्तीसगढ़
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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