Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    देवबंद:जमीयत उलमा.ए.हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद कारी सैयद उस्मान मंसूरपुरी का कोरोना संक्रमण के चलते इंतकाल

    देवबंद: इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम व जमीयत उलमा.ए.हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद कारी उस्मान मंसूरपुरी का कोरोना संक्रमण के चलते इंतकाल हो गया। वह 77 वर्ष के थे। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शुक्रवार को आखिरी सांस ली। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक जगत और देश दुनिया में उनके लाखों चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई।

    मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी पिछले करीब 15 दिनों से बीमार थे। छह मई को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बुधवार को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर डाक्टरों से परामर्श के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर उनका इंतकाल हो गया। हालांकि बृहस्पतिवार को उनकी कोरोना रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई थी। लेकिन फेफड़ों में इंफेक्शन और गुर्दों में अधिक खराबी होने के चलते उनका इंतकाल हो गया। जनपद मुजफ्फरनगर के कस्बा मंसूरपुर में 12 अगस्त 1944 को अमीरुल हिंद रहे मौलाना कारी उस्मान का जन्म हुआ था। उन्होंने 40 साल तक दारुल उलूम में शिक्षा के साथ साथ अन्य सेवाएं भी दीं। 14 अक्तूबर 2020 को मजलिए.ए.शूरा की बैठक में उन्हें संस्था का कार्यवाहक मोहतमिम चुना गया था। जमीयत में बंटवारे होने के बाद 5 अप्रैल 2008 को मौलाना महमूद मदनी गुट ने कारी उस्मान मंसूरपुरी को निर्विवाद अध्यक्ष चुना था।

    मौलाना सैयद कारी उस्मान 2008 में बने थे जमीयत अध्यक्ष

    देवबंद:दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना कारी सैयद उस्मान मंसूरपुरी आश्चर्यजनक घटनाक्रम के बाद वर्ष 2008 में जमीयत उलमा.ए.हिंद के अध्यक्ष चुने गए थे।

    चाचा मौलाना अरशद मदनी और भतीजे मौलाना महमूद मदनी के बीच जमीयत संगठन दो गुटों में विभाजित हुआ था। मौलाना अरशद मदनी ने पुराने स्थान को बदलने के लिए एक नई कार्यकारी परिषद का गठन करने के लिए कदम उठाए। जिसके बाद यह लड़ाई बढ़ती गई और मामला अदालत तक जा पहुंचा था। जमीयत पर कब्जे की लड़ाई में संगठन दो गुटों में बंट गया। जिसमें एक गुट के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी तो दूसरे गुट में भतीजे मौलाना महमूद मदनी ने 5 अप्रैल 2008 को कारी उस्मान मंसूरपुरी को अध्यक्ष बनाया था।

    2010 में अमीर.उल.हिंद बनाए गए थे कारी उस्मान

    देवबंद। जनपद मुजफ्फरनगर के कस्बा मंसूरपुर में 12 अगस्त 1944 को मोण् ईसा के घर जन्मे कारी उस्मान ने वर्ष 1965 में दारुल उलूम में पढ़ाई के दौरान दौर.ए.हदीस कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। जिसके बाद से वह लगातार दारुल उलूम में अपनी सेवाएं देते रहे। वर्ष 2010 में दारुल उलूम के मोहतमिम रहे मौलाना मरगूबुर्रहमान के इंतकाल के बाद मौलाना सैयद कारी उस्मान मंसूरपुरी को अमीर.उल.हिंद बनाया गया था।

    कार्यवाहक मोहतमिम बनने के बाद इस्लाही मुआशरा का अभियान शुरु किया

    देवबंद। समाज में तेजी के साथ फैल रही कुरीतियों को दूर करने के लिए कारी उस्मान मंसूरपुरी ने दारुल उलूम का कार्यवाहक मोहतमिम बनने के तुरंत बाद इस्लाही मुआशरा यसमाज सुधारद्ध अभियान को शुरु किया था। जिसके चलते उन्होंने संस्था के सभी उस्तादों को अलग अलग स्थानों पर जाकर समाज सुधार के लिए काम करने की हिदायत दी। इसके साथ ही सोशल मीडिया सेल का गठन भी किया था। इसके साथ ही संस्था ने उन्हें तहाफ्फुज खत्म.ए.नबुअत का नाजिम यप्रभारीद्ध भी बनाया था।

    कारी उस्मान के इंतकाल पर इन्होंने जताया शोक

    देवबंद। दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानीए नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासीए जमीयत उलमा.ए.हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनीए महासचिव मौलाना महमूद मदनीए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसनी नदवीए दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमीए नायब मोहतमिम मौलाना शकेब कासमीए मौलाना मेहंदी हसन एनी कासमीए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता साद सिद्दीकीए पूर्व विधायक माविया अलीए सैयद मोनिसए मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसरए आरिफ अंसारीए सामाजिक संस्था नजर के अध्यक्ष नजम उस्मानीए कारी इस्हाक गोराए शायर डाण्नवाज देवबंदीए सांसद हाजी फजलुर्रहमानए मुस्लिम फंड देवबंद के मैनेजर सुहैल सिद्दीकीए जामा मस्जिद सहारनपुर के मैनेजर मौलाना फरीद मजाहिरीए हकीम सिराजुद्दीन हाशमी आदि ने कारी उस्मान के इंतकाल पर दुख जताते हुए उनके दुनिया से चले जाने को मिल्लत.ए.इस्लामिया और मदारिस के लिए बडा नुकसान बताया।

    अनुशासन और नरम लहजे के लिए जाने जाते थे कारी उस्मान  

    देवबंद। मौलाना कारी सैयद उस्मान मंसूरपुरी अनुशासन और नरम लहजे के लिए जाने जाते थे। बेहद हल्की आवाज में बात करना उनके स्वभाव था। खुद अनुशासन में रहना और दूसरों को भी अनुशासन का पाठ पढ़ाना उनकी आदत में शुमार था। कक्षा के समय से पांच मिनट पहले ही उनके पहुंच जाने के चलते छात्र भी उन्हें बहुत पसंद करते थे। देश और दुनिया में उनके लाखों चाहने वाले हैं। जो उनके इंतकाल की खबर से बेहद गमजदा हैं और वे फोन कर उनके बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं।    

    कारी उस्मान की सदारत में देवबंद से उठी थी आतंकवाद के खिलाफ आवाज

    देवबंद: वर्ष 2008 में जमीयत उलमा.ए.हिंद के अध्यक्ष बनने के बाद मौलाना कारी सैयद उस्मान मंसूरपुरी की सदारत में देवबंद की सरजमीन से पहली बार आतंकवाद के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज बुलंद हुई थी।

    जमीयत उलमा.ए.हिंद के बागडोर हाथों में आने के बाद वर्ष 2008 में जमीयत के बैनर तले और कारी उस्मान की सदारत में देवबंद में आतंकवाद विरोधी कांफ्रेंस का आयोजन हुआ था। मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी सहित राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी व अन्य उलमा ने आतंकवाद के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज को बुलंद किया था। इसमें आतंकवाद के खिलाफ फतवा भी जारी किया गया था। जमीयत की आतंक विरोधी कांफ्रेंस से बौखलाफ एक आतंकी संगठन ने मौलाना महमूद मदनी को धमकी तक दे डाली थी। इसमें मौलाना सैयद कारी उस्मान मंसूरपुरी ने कहा था की आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता। इसलिए जमीयत उलमा आतंकवाद की मुखालिफत करता है। जमीयत की यह कांफ्रेंस पूरी दुनिया में चर्चा की विषय बनी थी।

    एक माह के भीतर दारुल उलूम को चैथा बड़ा झटका लगा

    देवबंद: इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम को कारी उस्मान के इंतकाल के साथ ही एक माह के भीतर चैथा बड़ा झटका लगा है। इससे पूर्व संस्था से जुड़े तीन ओर उस्तादों की मौत हो चुकी है। जो संस्था और इस्लामी जगत के लिए बड़ा नुकसान है।

    4 मई को दारुल उलूम के उस्ताद व संस्था से प्रकाशित होने वाली अरबी मैगजीन के संपादक मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का इंतकाल हुआ। ठीक उसके अगले दिन 5 मई को फारसी विषय के उस्ताद मौलाना कासिम मेरठी की मौत हो गई। 13 मई को संस्था के उस्ताद.ए.हदीस मौलाना हबीबुर्रहमान का इंतकाल हुआ और 21 मई को कारी उस्मान के इंतकाल से दारुल उलूम प्रबंधतंत्र को बड़ा झटका लगा है।


    शिब्ली इक़बाल 

    Initiate News Agency(INA), देवबंद 

    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.