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    देवबंद। मानवीय सहानुभूति, एकता और प्रार्थना भारत को बचाएगी: अशरफ

     दारूलउलूम अशरफिया में आयोजित कार्यक्रम में बोलते मौलाना सालिम



    देवबंद। दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना सालिम अशऱफ कासमी ने कहा कि कुरआन यह आदेश देता है कि मनुष्य के साथ कोई घृणा, पक्षपात, संप्रदायवाद, झूठ, विश्वासघात और क्रूरता नहीं होनी चाहिए। ऐसे समय में जब देश भयावह स्थिति से गुजर रहा है, और लोग पेड़ से गिरने वाले पत्ते की तरह मर रहे हैं। मानवीय सहानुभूति, एकता और प्रार्थना ही भारत को बचा सकती है।  

    रविवार की देर रात्रि मस्जिद खलीलुल्लाह में तरावीह में कुरआन पाक मुकम्मल होने पर आयोजित कार्यक्रम में मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने कहा कि मुल्क में तेजी के साथ फैल रही महामारी को खत्म करने के लिए रमजान के महीने में अल्लाह से रो-रोकर अपने गुनाहों की तौबा करें। क्योंकि हदीस में है कि अल्लाह तौबा करने वाले को पसंद करता है और अपने बंदों को माफ करता है। मौलाना मुफ्ती कामिल ने कहा कि महामारी को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों से तरह तरह की तस्वीरें आ रही हैं। जिनसे यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि काश यह भाईचारे और एकजुटता की तस्वीरें आम दिनों की होतीं। इसलिए सभी को चाहिए कि वे हर लड़ाई और मनमुटाव को भूलकर सिर्फ इंसानियत और भाईचारे का पैगाम दें। अंत में मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने मुल्क में फैली महामारी के खात्मे, आपसी सौहार्द के लिए दुआ कराई। इसमें सामाजिक संस्था नजर के अध्यक्ष नजम उस्मानी, ताहिर हसन शिबली, शाहनवाज उस्मानी, अब्दुल माजिद, कारी अब्दुल मतीन, अब्दुल मन्नान, कोकब, मौलाना शाहआलम, उबैद-उर-रहमान, हाजी जमीर आदि मौजूद रहे।


    शिब्ली इक़बाल 

    Initiate News Agency(INA), देवबंद 

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