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    वनांचल एवं मैदानी भागों में बेखौफ अवैध रूप से ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है

    वनांचल एवं मैदानी भागों में बेखौफ अवैध रूप से ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है

    • इन सबको राजस्व और खनिज विभाग की खुली छूट मिली हुई है
    • जिसके कारण वर्षों से ईंट भट्ठा संचालित कर  व्यापार कर रहे हैं
    • ईट भट्ठा संचालन कर लोग पर्यावरण को नुकसान तो पहुंचा ही रहे हैं

    साल्हेवारा/राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ : साथ ही हर वर्ष वन विभाग राजस्व और खनिज विभाग को भी लाखों रुपये का चूना लगा रहे है| ईंट भट्ठों के मालिक, व जंगल की बेशकीमती लकड़ियों ईंट भठ्ठो में को झोंक रहे है | वनांचल एवं मैदानी भागों में बेखौफ अवैध रूप से ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। इन सबको राजस्व और खनिज विभाग की खुली छूट मिली हुई है। इसके कारण वर्षों से ईंट भट्ठा संचालित कर रहे हैं। ईट भट्ठा संचालन कर लोग पर्यावरण को नुकसान तो पहुंचा ही रहे हैं। साथ ही हर वर्ष वन विभाग व राजस्व, खनिज विभाग को भी लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं। ईंट निर्माण के लिए भूमि का कटाव से लेकर जंगलों से लकड़ी की कटाई कर पर्यावरण को काफी हद तक नुकसान पहुंचा रहे हैं। 

    शासन को इससे लाखों रुपये के राजस्व की हानि हर वर्ष हो रही हैं। ईंट भट्ठा संचालित करने वाले के खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण से इन ईंट भट्टे के ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। सहसपुर लोहारा विकासखंड में अधिकांश अवैध लाल ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। जिससे इस क्षेत्र के अवैध ईंट भट्ठों के संचालक बेधड़क इस कारोबार को मोटी कमाई का जरिया बनाकर अंजाम दे रहे हैं। 

     जहां ऊंची दामों पर उन हितग्राहियों को ईंट भट्टे के ठेकेदार ईंट की सप्लाई कर रहे हैं। लोग मजबूरी में अधिक दामों पर लाल ईंटों को खरीद कर अपने भवन निर्माण आदि कार्यो में लगा रहे हैं। गांव-गांव में अवैध रूप से ईंट भट्टे का संचालन किया जा रहा है। ऐसे अवैध ईंट भट्ठा संचालन करने वाले ठेकेदारों के विरूद्घ ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए। नदी किनारे व तालाब किनारे अवैध रूप से ईंट भट्टे के संचालन करने वालों को आसानी से मिट्टी और पानी बड़ी तादाद में इन्हें उपलब्ध हो जाता है।व जंगल क्षेत्र होने से लकड़ियाँ भी,ट्यूबेल के माध्यम से हजारों लीटर पानी इन ईंट भट्ठों में खपाया जा रहा है। इसके कारण से गांव-गांव में जलस्तर भी कम हो गया है। 

    इन सब की जानकारी होते हुए भी राजस्व,वन विभाग व खनिज विभाग खामोश बैठा हुआ है। ईंट भट्ठा संचालकों पर किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई ना होना सवालिया निशान खड़ा करता है। विकासखंड सहसपुर लोहरा के जरहा नवगांव,खारा, रेगाखार, में बड़ी तादात में लाखों की संख्या में ईंटों का निर्माण कर ईंट भट्टे का संचालन किया जा रहा है वन परिक्षेत्र की बीट के अंदर के भाग में व बाहर भी।

    ऐसे ईंट भट्टा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग ग्रामीणों ने समय समय पर जिला प्रशासन से की है  लेकिन आज तक कोई कार्रवाई होते देखी सुनी नहीं गई है।

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    अधिकारी आते है कार्रवाई के नाम पर...

    ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर आते है तीनों विभाग के अधिकारी, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से चालू हो जाता है ईंट भट्ठों का काम इससे क्या समझे कि तीनों विभाग के जो आला अधिकारी आते है ग्राम पंचायतों में खाली पेट भरने के लिए कार्रवाई के नाम पर खाली खानापूर्ति करके चले जाते हैं।

    तहसीलदार सीताराम कंवर का इस संबंध में कहना है कि जानकारी मिली है अवैध रूप से संचालित अवैध लाल ईंट भठ्ठो के सम्बंध में पटवारियों को निर्देशित कर दिया गया है  कि प्रत्येक ग्रामो में संचालित ऐसे ईंट भठ्ठो की जानकारी प्राप्त करे व ईंटो का व्यवसाय करने वाले व्यापारियों की भी। कार्यवाही अवश्य की जाएगी।

    हेमंत वर्मा, राजनांदगांव- छत्तीसगढ़
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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