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    मां फर्ज में यकीन रखती है अधिकार में नहीं

     मां फर्ज में यकीन रखती है अधिकार में नहीं 

    मई महीने के दूसरे रविवार को विश्वभर में मदर्स डे मनाया जाता है, आज 9 मई को हम मदर्स डे मना रहे हैं। मदर्स डे नाम से तो आप समझ ही गए होंगे कि ये दिन मां के सम्मान में मनाया जाता है। आईये बताते हैं कि इस दिन को मनाने की शुरुआत कब हुई और किसने, किस उद्देश्य से इस दिन को मनाने की शुरुआत की।

    मां, ये शब्द पूजा-आराधना का पर्याय कहा जाए तो कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि मां की उपाधि तमाम जिम्मेदारियों के साथ साथ स्नेह और ममता से भरी वो शख्सियत है, जो सिर्फ फर्ज में यकीन रखती है अधिकार में नहीं। वो शुखियां देने की हर संभव कोशिश करती है, लेकिन खुशियों की ख्वाहिश नहीं करती, तभी तो इस एक शब्द में सारा ब्रह्माण्ड समाहित लगता है। मां के निस्वार्थ स्नेह को सम्मान के लिए यूं तो किसी खास दिन, तारीख या वक्त की जरूरत नहीं, क्योंकि जीवन दायिनी तो हर क्षण सम्मान की अधिकारी है, फिर भी इसके सम्मान  को एक दिन समर्पित है, जिसे हम मातृ दिवस यानि मदर्स डे के रूप में मनाते हैं। 

    मां सृष्टि की सबसे सुंदर रचना है, जो निस्वार्थ अपनी औलाद के लिए सबकुछ करती है, बिना किसी क्रेडिट की ख्वाहिश के एक मां जीवनभर अपने पद के कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाती है, बच्चे की मुस्कान में अपनी खुशी और बच्चों की इच्छाओं की पूर्ति को अपना ध्येय समझने वाली मां, इंसान को मिला ईश्वर को वो नायाब तोहफा है जिसका कोई सानी नहीं है। मां की इन्ही तमाम खूबियों के प्रति सम्मान के लिए साल का एक दिन समर्पित है.,जिसे मर्दस डे यानि मातृ दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    मौजूदा वक्त के दुनिया के करीब-करीब हर देश में मदर्स डे मनाया जाता है लेकिन इसे मनाने की शुरुआत हुई साल 1914 में, जब अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने 9 मई 1914 को एक कानून पारित किया, जिसमें लिखा था कि मई महीने के हर दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा। मदर्स डे मनाने की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका से ही हुई। इसका श्रेय जाता है अमेरिकन एक्टिविस्ट एना जार्विस को, जो अपनी मां से बहुत प्यार करती थीं और मां की मौत के बाद प्यार जताने और उनके स्नेह को सम्मान देने के लिए उन्होंने इस दिन को मनाने की शुरुआत की। इसके बाद धीरे-धीरे दुनिया के कई और देशों में भी मदर्स डे मनाया जाने लगा। अमेरिका की तर्ज पर ही भारत में भी मई महीने के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है। वहीं यूरोप के कई देशों में इस दिन को मदरिंग डे के रूप में मनाया जाता है।

    ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन को मनाने की शुरुआत ग्रीस में हुई थी। कहा जाता है कि ग्रीस के लोग अपनी माताओं के प्रति सम्मान को दर्शाने के लिए इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं औऱ उन्हें सम्मान देने के लिए इस दिन अपनी माताओं की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि स्यबेले ग्रीक देवताओं की मां थी औऱ ग्रीसके लोग उन्ही के सम्मान में ये दिन मनाते हैं।

    इस दिन को मनाने की शुरुआत, प्रथाएं चाहें जो रही हों, लेकिन उद्देश्य एक है,. धरती पर ईश्वर के जीवंत स्वरूप को सम्मान देना। धरती पर ईश्वर का दूसरा रूप मां ही तो है, जो बिना चाहत, हमारी हर चाहत को पूरा करती है। हमारी खुशियों में अपने गम भूलकर ठहाके भरती है, लेकिन भागमभाग भरी इस जिंदगी में हम मां के ही उस समर्पण को बिसरा देतेहैं जिसे वो जीवन पर्यंत जारी रखती है, बस इसीलिए साल के इस एक दिन बिना भूले. मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर, प्यार और स्नेह के इस दरिया को शुक्रिया कहता है संसार।

    मां का स्नेह है अपरंपार

    इसकी महिमा के आगे नत्मस्तक है संसार

    क्रोध, द्वेष, घृणा, लालच नहीं, निश्छल है मां का प्यार

    इसी स्नेह के सम्मान में मनाया जाता है मातृ दिवस का त्यौहार


    अरविन्द सुथार एवं 

    स्मिथा सिंह 

    Initiate News Agency

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