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    राजनांदगांव। आबकारी का सिस्टम फेल, विभाग के ही लोग कर रहे हैं बड़ा खेल

    राजनांदगांव। जैसा कि अभी कुछ दिनों पहले ही बताया था कि अवैध शराब तस्करी को लेकर आबकारी अमला यूं ही खामोश नहीं है, इसके पीछे बड़ी सांठगांठ है। लगातार बहुत बड़ी मात्रा में महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश की शराब यहां खपाई जा रही है। रोज लाखों का माल मिलीभगत से ठिकाने लगाया जा रहा है। आखिर बिना विभागीय संरक्षण के यह कैसे संभव है? आज देखते ही देखते राजनांदगांव जिले को अवैध शराब का गढ़ बना दिया गया है। पड़ोसी राज्यों की सीमा से लगे होने के कारण तस्करों के लिए यह सुविधा का केन्द्र तो है ही, लेकिन अब आबकारी के भ्रष्ट मातहतों ने भी यहां अपनी तिजोरियां भरने के लालच में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

    विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिलने पर हमारी टीम ने इसकी पड़ताल के लिए चिचोला, बागनदी, बोरतलाव, कवर्धा, गढ़चिरौली, गातापार और साल्हेवारा जैसे इलाकों का दौरा किया, क्योंकि इन्ही इलाकों से लगातार बड़ी तस्करी की खबरें सामने आ रही हैं। खबर की पुष्टि करते हुए कई स्थानीय कोचियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आबकारी के अधिकारी ने ही उन्हें खुली छूट दे रखी है। 

    बाकायदा ऊपर से मासिक रूप से लिफाफा फिक्स किया गया है। लिफाफे का वजन बिक्री के हिसाब से 10,000 से 30,000 रूपए तक रखा गया है। इतना ही नही स्पष्ट रूप से 70-80 रूपए का माल 250-300 रूपए तक बेचने की छूट दी गई है। इसलिए कालाबाजारी भी सभी अलग-अलग इलाकों में लगभग एक ही कीमत पर की जा रही है, जो शर्तें मानकर इन्हें लिफाफे देता रहता है वो खुलेआम धंधा कर सकता है और जो नहीं मानता उसे जबरन मामला बनाकर जेल भेजने की धमकी दी जाती है। कईयों को इस तरह गिरफ्त में भेजा भी जा चुका है। इसके चलते भी इस विभागीय संरक्षण की दरकार बरकरार रहती है। 

    जब सईंयां भये कोतवाल तो डर काहे का...इसी तर्ज पर बड़े तस्करों से लेकर छोटे कोचियों तक सभी को अभयदान मिला हुआ है। साथ ही इस खेल से जुड़े एक तस्कर ने तो यह भी बताया कि आने वाली शराब की हर पेटी के पीछे आबकारी विभाग के लोगों का पूर्व निर्धारित कमीशन जुड़ा होता है। बॉर्डर पार करने वाले मालवाहक का नंबर उन्हें पहले ही दे दिया जाता है। जिसमे लगभग 500-700 पेटी माल आराम से आ जाता है और किसी का बड़ा आर्डर मिलने पर भी पूरी गेरेंटी के साथ उन्हें निर्भीक होकर यहां-वहां कहीं भी ले जाने के लिए आश्वस्त किया जाता है, क्योंकि सारी जानकारी पहले ही साझा की जा चुकी होती है। इस खेल में कई कोचियों की जुबान से एक झारिया नाम के अधिकारी का भी नाम सामने आया है।

    वैसे भी देखा जाए तो बड़े स्तर पर इतना बड़ा खेल बिना मातहतों की शह के संभव भी नहीं है। इस पूरे मामले पर पक्ष रखने के लिए आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त नवीन सिंह तोमर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर के प्रकाशित होने तक संपर्क नहीं हो पाया।

    बहरहाल अब यह देखना बहुत रोमांचक होगा कि इस गंभीर और बड़े खुलासे के बाद आखिर किस-किस पर क्या कार्रवाई की जाती है? या कोई छूटपुट कार्रवाई कर खानापूर्ति से ही काम चलाया जाएगा? या फिर कोई बड़ा एक्शन लेकर विभाग की धूमिल छवि सुधारने की पहल की जाएगी?


    हेमंत वर्मा 

    Initiate News Agency(INA), राजनांदगांव 

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