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    कारी उस्मान के इंतकाल के बाद कार्यवाहक अध्यक्ष बने मौलाना महमूद मदनी

    कारी उस्मान के इंतकाल के बाद कार्यवाहक अध्यक्ष बने मौलाना महमूद मदनी

    • वर्किंग कमेटी की बैठक में देशभर के उलमा ने किया था दोनों जमीयत के एकीकरण का समर्थन
    • वर्ष 2008 में चाचा भतीजे के बीच विवाद के बाद जमीयत हुई थी दो फाड़
    • अध्यक्ष के रुप में एक जमीयत पर काबिज हैं

    देवबंद/सहारनपुर उत्तरप्रदेश : जमीयत उलमा.ए.हिंद के एकीकरण को लेकर कवायद तेज हो गई है। चार दिन पूर्व दिल्ली मुख्यालय पर हुई जमीयत की बैठक में भी देशभर के उलमा मौलाना महमूद मदनी गुट से जुड़े ने इसका भरपूर समर्थन किया था। लेकिन बड़ा सवाल यह है की एकीकरण हुआ तो संगठन का अध्यक्ष किसे चुना जाएगा चाचा मौलाना अरशद मदनी या फिर भतीजे मौलाना महमूद मदनी को। यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि कारी उस्मान मंसूरपुरी के इंतकाल के बाद रिक्त हुए अध्यक्ष पद पर महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे मौलाना महमूद मदनी को कार्यवाहक अध्यक्ष के रुप में चुना गया है। देशभर के मुसलमानों की स्थिति में सुधार लाने और दीन इस्लाम का परचम बुलंद करने को वर्ष 1919 में जमीयत उलमा.ए.हिंद का गठन किया गया। जिसमें देश के प्रमुख उलमा को शामिल किया गया था। चंद सदस्यों से शुरु हुई जमीयत उलमा आज करीब एक करोड़ सदस्यों को साथ लेकर चल रही है। समय गुजरने के साथ ही जमीयत पर हक जताने को लेकर विवाद भी शुरु हो गया। यह विवाद वर्ष 2007 में तब जगजाहिर हुआ जब चाचा मौलाना अरशद मदनी और भतीजे मौलाना महमूद मदनी के बीच जमीयत को लेकर आपसी मनमुटाव हो गया। वर्ष 2008 में जमीयत दो फाड़ हो गई। एक जमीयत पर अरशद मदनी काबिज हुए और उसके अध्यक्ष बन गए।

    कारी उस्मान मंसूरपुरी

    जबकि दूसरी जमीयत पर मौलाना महमूद मदनी ने अपना कब्जा जमा लिया और मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को अध्यक्ष बनाया गया था। 21 मई को कारी उस्मान मंसूरपुरी का इंतकाल हो गया। जिससे अध्यक्ष पद रिक्त हो गया। चार दिन पूर्व दिल्ली जमीयत मुख्यालय पर वर्किंग कमेटी की बैठक का आयोजन हुआ। जिसमें मौलाना महमूद मदनी को कार्यवाहक अध्यक्ष चुना गया। लेकिन इसके साथ ही देशभर के उलमा ने पुनः दोनों जमीयतों के एकीकरण को लेकर पुरजोर तरीके से समर्थन किया। दोनों जमीयत एक हो भी गई तो बड़ा सवाल यह उठता है की इसका अध्यक्ष किसे चुना जाएगा। इसको लेकर चर्चाएं शुरु हो गई हैं।

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    मतभेद खत्म करने को मजलिस.ए.शूरा ने बनाई थी तीन सदस्यीय कमेटी...

    महमूद मदनी

    जमीयत उलमा.ए.हिंद को एक करने के लिए पिछले साल दारुल उलूम की मजलिस.ए.शूरा ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। जिसमें मौलाना उसामा कानपुरी मौलाना शाहिद और मौलाना आकिल को शामिल किया गया था। लेकिन काफी जद्दोजहद करने के बाद भी मुद्दे का कोई हल नहीं निकला था।

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    कोर्ट में भी गया था जमीयत की लड़ाई का मुद्दा...

    जमीयत में अध्यक्ष पद पर काबिज होने को लेकर रार हुई थी। चाचा अरशद मदनी खुद अध्यक्ष बनना चाहते थे और भतीजे मौलाना महमूद मदनी कारी उस्मान मंसूरपुरी या स्वयं को अध्यक्ष बनाना चाहते थे। इसी मुद्दे पर उनके बीच तल्खी बढ़ती चली गई। मामला इतना बढ़ा की दोनों गुट अदालत भी पहुंच थे। यहां यह बताना जरुरी है की स्वर्गीय कारी उस्मान मंसूरपुरी मौलाना अरशद मदनी के बहनोई भी लगते थे।

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    जमीयत के गठन के बाद यह रहे अध्यक्ष...

    1. मौलाना मुफ्ती किफायतुल्ला

    2. मौलाना अहमद सईद दहेलवी

    3. मौलाना हुसैन अहमद मदनी

    4. मौलाना फखरुद्दीन

    5. मौलाना अब्दुल वहाब कार्यवाहक

    6. मौलाना असद मदनी

    7. मौलाना अरशद मदनी

    8. कारी उस्मान मंसूरपुरी


    वर्तमान में मौलाना महमूद मदनी कार्यवाहक अध्यक्ष के रुप में चुने गए हैं।

    जमीयत एकीकरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती है अपनों को मनाना

    दोनों गुटों की जमीयत की देशभर में है 4 हजार से अधिक यूनिट

    राज्य जनपद और ब्लाक इकाईयों के पदाधिकारियों को मनाने को नहीं बन पा रहा फार्मूला


     जमीयत उलमा.ए.हिंद के एकीकरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनो को मनाना है। क्योंकि चाचा मौलाना अरशद मदनी और भतीजे मौलाना महमूद मदनी गुट की जमीयत की देशभर में अलग अलग यूनिटें हैं। जिनके ओहदेदारों को मनाने के लिए लगातार प्रयास भी किए जा रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई फार्मूला बन नहीं पाया है। इसी वजह से एकीकरण की प्रक्रिया को पूरा करने में देरी हो रही है।

    वर्ष 2008 में अलग अलग हुई जमीयत उलमा.ए.हिंद को एक करने की कोशिशें यूं तो पिछले काफी दिनों से चल रही हैं। लेकिन मौलाना महमूद मदनी गुट के अध्यक्ष कारी उस्मान मंसूरपुरी के इंतकाल के बाद एकीकरण को लेकर कोशिशें तेज कर दी गई हैं। इस सिलसिले में हाल में ही दिल्ली जमीयत मुख्यालय पर मौलाना महमूद मदनी गुट की वर्किंग कमेटी की हुई बैठक में देशभर के उलमा ने एकीकरण के मुद्दे को उठाया और इसका पुरजोर तरीके से समर्थन भी किया था। लेकिन दोनों धड़ों को एक करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती देशभर में गठित इकाईयों के पदाधिकारियों को मनाने की है। क्योंकि मौलाना अरशद मदनी और मौलाना महमूद मदनी के संगठन की देशभर में करीब चार हजार से अधिक यूनिट हैं। जिनके ओहदेदारों को मनाकर एक प्लेटफार्म पर लाना बेहद मुश्किल काम है। जमीयत सूत्रों की माने तो दोनों संगठन की एकीकरण की अंदरुनी प्रक्रिया तो लगभग पूरी हो चुकी है। लेकिन जम्मू कश्मीर को छोड़ कर सभी राज्य जनपद और ब्लाक स्तर पर गठित इकाईयों के ओहदेदारों को मनाने के लिए दोनों तरफ से प्रयास चल रहे हैं और तीन.तीन सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया है। लेकिन अभी तक कोई मजबूत फार्मूला नहीं बन पा रहा है। जिस वजह से दोनों जमीयत को एक करने की प्रक्रिया में देरी हो रही है।

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    इन पर है अपनो को मनाने की जिम्मेदारी....

    कारी उस्मान मंसूरपुरी

    एकीकरण से पहले सभी यूनिटों के ओहदेदारों को तालमेल बिठाकर मनाने के लिए जिन दो कमेटियों का गठन किया गया है। उसमें मौलाना अरशद मदनी के संगठन की ओर से मौलाना अशहद रशीदीए मौलाना मुफ्ती अशफाक आजमी और मौलाना असजद मदनी जबकि मौलाना महमूद मदनी के संगठन की तरफ से मौलाना नियाज अहमद फारुकीए मौलाना मुफ्ती अहमद देवला और मौलाना मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी को कमेटी में शामिल किया गया है।

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    एकीकरण के बाद मौलाना अरशद मदनी बनेंगे अध्यक्ष...

    देवबंद : जमीयत उलमा.ए.हिंद के दोनों धड़ों के एक होने के बाद अध्यक्ष कौन होगा। यह सबसे बड़ा सवाल है। लेकिन जमीयत के एक गुट की जिम्मेदार की माने तो लगभग इस बात पर दोनों गुटों की रजामंदी बन चुकी है की जमीयत के एक होने के बाद मौलाना अरशद मदनी को ही अध्यक्ष बनाया जाएगा जबकि मौलाना महमूद मदनी महासचिव पद पर रहेंगे। हालांकि इस पर अभी मुहर नहीं लगी है। गौरतलब है की कारी उस्मान मंसूरपुरी के इंतकाल के बाद मौलाना महमूद मदनी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है।

    शिबली इक़बाल, देवबंद/सहारनपुर उत्तरप्रदेश
    INA NEWS(Initiate News Agency)

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