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    लॉकडाउन होने से उद्योग-धंधे हुए ठप, मजदूरों के सामने दो जून की रोटी का संकट

    लॉकडाउन होने से उद्योग-धंधे हुए ठप, मजदूरों के सामने दो जून की रोटी का संकट

    सम्भल-उत्तर प्रदेश : कोरोना वायरस के चलते देश में 10 मई सुबह 7 बजे तक लॉकडाउन है। नतीजा औद्योगिक इकाइयां ठप हो गईं। चाहे वो सम्भल का हेंडीक्राफ्ट का उद्योग हो। इसका सीधा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। मजदूरों ने जैसे-तैसे लॉकडाउन के दिन बिता दिए, लेकिन दूसरे वेब में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या घटने के बजाय बढ़ती जा रही है।

    सब्जी वाले

    उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि, यदि यही हालत रहे तो लॉकडाउन आगे भी बढ़ेगा। ऐसे में व्यवसाय ठप रहे तो दिहाड़ी मजदूरों के सामने खाने का संकट खड़ा हो रहा है। सम्भल शहर के प्रमुख उद्योग हेंडीक्राफ्ट व उनसे जुड़े कामगारों का हाल जाना।

    मिस्त्री

    लॉकडाउन लगने से निर्यात भी गड़बड़ाने लगा है। विदेशो को जाने वाली हवाई सेवा पर भी प्रतिबंध लग चुका है।सम्भल में हेंडीक्राफ्ट सबसे उद्यमी वर्ग तो त्रस्त है ही कारीगरों का और बुरा हाल है। कुछ कारीगर ने अन्य कामों में हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। कोरोना वायरस के दूसरे वेब में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विदेश में अपनी पहचान बनाने वाला सम्भल के हेंडीक्राफ्ट पर संकट गहरा रहा है।

    बन्द पड़े कारखानो से मज़दूरों पर रोटी रोज़ी का संकट आने लगा है। तो वही मजदूरो का बुरा हाल है। कुछ मजदूर तो सब्जी फल बेच कर अपना घर चला रहे है। हैंडीक्राफ्ट यूनियन के अध्यक्ष ने बताया कि सम्भल के सरायतरीन मे हैंडीक्राफ्ट का बड़े पैमाने मे काम होता है।

    सब्जी वाले
    यहाँ पर 25 हजार लोगो का रोजगार चलता है। साथ ही यहाँ से जो सामन बनता है। वह चीन, यूरोप आदि जगहो पर सामान जाता है। चीन मे 40% माल सप्लाई होता है और बाकी अन्य देश मे सप्लाई होती है। पिछले वर्ष मे लाॅकडाऊन लगने से हैंडीक्राफ्ट मे भारी नुकसान हुआ था, लेकिन उसके बाद से आज भी कोई काम नही हो रहा है। सभी कारख़ाने बंद है। कोरोना की दूसरी लहर मे अगर लाॅकडाउन जैसी स्थित आ गई, तो भूखमरी की स्थिति से मज़दूरों को दो चार होना पड़ेगा है।



    उवैश दानिश
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, सम्भल-उत्तर प्रदेश 

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