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    गया/बिहार। 9 सूत्री मांगों को लेकर स्वयं सहायता समूह के महिलाओं किया प्रदर्शन

    गया/बिहार। राज्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी व जीविका की महिलाओं ने आज अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।

     9 सूत्री मांगों को लेकर स्वयं सहायता समूहों-जीविका से जुड़ी महिलाओं ने अपने घरों में धरना-प्रदर्शन किया।

    अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन और स्वयं सहायता समूह सह जीविका संघर्ष समिति राज्यव्यापी आह्वान के तहत आज गया भर में अपने - अपने घरों से महिलाओं ने मांग पत्र लेकर प्रदर्शन किया.इस कार्यक्रम में शामिल ऐपवा की जिला सचिव सह स्वंय सहायता समूह संघर्ष समिति के राज्य संयोजीका रीता बरनवाल ने कहा कि अखबारों में जीविका दीदीयों को स्वरोजगार से जोड़ने की बड़े-बड़े बातें नीतीश सरकार कर रही है और अखबार तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में  मास्क बनाने खबरें छप रही है लेकिन जमीनी सच्चाई कोषों दूर है। ग्रामीण अंचलों में सिलाई मशीन की ट्रेनिंग देना जरूरी है और सिलाई मशीन के साथ वक॔-शाॅप की जरूरत है। लेकिन मास्क बनाने का काम  कुछ शहरों में ही  हो रहा है,  मास्क के अतिरिक्त दूसरी तरह का काम/ रोजगार भी इन्हें दिया जा सकता है. बशर्ते कि सरकार इनकी मदद के लिए चिंतित हो। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का नारा देने वाली सरकार आज भी विदेशों से मास्क आयात कर रही है जबकि देश में सामान्य सी ट्रेनिंग के जरिए करोड़ों महिलाएं इस तरह का अन्य उत्पादन के कार्य कर  सकती हैं।

    रीता वर्णवाल ने कहा कि महामारी के इस दौर में प्राइवेट फायनांस कम्पनियों और बैंकों द्वारा महिलाओं को किस्त जमा करने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है। कई मामलों में कर्जवसूली हेतु महिलाओं के साथ अभद्रता की जा रही है। ऐपवा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि-

    1.स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अविलंब काम दिया जाय।

     2 . समूह से जुड़ी सभी महिलाओं को काम की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाए और उनके उत्पादों की अनिवार्य खरीद सरकार करे.

     3.समूहों से जुड़ी इन महिलाओं का कर्ज माफ किया जाय।

    4.कर्ज वसूली के लिए महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार या प्रताड़ना करने वाले कर्मचारियों को दंडित किया जाय.

    5. माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं, निजी बैंको के मनमाने सूद दर पर रोक तथा उनके एक समान नियम कानून के तहत संचालन की व्यवस्था की जाय.

    6. सामुदायिक उत्प्रेरक समेत सभी जीविका कर्मियों को पहचान पत्र दिया जाय.

    7.सभी जीविका कर्मियों का बीमा किया जाय.

    8. सामुदायिक उत्प्रेरक (CM) समेत किसी भी जीविका कार्यकर्ता पर हमला या असुरक्षा से बचाव की जवाबदेही संबंधित उच्च अधिकारी की हो.

    9.CM या समकक्ष जीविका कार्यकर्ताओं को न्यूनतम ₹18,000 मासिक मानदेय दिया जाय और इसका भुगतान सरकार/परियोजना द्वारा हो.

     उपरोक्त मांगो को लेकर गया नगर गेवालविगहा में रीता बरनवाल, नौशावा परवीन, बरती चौधरी, रीमा देबी, प्रिया देबी डोभी कुरमांवा शीला वर्मा, आरती देवी, सरोज बाला, मीरा देवी, शयामफुल देवी, चंदौती के धनसीर और केवाली में रीना देवी, सुनीता देवी,क्रान्ति दे,रेखा देवी ने नेतृत्व किया ।इन  संगठनों ने एक साथ आवाज बुलंद किया  रीता बरनवाल सचिव/संयोजिका 

    स्वयं सहायता समूह सह जीविका संघर्ष समिति

    अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ( ऐपवा )


    प्रमोद कुमार यादव 

    Initiate News Agency(INA), गया/बिहार 

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