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    आईपीएस ने संभाली पुलिस कोविड-19 अस्पताल की कमान

    आईपीएस ने संभाली पुलिस कोविड-19 अस्पताल की कमान 

    कानपुर- उत्तर प्रदेश : एक आईपीएस अफसर की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने की होती है । संकटकाल में अगर वही अफसर अपनी जिम्मेदारी के साथ साथ मरीजों की सेवा में लगे तो तारीफ तो बनती है । पुलिस लाइन में कोरोना मरीजों के लिए 16 बेड के एल 1 हॉस्पिटल की कमान एडीसीपी डॉक्टर अनिल कुमार के हाथों में है। पुलिस लाइन में बने एल 1 हॉस्पिटल में पुलिसकर्मियों व उनके परिजनों का इलाज होता है । जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टर अनिल कुमार इस अस्पताल की कमान संभाले हैं।डॉ कुमार की बहन डॉ. मंजू आईएएस हैं।  वो भी कोरोना मरीजों का इलाज कर रही हैं। दोनों भाई-बहन सिविल सेवा में आने से पहले एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुके हैं।

    डॉक्टर अनिल खुद इस अस्पताल और ओपीडी की कमान संभालते है । गंभीर मरीजों को एल 1 में भर्ती भी अपनी देखरेख में कराते हैं । अस्पताल का राउंड लगा  कर दवाइयों व इलाज की देखरेख करते है। डॉ अनिल कुमार ने जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज एमबीबीएस करने के बाद कुछ दिनों तक दिल्ली के गुरु तेगबहादुर अस्पताल में प्रैक्टिस भी की है। वह राजस्थान में झुंझनू जिले के अलसीसर के रहने वाले हैं। अनिल ने दूसरी लहर आते ही कानपुर पुलिस लाइन में 16 बेड का एक एल-1 श्रेणी का हॉस्पिटल शुरू कर दिया। अब तक इस अस्पताल मे करीब 18 मरीजों को ठीक किया गया है। ओपीडी में भी कई मरीजो को इलाज दिया गया है। जिसमे ज्यादातर पुलिसकर्मी और उनका परिवार शामिल हैं।

    डॉ अनिल के अनुसार महामारी के इस वक्त में देश का हर आदमी अपने तरीके से इससे निपटने में सहयोग कर रहा है । एक डॉक्टर होने के नाते और एक पुलिस कर्मी होने के नाते मुझे दोनों क्षेत्रों का अनुभव मेरे काम आया । अभी तक करीब 18 लोगो को हम ठीक कर चुके है, और करीब 400 से 450 मरीजो को ओ पी डी में दवाई देकर उनका उपचार कर चुके है । साथ ही रैपिड एंटीजन टेस्ट के माध्यम से हम कॅरोना की टेस्टिंग भी कर रहे है । उनका कहना है कि प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद भी बच्चे सिविल सर्विसेज में जाते है उनके सामने एक सवाल आता है कि प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद वो क्यों सिविल सर्विसेज में जाना चाहते है । मेरे सामने भी यह सवाल आया था की एम बी बी एस करने के बाद सिविल सर्विसेज में क्यों जाना चाहते हो, इसका जवाब मुझे ही नही बल्कि उन सभी डॉक्टरों को जो सिविल सर्विसेज में है उन्हें इस महामारी के दौरान मिला है ।

    वन्ही आज अस्पताल से डिस्चार्ज हुई राधा तिवारी का कहना है कि उन्हें दस - बारह दिन से बुखार आ रहा था शरीर मे कमजोरी बहुत थी । टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी । इस अस्पताल में सारी सुविधाएं मिली और अब ठीक हो गई है । डॉ अनिल बहुत अच्छे है जिस तरह हमे ठीक किया है सबको ठीक करें । अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर विशाल मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में 15 से ज्यादा बेड है । यह एल 1 टाइप अस्पताल है । आज राधा तिवारी को अपनी देख रेख में डिस्चार्ज किया है । इनका रैपिड एंटीजन टेस्ट भी निगेटिव आया है । और डॉ अनिल कुमार के नेतृत्व में  यह काम संभव हो पाया है ।

    इब्ने हसन जैदी
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, कानपुर उत्तर प्रदेश

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