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    हजरत मौहम्मद साहब की तस्वीर छापने पर मुस्लिम समाज में रोष

    हजरत मौहम्मद साहब की तस्वीर छापने पर मुस्लिम समाज में रोष

    देवबंद/सहारनपुर उत्तर प्रदेश : लगता है कुछ लोगों को देश का भाईचारा, अनेकता में एकता, भारत की अखण्डता सुहाती नहीं है या फिर यूं कहें कि कुछ लोग सुर्खियों में बने रहने हेतू रोज नये-नये विवादित बयान एवं लेख लिखते रहते हैं। उन्हें किसी की भावना आहत हो या न हो से कोई लेना-देना नहीं है।

    ऐसा ही एक मामला फिर से जनपद सहारनपुर के विभिन्न स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली पाठय पुस्तक सोशल साइंस जिसको विद्या प्रकाशन मंदिर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित एवं रेनू बिश्रोई नामक लेखक द्वारा सम्पादित किया गया है।

    उक्त कक्षा-4 की पुस्तक के अध्याय 'दे शोव्ड अस दा वे० के पृष्ठ संख्या-89 पर मुस्लमानों के आखिरी पैगम्बर हज़रत मौहम्मद मुस्तुफा (स०) का चित्र छापा गया है। जिसे देखते ही मुस्लिम समाज के लोगों में रोष पैदा हो गया है।

    विदित हो कि हर अभिभावक अपने नौनिहालों के लिए एक अप्रैल से नये सत्र के लिए स्कूलों में दाखिलों हेतू भागदौड़ शूरू कर देते हैं।

    ऐसा ही मामला सहारनपुर महानगर में पेश आया जहां कई अभिभावकगण मटिया महल स्थित जैन बुक डिपो पर पुस्तके लेने पहुंचे और जैसे ही उन्होंने पुस्तक को खोलकर देखना चाहा तो उसमें आखिरी पैगम्बर की फोटो देखकर बड़ा रंज हुआ।

    बता दें कि इस पुस्तक में लेखक द्वारा भारत में समाजसुधारकों में कबीरदार, राजाराम मोहन राय, सर सैय्यद अहमद खान, रामाबाई राणाडे, जैसस क्रिस्ट, गुरू नानक देव, जराथ्रस्ट्रा, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद एवं तुलसीदास द्वारा समाजहित में किये गये कार्यो एवं सामाजिक बुराईयों को समाप्त करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाया गया है।

    पुस्तक में हिन्दुत्व, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई, मुस्लिम व सिख आदि धर्मो की उत्पत्ति के विषय में लेखक द्वारा विस्तारपूर्वक बताया गया। लेकिन इन्हीं के साथ पुस्तक के लेखक यह भूल गये कि मुस्लिम मज़हब में मूर्ति एवं फोटो प्रतिबंधित है बावजूद इसके लेखक द्वारा मुस्लमानों के आखिरी पैगम्बर की फोटो छाप दी गयी। जिस पर मुस्लिम समाज को कडी आपत्ति हुई। इस सम्बन्ध में मज़हर उमर खान, हुम्मैद सरोहा, अमर हक राणा, शौकीन राणा, नदीम आदि ने आखिरी नबी की तस्वीर छापे जाने पर बड़ा रोष जताया तो इस पर बुक डिपो स्वामी ने कहा कि यह उनका दोष नहीं बल्कि वह तो केवल बुक सेलर हैं। विद्या प्रकाशन मंदिर लिमिटेड की इस घिनौनी हरकत से नाराज़ मुस्लिम समाज के लोगों ने सांसद हाजी फजलुर्रहमान के समक्ष अपनी पीड़ा रखी।

    जिस पर सभी ने अफसोस जाहिर करते हुए प्रकाशक एवं सम्पादक के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही किये जाने की बात कही। समाचार लिखे जाने तक बैठक जारी थी। अब देखना होगा कि बैठक में क्या निर्णय लिया जायेगा। प्रशासन को इस बारे अवगत कराने का फैसला लिया जायेगा या फिर खामोशी अख्तियार की जायगी|

    शिबली इक़बाल 
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी  सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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