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    देवबंद। रमजान में अल्लाह अपने बंदों के लिए रहमत और बरकतों के दरवाजे खोल देता है: कासमी

    देवबंद। मदरसा जामिया शेखुल हिन्द के मोहतमिम मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि रमजान का कोई रोजा कजा (छूट) जाए तो रमजान बाद उस कजा रोजे को जितनी जल्दी हो सके रख लेना चाहिए।

    रमजान माह की अहमियत पर रोशनी डालते हुए मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि रमजान में अल्लाह अपने बंदों के लिए रहमत और बरकतों के दरवाजे खोल देता है। इसके साथ ही इस माह में रोजे रखने की बड़ी फजीलत है। कहा कि अगर रमजान का कोई रोजा कजा हो जाए तो रमजान के बाद जितनी जल्दी मुमकिन हो सके उस रोजे की कजा रखना बेहतर है। बिना वजह देर करना अच्छा नहीं है। कासमी कहा कि अगर किसी वजह से अगले रमजान तक भी यह कजा रोजा न रख सकें तो उसके बाद रख लें तो बेहतर है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर बुढ़ापे की वजह से किसी को रोजा रखने की ताकत न हो तो उसके लिए रोजा न रखने की इजाजत है।


    शिब्ली इक़बाल 

    Initiate News Agency (INA), देवबंद 

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