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    देवबंद: वो उर्दू का मुसाफिर दुनिया को कह गया अलविदा

    देवबंद: वो उर्दू का मुसाफिर है यही पहचान है उसकी, जिधर से भी गुजरता है सलीका छोड़ जाता है। इस शेर को कहने वाले शायर दानिश आमरी दुनिया को अलविदा कह गए। उनके इंतकाल पर शायरों, साहित्यकारों और नगरवासियों ने गहरे दुख का इजहार किया है।

    ५५ साल की उम्र में हुआ मशहूर शायर दानिश आमरी का इंतकाल

    मोहल्ला अबुलमाली निवासी दानिश आमरी पिछले करीब पांच वर्ष से बीमार चल रहे थे। यही वजह थी कि बीमारी के चलते उन्होंने मंचों पर जाना बंद कर दिया था। लेकिन उनका मशहूर शेर वो उर्दू का मुसाफिर है देश विदेशों में होने वाले मुशायरों के मंचों पर नामचीन शायरों के द्वारा पढ़ा जाता रहा है, जो दानिश आमरी की कमी को पूरा करता था। सोमवार की रात्रि बीमारी के चलते वो उर्दू का मुसाफिर दुनिया को अलविदा कहकर कभी न खत्म होने वाले सफर पर चला गया। दारुल उलूम की आहत-ए-मोलसरी में नमाज-ए-जनाजा अदा करने के बाद नम आंखों के साथ दानिश आमरी को मजार-ए-कासमी कब्रिस्तान में सुपूर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके इंतकाल पर यूपी उर्दू अकादमी के पूर्व चेयरमैन व शायर डा. नवाज देवबंदी, यू पी राब्ता कमेटी के जनरल सेक्रेटरी डा० उबैद इकबाल आसिम, वली वकास, डा. नदीम शाद, जहान-ए-अदब के चेयरमैन तनवीर अजमल,  मो.जुहैर, डा. काशिफ, डा. शमीम देवबंदी, वजाहत शाह, मास्टर शमीम किरतपुरी, मुजम्मिल हसन, डा. अदनान अनवर, फैसल उस्मानी, सुहैल अकमल आदि ने गहरा दुख जताया। 


    शिब्ली इक़बाल 

    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, देवबंद  


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