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    बीमार इकलौते बेटे के इलाज के लिए दर दर भटक रही विधवा मां

    बीमार इकलौते बेटे के इलाज के लिए दर दर भटक रही विधवा मां

    • दो महीने से इलाज के अभाव में बीमारी से जूझ रहा युवक
    • न शासन से मदद न प्रशासन से मदद, जनप्रतिनिधियों ने भी फेरा गरीब से मुँह

    शाहजहाँपुर : एक विधवा मां अपने एकलौते बेटे ले इलाज के लिए दर-दर भटक रही है। मां की ममता ऐसी है कि बेटे के लिए किसी भी दर पर झोली फैलाने को तैयार है, बस इच्छा इतनी है उसका एकलौता बेटा कैसे भी करके पहले जैसे ठीक हो जाये। मगर इस बेरहम समाज से अभी तक उसे कोई मदद नही मिली है। हम बात कर रहे हैं शाहजहाँपुर जनपद के ब्लाक भावलखेड़ा के ग्राम पंचायत रौरा की रहने वाली 60 वर्षीय मंजू देवी की। मंजू देवी के पति रामऔतार की मृत्यु हो चुकी हैं। उनके दो बेटियां व एक इकलौता पुत्र है। दोनो बेटियों की जैसे तैसे शादी कर दी। मंजू देवी के पास ना रहने के लिए छत है, न शौचालय, न विधवा पेंशन और न ही इलाज कराने के लिए पैसा। भूमिहीन मंजू देवी के आगे दुखो का पहाड़ तब टूट पड़ा जब उनका 18 वर्षीय इकलौता बेटा पप्पू बीमार पड़ गया। पप्पू करीब दो महीने से चारपाई पर बीमारी के कारण पड़ा हुआ है।

    इलाज के लिए विधवा मां के पास पैसा तक नही है, बस लाचारी से बेटे को निहारती रहती है और सोचती है कब कोई मसीहा आएगा उसके बेटे के इलाज होगा और वह पहले जैसा ठीक हो जाएगा। इस आस में बेचारी मंजू देवी दर दर भटक रही है। मंजू देवी करीब 1 हफ्ते से हर किसी के आगे मदद की गुहार लगा चुकी हैं, मगर आजतक कोई ऐसा व्यक्ति उन्हें मिला जो उनके बेटे का इलाज करवा सके। सरकारी तंत्र आयुष्मान भारत योजना का दम्भ तो भरता है, लेकिन हकीकत में पात्र लोगो को इसका लाभ शायद ही कभी मिल पाता हो। शासन-प्रशासन के तमाम दावे हवा हवाई साबित होते हैं, क्योंकि मंजू देवी जैसे जरूरतमंद सिर्फ कागजों की खानापूर्ति तक ही समिति रह जाते हैं। जनप्रतिनिधि भी अपने बैंक एकाउंट भरने में लगे रहते हैं, गरीब की सुध लेने वाला इस जमाने मे शायद कोई नही है। मंजू देवी से संपर्क के लिए उक्त मोबाइल नम्बरो पर सम्पर्क किया जा सकता है।

    फ़ैयाज़ उद्दीन
    आईएनए न्यूज़ एजेंसी, शाहजहाँपुर, 
    उत्तर प्रदेश

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