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    देवबंद। रमजान के दूसरे अशरे में अल्लाह से गुनाहों की तौबा करेंः फरीदुद्दीन

    देवबंद। शेखुल इस्लाम एकेडमी के मौलाना फरीदुद्दीन कासमी ने मुकद्दस रमजान की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह रमजान का दूसरा अशरा है जिसे मगफिरत का अशऱा माना जाता है। इसमें बंदों को अल्लाह से अपने गुहानों की तौबा करनी चाहिए।

    मंगलवार को मौलाना फरीदुद्दीन कासमी ने कहा कि मगफिरत वाले इस अशरे में लोगों को कसरत के साथ अस्तग़फ़ार पढ़नी चाहिए और अल्लाह से अपने तमाम छोटे बड़े गुनाहों की तौबा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन दिनों में अल्लाह ताआला अपने बंदों की इबादत, मोहब्बत और इखलास को देखकर उनके गुनाहों की बख्शीश फरमाएगा। लिहाजा हमको ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारना चाहिए। मौ्लाना फरीदुद्दीन कासमी ने कहा कि तमाम रोजेदारों को चाहिए कि वे हर नमाज के बाद और कुरआन-एःकरीम की तिलावत के बाद दुनिया में फैल रही महामारी से निजात के लिए और पूरी इंसानियत की हिफाजत के लिए अल्लाह से रो-रोकर दुआएं मांगे। क्योंकि अल्लाह बड़ा रहम वाला है। जब बंदे अल्लाह से लौ लगाकर गुनाहों की तौबा करते हुए दुआ मांगेंगे तो अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को जरूर कबूल करता है।

    ङा0 शिबली इकबाल

    Initiate News Agency (INA), देवबंद

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